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Maharajganj News: टीकाकरण से छूटे बच्चों की लंबी हो रही सूची, 212 केंद्रों पर सेवाएं ठप
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महराजगंज। जिले में संविदा एएनएम की हड़ताल से टीकाकरण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। टीकाकरण के लिए निर्धारित 332 केंद्रों में से 212 पर सत्र नहीं लग पा रहे हैं। इससे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को टीका लगवाने के लिए सीएचसी-पीएचसी तक दौड़ लगानी पड़ रही है। नियमित टीकाकरण से छूट रहे बच्चों की ड्यू लिस्ट लंबी होती जा रही है।
जिले में 297 संविदा एएनएम तैनात हैं। मांगों को लेकर इनके हड़ताल पर रहने से संबंधित टीकाकरण सत्र प्रभावित हैं। सामान्य दिनों में जिले में 300 से अधिक स्थानों पर सत्र लगाकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया जाता था। वर्तमान में 171 नियमित एएनएम के सहारे टीकाकरण कराया जा रहा है। इनसे प्रतिदिन सत्र लगवाकर छूटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को टीका लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
कम एएनएम वाले ब्लॉकों में अधिक परेशानी
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉक्टर नीरज कन्नौजिया ने बताया कि निचलौल, रतनपुर और बृजमनगंज समेत कई ब्लॉकों में नियमित एएनएम की संख्या कम होने से परेशानी अधिक है। इन क्षेत्रों में नियमित एएनएम की संख्या करीब 10 से 11 बताई जा रही है। पहले सप्ताह में बुधवार और शनिवार को टीकाकरण सत्र आयोजित होते थे लेकिन संविदा कर्मियों की हड़ताल के बाद नियमित एएनएम को प्रतिदिन सत्र लगाने की जिम्मेदारी दी गई है। इससे दूरदराज के गांवों में रहने वाले बच्चों और गर्भवती महिलाओं को समय पर टीका लगवाने में दिक्कत हो रही है।
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सीएचसी-पीएचसी पर पहुंच रहे लोग
स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों पर टीकाकरण नहीं होने से लोग सीएचसी और पीएचसी पहुंच रहे हैं। इससे इन केंद्रों पर काम का दबाव बढ़ रहा है। डिप्टी सीएमओ डॉ. केपी सिंह ने बताया कि सदर सीएचसी में सात बच्चों को टीका लगाया गया, जबकि महिला अस्पताल में करीब 15 गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण हुआ।
बोले अधिकारी
नियमित एएनएम प्रतिदिन टीकाकरण सत्र लगा रही हैं। हड़ताल के कारण टीकाकरण कार्य प्रभावित हुआ है। इसके साथ ही पोर्टल पर डाटा फीड नहीं हो पाने से भी समस्या आ रही है। विभाग उपलब्ध कर्मचारियों के माध्यम से टीकाकरण का लक्ष्य पूरा करने का प्रयास कर रहा है।
- डॉ. नीरज कन्नौजिया, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी
पर्ची लेकर भटकते रहे मरीज, नियमित कर्मचारियों के समझाने पर लौटे डॉक्टर
निचलौल।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) निचलौल में शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर दिखाई दिया। डॉक्टरों के चेंबर छोड़कर महिला विंग परिसर में धरने पर बैठने से इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को परेशानी उठानी पड़ी।
कोई हाथ में पर्ची लेकर डॉक्टर की तलाश में भटकता रहा तो कोई इलाज के इंतजार में बैठा रहा। अस्पताल परिसर में मरीजों और तीमारदारों की भीड़ लगी रही। बाद में सीएचसी अधीक्षक डॉ. उमेश चंद के हस्तक्षेप और नियमित कर्मचारियों के समझाने पर डॉक्टर ओपीडी में लौटे और मरीजों का इलाज शुरू किया।
धरना-प्रदर्शन में डॉ. अंजली सिंह, डॉ. सौरभ साहनी, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. संदीप कुमार कसौधन, डॉ. इरशाद अहमद, डॉ. रंजना तिवारी, हरिहर राय, दिलीप पटेल, सुशील श्रीवास्तव, गीता गुप्ता, गीता देवी, आराधना मौर्य, साधना, वंदना यादव, गीता बघेल, शैलेश कुमार, आनंद कौशल यादव और अखंड प्रताप समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी शामिल रहे।
मांगों को लेकर आंदोलन, स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
