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Maharajganj News: दो कोल्ड स्टोरेज देंगे आलू की खेती को धार, 2200 से बढ़ाकर 5000 हेक्टेयर होगा रकबा

Fri, 18 Sep 2026 01:12 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Fri, 18 Sep 2026 01:12 AM IST
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Two cold storage facilities to boost potato farming; cultivation area to expand from 2,200 to 5,000 hectares.
सिसवां कोल्ड स्टोरेज को लागत का 35 फीसदी अनुदान, निचलौल के नौनियां में निर्माणाधीन है स्टोरेज
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महराजगंज। जिले में आलू की खेती को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग ने कमर कस ली है। पिछले वर्ष 2200 हेक्टेयर में हुई आलू की खेती का रकबा इस बार बढ़ाकर पांच हजार हेक्टेयर से अधिक करने की तैयारी है। किसानों को फसल के सुरक्षित भंडारण की सुविधा देने के लिए सिसवां और निचलौल में करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से दो कोल्ड स्टोरेज स्थापित किए जा रहे हैं। सिसवां के कोल्ड स्टोरेज को लागत का 35 प्रतिशत अनुदान मिलने के साथ सोलर पैनल के लिए 12.50 लाख रुपये की सहायता भी दी गई है। निचलौल के नौनियां में निर्माणाधीन कोल्ड स्टोरेज के अनुदान की प्रक्रिया चल रही है।
प्रदेश सरकार ने आलू का उत्पादन और रकबा बढ़ाने के लिए इस वित्तीय वर्ष में उद्यान विभाग के माध्यम से भामाशाह भाव स्थिरता कोष और भंडारण प्रभार अनुदान जैसी योजनाएं लागू की हैं। जिले में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना के जरिये भी कोल्ड स्टोरेज समेत अन्य सुविधाओं के लिए सहायता दी जा रही है।
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सिसवां में 3400 एमटी, निचलौल में 16629 एमटी क्षमता

सिसवां बाजार के सबयां ढाला पर 3400.18 मीट्रिक टन क्षमता का कोल्ड स्टोरेज स्थापित किया गया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में उद्यान विभाग ने इसके लिए लागत मूल्य का 35 प्रतिशत अनुदान दिया था। इस वित्तीय वर्ष में बिजली की खपत कम करने के उद्देश्य से सोलर पैनल लगाने के लिए 12.50 लाख रुपये की सब्सिडी दी गई है।
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इसी तरह निचलौल ब्लॉक के नौनियां में 16629.14 मीट्रिक टन क्षमता का कोल्ड स्टोरेज निर्माणाधीन है। इसके लिए विभागीय स्तर पर अनुदान की प्रक्रिया जारी है। दोनों परियोजनाएं ऐसे क्षेत्रों में हैं, जहां आलू उत्पादन की पर्याप्त संभावनाएं हैं और पहले भंडारण की सुविधा उपलब्ध नहीं थी।


भंडारण की सुविधा से किसानों को मिलेगा बेहतर विकल्प

जिले के 12 ब्लॉकों में सिसवां और निचलौल की ऊंची व दोमट भूमि आलू उत्पादन के लिए अनुकूल मानी जाती है। अब तक भंडारण की सुविधा नहीं होने से किसान फसल तैयार होने के बाद उसे तत्काल बेचने को मजबूर होते थे। कई बार उन्हें अपेक्षित कीमत भी नहीं मिल पाती थी। कोल्ड स्टोरेज शुरू होने से किसान आलू को सुरक्षित रखकर बाजार की स्थिति के अनुसार बिक्री कर सकेंगे।

प्रगतिशील किसान राधेश्याम चौधरी और भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष राम अशीष ने बताया कि करीब दस वर्ष पहले जिले में आलू का रकबा आठ हजार हेक्टेयर के आसपास था। छुट्टा और जंगली जानवरों से फसल को नुकसान, घटता मुनाफा और भंडारण की समस्या के कारण किसानों ने इसकी खेती कम कर दी। अब मूल्य स्थिरता और भंडारण से जुड़ी योजनाओं के साथ नई सुविधाएं मिलने से किसानों में फिर उम्मीद जगी है।
कृषि विज्ञान केंद्र बंसुली के कृषि विज्ञानी डॉ. रामगोपाल यादव ने बताया कि महराजगंज की मिट्टी और जलवायु आलू उत्पादन के लिहाज से बेहतर है। भंडारण की सुविधा मिलने से किसानों का इस नकदी फसल की ओर रुझान बढ़ सकता है।



मिट्टी और जलवायु दोनों अनुकूल

जिला उद्यान अधिकारी संजय कुमार रस्तोगी ने बताया कि प्रदेश सरकार आलू का रकबा बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही है। अनुकूल मिट्टी और जलवायु वाले जिलों में कोल्ड स्टोरेज स्थापना के लिए लागत का 35 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। सिसवां को इसका लाभ मिला है जबकि निचलौल की परियोजना के लिए प्रक्रिया जारी है।
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