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Maharajganj News: गांव में मकान बनवाने के लिए भी ले सकेंगे लोन
Thu, 07 Aug 2025 12:40 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 07 Aug 2025 12:40 AM IST
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सदर तहसील में लगी भीड़।
महराजगंज। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर है। अब गांव के लोगों को भी शहरी क्षेत्रों की तरह बैंकों से मकान बनाने या मरम्मत के लिए आसानी से लोन मिल सकेगा।
शासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय भूमि के स्वामित्व को वैधानिक रूप देने के लिए घरौनी लागू किया है। ग्रामीणों को उनकी पुश्तैनी या आवासीय भूमि का डिजिटल स्वामित्व प्रमाण पत्र (घरौनी) दिया जा रहा है। 1,29,629 घरौनी जिले में वितरित की जा चुकी है।
जानकारी के अनुसार, पुश्तैनी या आवासीय भूमि का डिजिटल स्वामित्व प्रमाणपत्र (घरौनी) प्रदान किया जा रहा है। इस प्रमाणपत्र के आधार पर बैंक ग्रामीणों को मकान निर्माण के लिए ऋण उपलब्ध कराएंगे। इस पहल से न केवल ग्रामीणों को वित्तीय सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि भूमि स्वामित्व से जुड़े विवादों और अतिक्रमण की समस्याओं पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा।
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ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक अधिकांश लोगों के पास उनकी पुश्तैनी या आवासीय भूमि का कोई वैध दस्तावेज नहीं होता था। इस वजह से बैंकों से ग्रामीणों को मकान निर्माण या मरम्मत के लिए ऋण देने में आनाकानी की जाती थी। ग्रामीणों के पास अपनी जमीन का कोई औपचारिक स्वामित्व प्रमाण न होने के कारण वे बैंकों की ऋण प्रक्रिया में शामिल होने में असमर्थ रहते थे, लेकिन अब प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के तहत लागू घरौनी ने इस बाधा को दूर कर दिया है।
इस कानून के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय भूमि की पहचान और रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाया गया है। इसके लिए राजस्व, वित्त और न्याय विभागों ने संयुक्त रूप से एक मसौदा तैयार किया, जिसे शासन ने स्वीकृति प्रदान कर दी।
इस मसौदे का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनकी आवासीय भूमि पर वैधानिक स्वामित्व प्रदान करना है।
इसके तहत लेखपाल, कानूनगो और तहसीलदार के स्तर पर भूमि का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद उप जिलाधिकारी की ओर से संबंधित व्यक्ति के नाम घरौनी प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। यह प्रमाणपत्र ग्रामीण क्षेत्रों की आवासीय भूमि के लिए एक वैध दस्तावेज के रूप में मान्य होगा, जिसे बैंक ऋण प्रक्रिया में स्वीकार करेंगे।
प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के तहत भूमि स्वामित्व की प्रक्रिया को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। ड्रोन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय भूमि का सटीक सर्वे किया जा रहा है, जिसके आधार पर डिजिटल नक्शा तैयार किया जाता है। प्रत्येक भूखंड के लिए एक यूनिक रिकॉर्ड बनाया जाता है, जिससे स्वामित्व संबंधी विवादों में कमी आएगी।
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शासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय भूमि के स्वामित्व को वैधानिक रूप देने के लिए घरौनी लागू किया है। ग्रामीणों को उनकी पुश्तैनी या आवासीय भूमि का डिजिटल स्वामित्व प्रमाण पत्र (घरौनी) दिया जा रहा है। 1,29,629 घरौनी जिले में वितरित की जा चुकी है।
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जानकारी के अनुसार, पुश्तैनी या आवासीय भूमि का डिजिटल स्वामित्व प्रमाणपत्र (घरौनी) प्रदान किया जा रहा है। इस प्रमाणपत्र के आधार पर बैंक ग्रामीणों को मकान निर्माण के लिए ऋण उपलब्ध कराएंगे। इस पहल से न केवल ग्रामीणों को वित्तीय सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि भूमि स्वामित्व से जुड़े विवादों और अतिक्रमण की समस्याओं पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा।
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ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक अधिकांश लोगों के पास उनकी पुश्तैनी या आवासीय भूमि का कोई वैध दस्तावेज नहीं होता था। इस वजह से बैंकों से ग्रामीणों को मकान निर्माण या मरम्मत के लिए ऋण देने में आनाकानी की जाती थी। ग्रामीणों के पास अपनी जमीन का कोई औपचारिक स्वामित्व प्रमाण न होने के कारण वे बैंकों की ऋण प्रक्रिया में शामिल होने में असमर्थ रहते थे, लेकिन अब प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के तहत लागू घरौनी ने इस बाधा को दूर कर दिया है।
इस कानून के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय भूमि की पहचान और रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाया गया है। इसके लिए राजस्व, वित्त और न्याय विभागों ने संयुक्त रूप से एक मसौदा तैयार किया, जिसे शासन ने स्वीकृति प्रदान कर दी।
इस मसौदे का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनकी आवासीय भूमि पर वैधानिक स्वामित्व प्रदान करना है।
इसके तहत लेखपाल, कानूनगो और तहसीलदार के स्तर पर भूमि का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद उप जिलाधिकारी की ओर से संबंधित व्यक्ति के नाम घरौनी प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। यह प्रमाणपत्र ग्रामीण क्षेत्रों की आवासीय भूमि के लिए एक वैध दस्तावेज के रूप में मान्य होगा, जिसे बैंक ऋण प्रक्रिया में स्वीकार करेंगे।
प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के तहत भूमि स्वामित्व की प्रक्रिया को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। ड्रोन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय भूमि का सटीक सर्वे किया जा रहा है, जिसके आधार पर डिजिटल नक्शा तैयार किया जाता है। प्रत्येक भूखंड के लिए एक यूनिक रिकॉर्ड बनाया जाता है, जिससे स्वामित्व संबंधी विवादों में कमी आएगी।