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Maharajganj News: डेढ़ करोड़ की जंगल सफारी साढ़े तीन साल से वीरान, टूटा पुल बना रोड़ा
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सोहगीबरवा वन्य प्रभाग के जंगल सफारी में कलरव करते पक्षी।
सोहगीबरवा क्षेत्र में सिगरैना ताल का पुल ध्वस्त, छह महीने चली थी सफारी
पर्यटकों की आवाजाही बंद होने से 150 लोग बेरोजगार
महराजगंज। पर्यावरण संरक्षण और रोजगार की उम्मीद जगाने वाली सोहगीबरवा की जंगल सफारी साढ़े तीन साल से बंद पड़ी है। 9 अप्रैल 2022 को शुरू हुई डेढ़ करोड़ की यह सफारी महज छह महीने चल पाई। अक्तूबर 2022 में सिगरैना ताल का पुल टूटा और तब से 40 किमी का सफारी रूट वीरान है। इससे करीब 150 स्थानीय लोगों का रोजगार छिन गया है।
42,000 हेक्टेयर में फैले सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग में तेंदुआ, हिरण, चीतल, भालू, अजगर और मगरमच्छ हैं। मधवलिया रेंज से शुरू होकर उत्तरी चौक, दक्षिणी चौक होते हुए देईभार तक पर्यटकों को घुमाया जाता था। सिगरैना ताल का पुल भीतरी भाग को जोड़ता था। पुल टूटने से अब वहां सिर्फ पैदल या बाइक से जाया जा सकता है। जिप्सी और कार न जा पाने से पर्यटक मायूस लौट रहे हैं।
शुरुआत के छह महीने सोहगीबरवा में रौनक रही। देश-विदेश से पर्यटक आए। स्थानीय लोग गाइड बने। होम-स्टे चले। पुल टूटते ही सब ठप हो गया।
सात रेंज, एक सफारी
सोहगीबरवा में सात रेंज हैं। पकड़ी, दक्षिणी चौक, उत्तरी चौक, मधवलिया और लक्ष्मीपुर की सीमा आपस में जुड़ी है। इन्हीं पांच रेंज को जोड़कर सफारी शुरू की गई थी। मधवलिया केंद्र बिंदु था। नेचर वॉक, बर्ड वॉचिंग और ट्रेकिंग भी जोड़ी गई थी। सफारी रूट को रामग्राम और देवदह जैसे बौद्ध स्थलों से भी जोड़ा गया था।
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स्काई वॉक भी अधर में
सिगरैना ताल पर स्काई वॉक बनाने की योजना भी पुल टूटने से लटक गई है। ऑनलाइन बुकिंग बंद है। अप्रैल से जुलाई तक का सीजन खाली निकल रहा है। लकड़ी का पुल बार-बार टूटता है, इसलिए स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा।
वर्जन
सफारी बंद होने से अब दूसरा काम करना पड़ रहा है। पर्यटक फोन तो करते हैं, मगर रास्ता खराब होने से मना करना पड़ता है।
राकेश कुमार, गाइड
सफारी शुरू हुई तो लगा बाहर कमाने नहीं जाना पड़ेगा। अब आमदनी बंद है।
मनीकांत द्विवेदी, गाइड
जंगल सफारी शुरू करने का प्रयास हो रहा है। जल्द पुल की मरम्मत कराई जाएगी ताकि पर्यटक सोहगीबरवा का लुत्फ उठा सकें।
निरंजन सुर्वे, डीएफओ
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पर्यटकों की आवाजाही बंद होने से 150 लोग बेरोजगार
महराजगंज। पर्यावरण संरक्षण और रोजगार की उम्मीद जगाने वाली सोहगीबरवा की जंगल सफारी साढ़े तीन साल से बंद पड़ी है। 9 अप्रैल 2022 को शुरू हुई डेढ़ करोड़ की यह सफारी महज छह महीने चल पाई। अक्तूबर 2022 में सिगरैना ताल का पुल टूटा और तब से 40 किमी का सफारी रूट वीरान है। इससे करीब 150 स्थानीय लोगों का रोजगार छिन गया है।
42,000 हेक्टेयर में फैले सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग में तेंदुआ, हिरण, चीतल, भालू, अजगर और मगरमच्छ हैं। मधवलिया रेंज से शुरू होकर उत्तरी चौक, दक्षिणी चौक होते हुए देईभार तक पर्यटकों को घुमाया जाता था। सिगरैना ताल का पुल भीतरी भाग को जोड़ता था। पुल टूटने से अब वहां सिर्फ पैदल या बाइक से जाया जा सकता है। जिप्सी और कार न जा पाने से पर्यटक मायूस लौट रहे हैं।
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शुरुआत के छह महीने सोहगीबरवा में रौनक रही। देश-विदेश से पर्यटक आए। स्थानीय लोग गाइड बने। होम-स्टे चले। पुल टूटते ही सब ठप हो गया।
सात रेंज, एक सफारी
सोहगीबरवा में सात रेंज हैं। पकड़ी, दक्षिणी चौक, उत्तरी चौक, मधवलिया और लक्ष्मीपुर की सीमा आपस में जुड़ी है। इन्हीं पांच रेंज को जोड़कर सफारी शुरू की गई थी। मधवलिया केंद्र बिंदु था। नेचर वॉक, बर्ड वॉचिंग और ट्रेकिंग भी जोड़ी गई थी। सफारी रूट को रामग्राम और देवदह जैसे बौद्ध स्थलों से भी जोड़ा गया था।
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स्काई वॉक भी अधर में
सिगरैना ताल पर स्काई वॉक बनाने की योजना भी पुल टूटने से लटक गई है। ऑनलाइन बुकिंग बंद है। अप्रैल से जुलाई तक का सीजन खाली निकल रहा है। लकड़ी का पुल बार-बार टूटता है, इसलिए स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा।
वर्जन
सफारी बंद होने से अब दूसरा काम करना पड़ रहा है। पर्यटक फोन तो करते हैं, मगर रास्ता खराब होने से मना करना पड़ता है।
राकेश कुमार, गाइड
सफारी शुरू हुई तो लगा बाहर कमाने नहीं जाना पड़ेगा। अब आमदनी बंद है।
मनीकांत द्विवेदी, गाइड
जंगल सफारी शुरू करने का प्रयास हो रहा है। जल्द पुल की मरम्मत कराई जाएगी ताकि पर्यटक सोहगीबरवा का लुत्फ उठा सकें।
निरंजन सुर्वे, डीएफओ