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गांधी जयंती पर विशेष: 120 साल की बेचना देवी बोलीं- नहीं भूल पाती बापू को दिया पानी का एक गिलास

Mon, 02 Oct 2023 11:30 AM IST
vivek shukla संजय पांडेय, महराजगंज।
संजय पांडेय, महराजगंज। Published by: vivek shukla Updated Mon, 02 Oct 2023 11:30 AM IST
सार

बापू के ठहरने के लिए घुघली स्थित लाला केशर लाल नारंग से चीनी मिल के गेस्ट हाउस की मांग की गई। नारंग ने हामी भी भर दी, लेकिन तत्कालीन अंग्रेज डीएम के खौफ से उन्होंने मना कर दिया। वह ताला बंद कर नैनीताल चले गए। इसकी जानकारी जब गांधी जी को हुई तो उन्होंने मुंशी छत्रधारी लाल के यहां ही ठहरने की इच्छा जताई।

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Special on Gandhi Jayanti 120 year old Bechna Devi can not forget glass of water she gave to Bapu
बेचना देवी ने बापू को पिलाया था पानी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

नहीं भूलता टेलीग्राम वाला वो दिन। गांधीजी के आने का संदेश लेकर आए तार ने घुघली कस्बे में ऐसी हलचल बढ़ाई थी कि अंग्रेज अफसर भी सहम गए। इधर, आजादी के सिपाही बापू के स्वागत की तैयारी में जुटे, उधर अंग्रेजी हुकूमत सख्ती में। 4 अक्तूबर, 1929 की उस तारीख को याद कर 120 साल की बेचना देवी रोमांचित हो उठती हैं। भोजन के दौरान बापू को उन्होंने खुद पानी पिलाया था।

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उम्र के इस पड़ाव में भी बेचना देवी बापू की यात्रा के बारे में ऐसे बताती हैं मानों कल की बात हो। घुघली कस्बे में रहने वाली बेचना बताती हैं कि उनके आने की सूचना जैसे ही मिली कस्बे के मुंशी छत्रधारी लाल, हौसला त्रिपाठी, कपिलदेव पांडेय, नरसिंह पांडेय, अब्दुल रऊफ लारी, दुर्योधन प्रसाद ने गांव-गांव जाकर सबको बैकुंठी तट पर होने वाली जनसभा की खबर देने लगे।
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बापू के ठहरने के लिए घुघली स्थित लाला केशर लाल नारंग से चीनी मिल के गेस्ट हाउस की मांग की गई। नारंग ने हामी भी भर दी, लेकिन तत्कालीन अंग्रेज डीएम के खौफ से उन्होंने मना कर दिया। वह ताला बंद कर नैनीताल चले गए। इसकी जानकारी जब गांधी जी को हुई तो ने उन्होंने मुंशी छत्रधारी लाल के यहां ही ठहरने की इच्छा जताई।

बकौल बेचना देवी, उन दिनों मैं मुंशी छत्रधारी लाल के यहां काम करती थी। बापू आए तो उन्होंने मुंशी जी की पत्नी के हाथ की बनी मूंग की दाल व रोटी खाई। भावुक हो चुकीं बेचना देवी बताती हैं कि भोजन के दौरान बापू को उन्होंने खुद पानी दिया था। जीवन का वह पल कभी नहीं भूलता है।

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