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Maharajganj News: नारायणी का जलस्तर घटा, अब कटान से हुए नुकसान का होगा आकलन

Fri, 11 Sep 2026 01:21 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 11 Sep 2026 01:21 AM IST
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Water level of the Narayani has receded; damage caused by erosion will now be assessed.
फोटो परिचय : भेड़िहारी के पास नारायणी नदी किनारे कटान की चपेट में आया गन्ने का खेत।
निचलौल। नारायणी (बड़ी गंडक) नदी का जलस्तर अब लगातार घट रहा है। जलस्तर कम होने के बाद नदी किनारे बाढ़ के दौरान हुए कटान के निशान दिखाई देने लगे हैं। भेड़िहारी के पास नदी किनारे स्थित गन्ने के खेतों में भी कटान से नुकसान हुआ है। हालांकि, कितनी कृषि भूमि नदी में समाहित हुई और वन क्षेत्र को कितना नुकसान पहुंचा है, इसकी वास्तविक स्थिति विभागीय सर्वे के बाद ही स्पष्ट होगी।
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बाढ़ के दौरान नदी में तेज बहाव के कारण किनारे के खेतों में कटान हुआ। इससे किसानों की फसल प्रभावित हुई है। वहीं, नदी के तेज बहाव के साथ बड़ी संख्या में बहकर आई लकड़ियों से नदी किनारे के वन क्षेत्र में भी पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के निचलौल और शिवपुर रेंज के कुछ हिस्सों में भी बाढ़ का पानी पहुंचा था। जलस्तर कम होने के बाद अब वन विभाग नदी किनारे के वन क्षेत्र का निरीक्षण कराने की तैयारी में है। निरीक्षण और सर्वे के बाद ही जंगल को हुई क्षति का वास्तविक आकलन हो सकेगा।
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तहसीलदार अमित कुमार सिंह ने बताया कि बाढ़ प्रभावित गांवों के लेखपालों को अपने-अपने क्षेत्र में फसलों और कृषि भूमि को हुई क्षति का आकलन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद ही फसल और भूमि को हुए नुकसान की स्थिति स्पष्ट होगी।
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सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के निचलौल रेंज के वन क्षेत्राधिकारी सुनील कुमार राव ने बताया कि नदी का पानी कम होने के बाद नाव के माध्यम से नदी किनारे के वन क्षेत्र का निरीक्षण कराया जाएगा। सर्वे के बाद ही वन क्षेत्र को हुई क्षति का वास्तविक आकलन हो सकेगा।

बाढ़ में गांवों के पास बिगड़े थे हालात

नारायणी नदी के किनारे बसे सोहगीबरवा, शिकारपुर और भोथहा समेत टेलफाल, भेड़िहारी और आसपास के गांवों में बाढ़ के दौरान नदी का पानी बढ़ने से स्थिति गंभीर हो गई थी। अब जलस्तर घटने के बाद प्रशासन और संबंधित विभाग नुकसान का आकलन करने में जुट गए हैं।
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