{"_id":"579656d04f1c1b8f0221e532","slug":"sukmwasion-landed-again-in-support-of-the-maoist","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुकमवासियों के समर्थन में फिर उतरे माओवादी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुकमवासियों के समर्थन में फिर उतरे माओवादी
ब्यूरो/अमर उजाला महराजगंज
Updated Mon, 25 Jul 2016 11:43 PM IST
विज्ञापन
नेपाल बाडऱ्र
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नेपाल के सुकुमवासी नागरिकों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के विरोध में सोमवार को विप्लव माओवादी गुट की एक दिन की नेपाल बंदी सफल रही। कल, कारखाने, स्कूल बैंक के साथ सड़कों पर वाहन नहीं चलने से सन्नाटा पसरा रहा। रुपनदेही जिले के बुटवल और भैरहवां में पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे सैकड़ों माओवादी कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। देर शाम तक भारत से नेपाल जाने वाले यात्री सरहद पर रुक कर बंदी समाप्त होने की प्रतीक्षा करते रहे। भारत से मालवाहक ट्रकों के नेपाल प्रवेश में भी दिक्कतें रहीं। सीमा के बाजार पूरी तरह बंद रहे।
मालूम हो कि भूकंप के बाद पहाड़ पर लगातार हो रहे भूस्खलन से डरे पहाड़ वासी सरकार की समतल जमीनों पर बस गए हैं। इन्हें सुकमवासी कहा जाता है। सरकार के आदेश पर जिला प्रशासन सरकारी जमीनें खाली करवा रही है। इस काम में पुलिस की मदद भी ली जा रही है। माओवादी विप्लव गुट का आरोप है कि जमीनों को खाली करवाने में पुलिस सुकमवासियों का उत्पीड़न कर रही है। पुलिस उत्पीड़न के विरोध में माओवादी विप्लप गुट इसके पहले भी दोषी पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई की मंाग को लेकर चक्का जाम कर चुका है।
सोमवार को माओवादियों ने पूरे नेपाल में बंदी का आहावन किया था। इसका असर नेपाल के पूर्वी जिलों में देखने को मिला। सीमा से सटे रुपनदेही और नवलपरासी जिले में जबरदस्त बंदी रही। सड़कों पर दो पहिया वाहनों को छोड़ कोई भी वाहन नहीं चला । भारत से पर्यटकों को लेकर लुम्बिनी पोखरा और काठमांडू जाने वाले 20 बसों को नेपाल पुलिस ने सुरक्षा कारणों से बार्डर पर ही रोक दिया। विरोध प्रदर्शन में रूपनदेही और नवलपरसी जिले में सैकड़ों माओवादी कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मालूम हो कि भूकंप के बाद पहाड़ पर लगातार हो रहे भूस्खलन से डरे पहाड़ वासी सरकार की समतल जमीनों पर बस गए हैं। इन्हें सुकमवासी कहा जाता है। सरकार के आदेश पर जिला प्रशासन सरकारी जमीनें खाली करवा रही है। इस काम में पुलिस की मदद भी ली जा रही है। माओवादी विप्लव गुट का आरोप है कि जमीनों को खाली करवाने में पुलिस सुकमवासियों का उत्पीड़न कर रही है। पुलिस उत्पीड़न के विरोध में माओवादी विप्लप गुट इसके पहले भी दोषी पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई की मंाग को लेकर चक्का जाम कर चुका है।
विज्ञापन
सोमवार को माओवादियों ने पूरे नेपाल में बंदी का आहावन किया था। इसका असर नेपाल के पूर्वी जिलों में देखने को मिला। सीमा से सटे रुपनदेही और नवलपरासी जिले में जबरदस्त बंदी रही। सड़कों पर दो पहिया वाहनों को छोड़ कोई भी वाहन नहीं चला । भारत से पर्यटकों को लेकर लुम्बिनी पोखरा और काठमांडू जाने वाले 20 बसों को नेपाल पुलिस ने सुरक्षा कारणों से बार्डर पर ही रोक दिया। विरोध प्रदर्शन में रूपनदेही और नवलपरसी जिले में सैकड़ों माओवादी कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया है।
विज्ञापन