एनएचएम कर्मचारी लंबे समय से नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन और सेवा सुरक्षा समेत विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में कार्यकाल, अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर वेतन विसंगतियां दूर करना, ईपीएफ, ईएसआई और ग्रेच्युटी जैसी सुविधाएं देना, कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना तथा गैर जनपद स्थानांतरण से राहत देना शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से सेवा देने के बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। शुक्रवार को कार्य बहिष्कार और धरना-प्रदर्शन के चलते ओपीडी में मरीजों को समय से उपचार मिलने में दिक्कत हुई। अस्पताल में नियमित रूप से संचालित होने वाली अन्य स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर प्रभावित सेवाओं की अलग-अलग संख्या स्पष्ट नहीं हो सकी।
दोपहर तक मरीजों की लगी रही भीड़
सीएचसी निचलौल में प्रतिदिन करीब 600 से 800 मरीज ओपीडी में पर्चा बनवाकर इलाज के लिए पहुंचते हैं। शुक्रवार को भी बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंचे लेकिन डॉक्टरों के धरने पर बैठने से उन्हें परेशानी हुई। चेंबर खाली होने के कारण मरीज और तीमारदार इधर-उधर भटकते रहे। स्थिति की जानकारी होने पर सीएचसी अधीक्षक डॉ. उमेश चंद मौके पर पहुंचे और नियमित कर्मचारियों से बातचीत की। उन्होंने महिला अस्पताल में कुछ ओपीडी भी देखा, इसके बाद डॉक्टर ओपीडी में लौटे और दोपहर तक मरीजों की भीड़ को संभालते हुए उपचार किया। वहीं सीएचसी अधीक्षक डॉ. उमेश चंद ने बताया कि कार्य बहिष्कार के कारण स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में दिक्कत आई। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकांश अन्य कार्य प्रभावित रहे।
13 सूत्री मांगों के समर्थन में नर्सिंग कर्मचारियों ने बांधा काला फीता
महराजगंज। नर्सिंग संवर्ग की लंबित मांगों को लेकर राजकीय नर्सेस संघ के कर्मचारियों ने शुक्रवार को काला फीता बांधकर जिला अस्पताल परिसर में विरोध जताया। प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर आयोजित इस विरोध कार्यक्रम में नर्सिंग कर्मचारियों ने अपने नियमित कार्यों का निर्वहन करते हुए 13 सूत्री मांगों के शीघ्र निस्तारण की मांग उठाई। संघ की अध्यक्ष सरोज सिंह ने कहा अपनी मांगों को लेकर 21 अक्तूबर को सुबह आठ से दस बजे तक दो घंटे का कार्य बहिष्कार किया जाएगा। वहीं, 22 अक्तूबर को पूर्वाह्न 11 बजे से धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसको लेकर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला संयुक्त चिकित्सालय को पत्र भी भेज दिया गया है। मंत्री लालजी त्रिपाठी ने कहा कि लंबित समस्याओं के समाधान से नर्सिंग कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और स्वास्थ्य सेवाएं भी मजबूत होंगी।
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जिले में 297 संविदा एएनएम तैनात हैं। मांगों को लेकर इनके हड़ताल पर रहने से संबंधित टीकाकरण सत्र प्रभावित हैं। सामान्य दिनों में जिले में 300 से अधिक स्थानों पर सत्र लगाकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया जाता था। वर्तमान में 171 नियमित एएनएम के सहारे टीकाकरण कराया जा रहा है। इनसे प्रतिदिन सत्र लगवाकर छूटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को टीका लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
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कम एएनएम वाले ब्लॉकों में अधिक परेशानी
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉक्टर नीरज कन्नौजिया ने बताया कि निचलौल, रतनपुर और बृजमनगंज समेत कई ब्लॉकों में नियमित एएनएम की संख्या कम होने से परेशानी अधिक है। इन क्षेत्रों में नियमित एएनएम की संख्या करीब 10 से 11 बताई जा रही है। पहले सप्ताह में बुधवार और शनिवार को टीकाकरण सत्र आयोजित होते थे लेकिन संविदा कर्मियों की हड़ताल के बाद नियमित एएनएम को प्रतिदिन सत्र लगाने की जिम्मेदारी दी गई है। इससे दूरदराज के गांवों में रहने वाले बच्चों और गर्भवती महिलाओं को समय पर टीका लगवाने में दिक्कत हो रही है।
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सीएचसी-पीएचसी पर पहुंच रहे लोग
स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों पर टीकाकरण नहीं होने से लोग सीएचसी और पीएचसी पहुंच रहे हैं। इससे इन केंद्रों पर काम का दबाव बढ़ रहा है। डिप्टी सीएमओ डॉ. केपी सिंह ने बताया कि सदर सीएचसी में सात बच्चों को टीका लगाया गया, जबकि महिला अस्पताल में करीब 15 गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण हुआ।
बोले अधिकारी
