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Maharajganj News: तीन मूर्तियों से शुरू हुआ महोत्सव...30 पंडालों में विराजेंगी मां
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सिसवा बाजार। आजादी के 22 वर्ष बाद वर्ष 1969 में तीन प्रतिमाओं की स्थापना से शुरू हुआ सिसवा का ऐतिहासिक दुर्गा पूजा महोत्सव इस वर्ष अपने 57वें वर्ष में प्रवेश करेगा। समय के साथ महोत्सव का स्वरूप भव्य होता गया। आज इसकी पहचान महराजगंज जिले के साथ पड़ोसी मित्र राष्ट्र नेपाल तक पहुंच चुकी है।
कस्बे के वयोवृद्ध हरिश्चंद्र बताते हैं, जैनी छपरा, जो अब नगर पंचायत सिसवा बाजार का हिस्सा है, में दुर्गा पूजा की परंपरा लगातार आगे बढ़ रही है। वर्ष 1969 में मीराबाई वार्ड निवासी अध्यापक और श्याम स्टूडियो के संचालक रहे राधेश्याम गुप्ता व श्रीराम जानकी मंदिर रोड निवासी व्यापारी शिवपूजन जायसवाल ने प्रतिमा स्थापना की पहल की थी।
वहीं, जंगी सिंह ने श्रीराम जानकी मंदिर समिति बनाकर प्राइमरी पाठशाला के निकट पहली प्रतिमा स्थापित कराई। उन्होंने बताया कि उस समय प्रतिमाएं बनाने के लिए स्थानीय कलाकार नहीं आते थे। पहली प्रतिमा लाने के लिए दुर्गा पूजा से दो महीने पहले तीन बैल गाड़ियां भैरहवा भेजी गई थीं।
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वर्ष 1970 में नगर देवी व काली माता स्थान पर दो और प्रतिमाएं स्थापित की गईं। इसके बाद महोत्सव का विस्तार होता गया। हर साल आकर्षक पंडालों, अनूठी प्रतिमाओं व सामाजिक संदेशों से श्रद्धालुओं को कुछ नया देखने को मिलता है।
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कस्बे के वयोवृद्ध हरिश्चंद्र बताते हैं, जैनी छपरा, जो अब नगर पंचायत सिसवा बाजार का हिस्सा है, में दुर्गा पूजा की परंपरा लगातार आगे बढ़ रही है। वर्ष 1969 में मीराबाई वार्ड निवासी अध्यापक और श्याम स्टूडियो के संचालक रहे राधेश्याम गुप्ता व श्रीराम जानकी मंदिर रोड निवासी व्यापारी शिवपूजन जायसवाल ने प्रतिमा स्थापना की पहल की थी।
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वहीं, जंगी सिंह ने श्रीराम जानकी मंदिर समिति बनाकर प्राइमरी पाठशाला के निकट पहली प्रतिमा स्थापित कराई। उन्होंने बताया कि उस समय प्रतिमाएं बनाने के लिए स्थानीय कलाकार नहीं आते थे। पहली प्रतिमा लाने के लिए दुर्गा पूजा से दो महीने पहले तीन बैल गाड़ियां भैरहवा भेजी गई थीं।
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वर्ष 1970 में नगर देवी व काली माता स्थान पर दो और प्रतिमाएं स्थापित की गईं। इसके बाद महोत्सव का विस्तार होता गया। हर साल आकर्षक पंडालों, अनूठी प्रतिमाओं व सामाजिक संदेशों से श्रद्धालुओं को कुछ नया देखने को मिलता है।