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Maharajganj News: सर्दियों में पोषण बढ़ा रहा स्वाद से भरपूर शकरकंद
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जिला मुख्यालय पर 2 क्विंटल तक पहुंची बिक्री
सफेद 50 तो लाल शकरकंद बिक रहा 60 रुपये प्रति किलो
महराजगंज। सर्दियों में पोषण व एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर शकरकंद की बिक्री तेज हुई है। शकरकंद अब सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों तक ही नहीं बल्कि स्वाद व गुणों के कारण शहरी क्षेत्रों में भी अपनी धाक मजबूत कर रहा है। जिला मुख्यालय पर इन दिनों प्रतिदिन डेढ़ से 2 क्विंटल बिक्री हो रही है। सफेद शकरकंद 50 और लाल 60 रुपये किलो की दर के बिक रहा है।
शकरकंद कारोबारी अनिल व विजय ने बताया कि जनपद के किसान नकदी फसल के रूप में शकरकंद की खेती से जुड़े हैं। शकरकंद की बाहर से खरीद नहीं करनी पड़ती। शकरकंद को ग्रामीण मीठा आलू भी कहते हैं। यह सिर्फ दो माह का कारोबार है। दिसम्बर से जनवरी तक शकरकंद की बिक्री सर्वाधिक होती है। जनपद के लोग इसे भूनकर खाना अधिक पसंद करते हैं। मौजूदा समय में इसकी बिक्री दो क्विंटल के लगभग हो रही है यह धीरे-धीरे बढ़ कर चार से पांच क्विंटल तक पहुंचता है। सफेद शकरकंद हल्का मीठा व लाल अधिक मीठा होता है। पसंद के अनुसार शहरी लोग भी इसे खरीद रहे हैं।
प्रधानमंत्री कर चुके प्रोत्साहित
जिला उद्यान अधिकारी संजय रस्तोगी के मुताबिक, जनपद में शकरकंद की खेती से जुड़े किसान को देश के प्रधानमंत्री ने 2020 में वनटांगिया गांव के किसान राम गुलाम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बात करते हुए शकरकंद उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया था। शकरकंद का मौजूदा रकबा 100 से 150 एकड़ है। प्रति एकड़ 60 से 70 क्विंटल उत्पादन होता है जिसे किसान नकदी फसल मानते हैं।
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वर्जन
शकरकंद में पोषक तत्व फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन ए (बीटा-कैरोटीन) सी और पोटैशियम की मात्रा भरपूर पाई जाती है। यह पाचन सुधारने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। इसकी तासीर गर्म होती है।
-हरेंद्र कुमार जैसवार, जिला आयुर्वेदिक व यूनानी अधिकारी।
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सफेद 50 तो लाल शकरकंद बिक रहा 60 रुपये प्रति किलो
महराजगंज। सर्दियों में पोषण व एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर शकरकंद की बिक्री तेज हुई है। शकरकंद अब सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों तक ही नहीं बल्कि स्वाद व गुणों के कारण शहरी क्षेत्रों में भी अपनी धाक मजबूत कर रहा है। जिला मुख्यालय पर इन दिनों प्रतिदिन डेढ़ से 2 क्विंटल बिक्री हो रही है। सफेद शकरकंद 50 और लाल 60 रुपये किलो की दर के बिक रहा है।
शकरकंद कारोबारी अनिल व विजय ने बताया कि जनपद के किसान नकदी फसल के रूप में शकरकंद की खेती से जुड़े हैं। शकरकंद की बाहर से खरीद नहीं करनी पड़ती। शकरकंद को ग्रामीण मीठा आलू भी कहते हैं। यह सिर्फ दो माह का कारोबार है। दिसम्बर से जनवरी तक शकरकंद की बिक्री सर्वाधिक होती है। जनपद के लोग इसे भूनकर खाना अधिक पसंद करते हैं। मौजूदा समय में इसकी बिक्री दो क्विंटल के लगभग हो रही है यह धीरे-धीरे बढ़ कर चार से पांच क्विंटल तक पहुंचता है। सफेद शकरकंद हल्का मीठा व लाल अधिक मीठा होता है। पसंद के अनुसार शहरी लोग भी इसे खरीद रहे हैं।
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प्रधानमंत्री कर चुके प्रोत्साहित
जिला उद्यान अधिकारी संजय रस्तोगी के मुताबिक, जनपद में शकरकंद की खेती से जुड़े किसान को देश के प्रधानमंत्री ने 2020 में वनटांगिया गांव के किसान राम गुलाम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बात करते हुए शकरकंद उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया था। शकरकंद का मौजूदा रकबा 100 से 150 एकड़ है। प्रति एकड़ 60 से 70 क्विंटल उत्पादन होता है जिसे किसान नकदी फसल मानते हैं।
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वर्जन
शकरकंद में पोषक तत्व फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन ए (बीटा-कैरोटीन) सी और पोटैशियम की मात्रा भरपूर पाई जाती है। यह पाचन सुधारने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। इसकी तासीर गर्म होती है।
-हरेंद्र कुमार जैसवार, जिला आयुर्वेदिक व यूनानी अधिकारी।