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Maharajganj News: दो दोस्तों की मौत के बाद गांधीनगर वार्ड पसरा सन्नाटा

Tue, 15 Sep 2026 02:08 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 15 Sep 2026 02:08 AM IST
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Silence descends on Gandhinagar ward following the deaths of two friends.
मृतक सूरज के रोते बिलखते परिजन। 
तीज का सामान देकर दोस्त के साथ निकला था नीतीश, एक परिवार ने किशोर बेटा खोया तो दूसरे ने कमाऊ सहारा
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नगर पालिका क्षेत्र के गांधीनगर वार्ड मोहल्ले के रहने वाले थे दोनों, आसपास ही है घर

महराजगंज। सेमरा चंद्रौली गांव के पास रविवार की देर रात करीब 10:30 बजे हुए सड़क हादसे ने गांधी नगर के दो परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। एक ही बाइक पर सवार नीतीश (15) और सूरज (19) की मौत की खबर जैसे ही घर पहुंची, दोनों परिवारों में चीख-पुकार मच गई।
जानकारी के अनुसार, नीतीश और सूरज नगर पालिका क्षेत्र के गांधीनगर वार्ड मोहल्ले के रहने वाले थे। दोनों का घर आसपास ही है। दोनों आपस में दोस्त थे। हादसे में दोनों के मौत की सूचना मिलते ही मोहल्ले में सन्नाटा पसर गया। पीड़ित परिवारों के घर पर लोगों की भीड़ जुट गई। परिजन के साथ ही मोहल्ले वाले भी दुखी हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार चालक ने हेलमेट नहीं लगा रखा था।
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नीतीश अपने पिता अमरनाथ उर्फ पप्पू का तीसरा बच्चा था। वह कक्षा छह का छात्र था। रविवार को वह घर पर तीज का सामान देकर दोस्त सूरज के साथ बाइक से गोरखपुर की ओर गया था। बहन शिवानी ने बताया कि नीतीश ने घर पर यही कहा था कि दोस्त के साथ घूमने जा रहा है। रात करीब 11 बजे दुर्घटना की सूचना मिली। परिजन भागकर अस्पताल पहुंचे लेकिन डॉक्टरों ने नीतीश को मृत घोषित कर दिया।
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शिवानी ने बताया कि नीतीश का स्वभाव बेहद अच्छा था। वह सबसे हंसकर बात करता था और मोहल्ले के लोग भी उसे बहुत मानते थे। उसकी मौत ने परिवार के साथ पूरे मोहल्ले को भी झकझोर दिया। नीतीश की मां राजकुमारी की करीब 10 वर्ष पहले मौत हो चुकी है। इसके बाद पिता अमरनाथ ने दूसरी शादी कर ली। पहली पत्नी से तीन बच्चे शिवानी, प्रिंस और नीतीश थे। शिवानी बीए की पढ़ाई कर रही हैं जबकि प्रिंस हैदराबाद में काम करता है।
परिवार का खर्च पिता अमरनाथ और बेटा प्रिंस मिलकर चलाते थे। अमरनाथ ईंट-भट्ठे पर चालक का काम करते हैं। नीतीश की मौत ने परिवार के उस बेटे को छीन लिया, जिसके सामने अभी पूरी जिंदगी पड़ी थी।
दूसरी ओर सूरज की मौत ने उसके परिवार को भी तोड़कर रख दिया। सूरज पुत्र बाबूराम पिता का सहारा था। वह बंगलूरू में पेंटिंग का काम करता था और रक्षा बंधन से करीब एक सप्ताह पहले ही घर आया था। परिवार के मुताबिक, उसे 15 सितंबर को वापस बंगलूरू जाना था। किसी ने नहीं सोचा था कि रविवार की रात घर से निकले दोनों युवक फिर कभी लौटकर नहीं आएंगे। अब दोनों घरों में उनकी बातें, उनकी यादें और उनके लौटने का इंतजार ही बाकी रह गया है।

सूरज की कमाई से परिवार को भविष्य की थी उम्मीदें
सूरज चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर था। बड़ी बहन अनीता की शादी हो चुकी है। तीसरे नंबर की बहन चांदनी की भी शादी हो गई है जबकि सबसे छोटा भाई करन अभी महज 12 वर्ष का है। पिता बाबूराम राजगीर मिस्त्री का काम करते हैं। घर का खर्च सूरज और उसके पिता की कमाई से चलता था। सूरज की कमाई से परिवार को भविष्य की उम्मीदें थीं लेकिन एक झटके में वह उम्मीद भी टूट गई। बहन चांदनी के मुताबिक, सूरज ने घर से निकलते समय बताया था कि वह दोस्त से मिलने गोरखपुर जा रहा है। वह शाम करीब सात बजे बाइक लेकर निकला था। देर रात हादसे की खबर आई तो परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। बाइक सूरज ही चला रहा था और उसने हेलमेट नहीं पहना था।
सदर कोतवाल निर्भय सिंह ने बताया की घटना श्यामदेउरवां थाना क्षेत्र में हुआ था, तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
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