नियमित एएनएम प्रतिदिन टीकाकरण सत्र लगा रही हैं। हड़ताल के कारण टीकाकरण कार्य प्रभावित हुआ है। इसके साथ ही पोर्टल पर डाटा फीड नहीं हो पाने से भी समस्या आ रही है। विभाग उपलब्ध कर्मचारियों के माध्यम से टीकाकरण का लक्ष्य पूरा करने का प्रयास कर रहा है।
- डॉ. नीरज कन्नौजिया, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी
पर्ची लेकर भटकते रहे मरीज, नियमित कर्मचारियों के समझाने पर लौटे डॉक्टर
निचलौल।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) निचलौल में शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर दिखाई दिया। डॉक्टरों के चेंबर छोड़कर महिला विंग परिसर में धरने पर बैठने से इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को परेशानी उठानी पड़ी।
कोई हाथ में पर्ची लेकर डॉक्टर की तलाश में भटकता रहा तो कोई इलाज के इंतजार में बैठा रहा। अस्पताल परिसर में मरीजों और तीमारदारों की भीड़ लगी रही। बाद में सीएचसी अधीक्षक डॉ. उमेश चंद के हस्तक्षेप और नियमित कर्मचारियों के समझाने पर डॉक्टर ओपीडी में लौटे और मरीजों का इलाज शुरू किया।
धरना-प्रदर्शन में डॉ. अंजली सिंह, डॉ. सौरभ साहनी, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. संदीप कुमार कसौधन, डॉ. इरशाद अहमद, डॉ. रंजना तिवारी, हरिहर राय, दिलीप पटेल, सुशील श्रीवास्तव, गीता गुप्ता, गीता देवी, आराधना मौर्य, साधना, वंदना यादव, गीता बघेल, शैलेश कुमार, आनंद कौशल यादव और अखंड प्रताप समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी शामिल रहे।
मांगों को लेकर आंदोलन, स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
एनएचएम कर्मचारी लंबे समय से नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन और सेवा सुरक्षा समेत विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में कार्यकाल, अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर वेतन विसंगतियां दूर करना, ईपीएफ, ईएसआई और ग्रेच्युटी जैसी सुविधाएं देना, कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना तथा गैर जनपद स्थानांतरण से राहत देना शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से सेवा देने के बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। शुक्रवार को कार्य बहिष्कार और धरना-प्रदर्शन के चलते ओपीडी में मरीजों को समय से उपचार मिलने में दिक्कत हुई। अस्पताल में नियमित रूप से संचालित होने वाली अन्य स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर प्रभावित सेवाओं की अलग-अलग संख्या स्पष्ट नहीं हो सकी।
दोपहर तक मरीजों की लगी रही भीड़
सीएचसी निचलौल में प्रतिदिन करीब 600 से 800 मरीज ओपीडी में पर्चा बनवाकर इलाज के लिए पहुंचते हैं। शुक्रवार को भी बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंचे लेकिन डॉक्टरों के धरने पर बैठने से उन्हें परेशानी हुई। चेंबर खाली होने के कारण मरीज और तीमारदार इधर-उधर भटकते रहे। स्थिति की जानकारी होने पर सीएचसी अधीक्षक डॉ. उमेश चंद मौके पर पहुंचे और नियमित कर्मचारियों से बातचीत की। उन्होंने महिला अस्पताल में कुछ ओपीडी भी देखा, इसके बाद डॉक्टर ओपीडी में लौटे और दोपहर तक मरीजों की भीड़ को संभालते हुए उपचार किया। वहीं सीएचसी अधीक्षक डॉ. उमेश चंद ने बताया कि कार्य बहिष्कार के कारण स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में दिक्कत आई। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकांश अन्य कार्य प्रभावित रहे।
13 सूत्री मांगों के समर्थन में नर्सिंग कर्मचारियों ने बांधा काला फीता
महराजगंज। नर्सिंग संवर्ग की लंबित मांगों को लेकर राजकीय नर्सेस संघ के कर्मचारियों ने शुक्रवार को काला फीता बांधकर जिला अस्पताल परिसर में विरोध जताया। प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर आयोजित इस विरोध कार्यक्रम में नर्सिंग कर्मचारियों ने अपने नियमित कार्यों का निर्वहन करते हुए 13 सूत्री मांगों के शीघ्र निस्तारण की मांग उठाई। संघ की अध्यक्ष सरोज सिंह ने कहा अपनी मांगों को लेकर 21 अक्तूबर को सुबह आठ से दस बजे तक दो घंटे का कार्य बहिष्कार किया जाएगा। वहीं, 22 अक्तूबर को पूर्वाह्न 11 बजे से धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसको लेकर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला संयुक्त चिकित्सालय को पत्र भी भेज दिया गया है। मंत्री लालजी त्रिपाठी ने कहा कि लंबित समस्याओं के समाधान से नर्सिंग कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और स्वास्थ्य सेवाएं भी मजबूत होंगी।