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Maharajganj News: जान जोखिम में डाल बांस बल्ली पुल के सहारे नदी पार कर जाते ग्रामीण
Sun, 10 Dec 2023 01:15 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sun, 10 Dec 2023 01:15 AM IST
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नौतनवा। तहसील क्षेत्र के सेमरहवा गांव में आने-जाने के लिए बेहतर रास्ता नहीं है। गांव में जाने के लिए इस समय नाव और बांस-बल्ली का पुल ही एकमात्र सहारा है, जिससे नदी पार कर गांव में लोग पहुंचते हैं। गांव के लोगों को कोई इमरजेंसी सेवा का लाभ नहीं मिल पाता है। बच्चों को जान जोखिम में डालकर नाव से नदी पार कर विद्यालय जाना मजबूरी है।
भौगोलिक दृष्टि से सेमरहवा गांव काफी विषम है यह रोहिन और बघेला नदी के बीच में बसा है। यह गांव तीन तरफ से नदी और एक तरफ से जंगल से घिरा है। गांव की आबादी लगभग सात हजार है। यहां 2000 मतदाता हैं। सेमरहवा खास, बरतानी, चराई और भठवा चार टोले हैं। यहां एक प्राथमिक विद्यालय तथा एक पूर्व माध्यमिक विद्यालय है। बरसात के मौसम में गांव में जाने के लिए एक मात्र सहारा नाव ही है। बरसात खत्म होने पर बांस बल्ली के सहारे लोग नदी पार करते हैं। लोगों को गांव से लगभग तीन किलोमीटर दूर पैदल चलकर कुंअहवा घाट तक आना पड़ता है। वहां से नाव से नदी पार कर धोतिअहवा गांव के चखनी चौराहे पर आते हैं तब जाकर पिच मार्ग मिलता है ।
शुक्रवार को को बांस-बल्ली से बने पुल से नदी पार कर जा रहे सूरज जयसवाल, अजय राजभर, दीनानाथ यादव, बादल जयसवाल, हीरा,उषा देवी, गायत्री छात्र प्रेम लाल, दीपू, संदीप, नीतू,मनीषा, पूनम, सीमा आदि ने बताया कि इस समय बांस बल्ली का पुल बनाया गया है जिस पर चढ़ने पर हिलता है। जिससे हमेशा नदी में गिरने का भय बना रहता है।
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नाविक धर्मराज ने बताया कि बरसात के मौसम में बाढ़ आने के बाद गांव के लोग अपनी बाइक नदी पार कुंअहवा घाट पर ही छोड़ देते हैं। इस समय 12 हजार रुपये खर्च करके बांस-बल्ली का पुल बनाया हूं, लेकिन उसका खर्च नहीं निकल पाया कोई देता है कोई नहीं देता है।
ग्राम प्रधान उपेंद्र यादव ने बताया कि जब नदी में बाढ़ जा जाती है, तो गांव में जाने के लिए नाव से ही नदी पार किया जाता है। गांव के बच्चे हाईस्कूल, इंटर व उच्च शिक्षा के अड्डा बाजार, नौतनवां व अन्य कस्बों, नगरों में पढ़ने के लिए जाते हैं। नाव से नदी पार करते समय हमेशा भय बना रहता है। उच्च अधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका।
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भौगोलिक दृष्टि से सेमरहवा गांव काफी विषम है यह रोहिन और बघेला नदी के बीच में बसा है। यह गांव तीन तरफ से नदी और एक तरफ से जंगल से घिरा है। गांव की आबादी लगभग सात हजार है। यहां 2000 मतदाता हैं। सेमरहवा खास, बरतानी, चराई और भठवा चार टोले हैं। यहां एक प्राथमिक विद्यालय तथा एक पूर्व माध्यमिक विद्यालय है। बरसात के मौसम में गांव में जाने के लिए एक मात्र सहारा नाव ही है। बरसात खत्म होने पर बांस बल्ली के सहारे लोग नदी पार करते हैं। लोगों को गांव से लगभग तीन किलोमीटर दूर पैदल चलकर कुंअहवा घाट तक आना पड़ता है। वहां से नाव से नदी पार कर धोतिअहवा गांव के चखनी चौराहे पर आते हैं तब जाकर पिच मार्ग मिलता है ।
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शुक्रवार को को बांस-बल्ली से बने पुल से नदी पार कर जा रहे सूरज जयसवाल, अजय राजभर, दीनानाथ यादव, बादल जयसवाल, हीरा,उषा देवी, गायत्री छात्र प्रेम लाल, दीपू, संदीप, नीतू,मनीषा, पूनम, सीमा आदि ने बताया कि इस समय बांस बल्ली का पुल बनाया गया है जिस पर चढ़ने पर हिलता है। जिससे हमेशा नदी में गिरने का भय बना रहता है।
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नाविक धर्मराज ने बताया कि बरसात के मौसम में बाढ़ आने के बाद गांव के लोग अपनी बाइक नदी पार कुंअहवा घाट पर ही छोड़ देते हैं। इस समय 12 हजार रुपये खर्च करके बांस-बल्ली का पुल बनाया हूं, लेकिन उसका खर्च नहीं निकल पाया कोई देता है कोई नहीं देता है।
ग्राम प्रधान उपेंद्र यादव ने बताया कि जब नदी में बाढ़ जा जाती है, तो गांव में जाने के लिए नाव से ही नदी पार किया जाता है। गांव के बच्चे हाईस्कूल, इंटर व उच्च शिक्षा के अड्डा बाजार, नौतनवां व अन्य कस्बों, नगरों में पढ़ने के लिए जाते हैं। नाव से नदी पार करते समय हमेशा भय बना रहता है। उच्च अधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका।