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Maharajganj News: जितिया पर बदली खरीदारी की तस्वीर, गांव के लोग शहर से खरीद रहे दही-चूड़ा
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पहले गांव से दही खरीदने आते थे शहर के लोग, अब ग्रामीणों की बाजार पर निर्भरता बढ़ी
निचलौल। समय के साथ गांव और शहर की जीवनशैली में आए बदलाव का असर पर्व-त्योहारों की खरीदारी पर भी दिखाई देने लगा है। कभी जितिया पर्व पर शहर के लोग गांवों में जाकर सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दही खरीदते थे लेकिन अब तस्वीर बदल गई है। शुक्रवार को जितिया पर्व की तैयारियों के बीच निचलौल शहर के चौक-चौराहों पर गांव से आए लोग दही और चूड़ा खरीदते नजर आए।
हिंदू धर्म में संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना के लिए महिलाएं जितिया व्रत रखती हैं। शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ व्रत की शुरुआत हुई। शनिवार को महिलाएं निर्जला व्रत रखेंगी, जबकि रविवार को सूर्योदय के समय पारण कर व्रत समाप्त करेंगी।
जितिया पर्व को लेकर दही और चूड़ा की मांग बढ़ने से बाजार में इनके दाम भी चर्चा में रहे। खोनहौली निवासी लल्लन यादव ने बताया कि वह निचलौल बाजार दही खरीदने आए थे। उन्होंने कहा कि पहले शहर के लोग गांव में दही खरीदने आते थे। उस समय अच्छी गुणवत्ता की दही कम कीमत में मिल जाती थी। अब गांव के लोगों को ही पर्व के लिए शहर से दही खरीदनी पड़ रही है।
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बाजार में शुक्रवार को दही करीब 50 रुपये पाव और चूड़ा 65 रुपये किलो बिक रहा था। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ वर्ष पहले त्योहार से पहले खेतों में तैयार धान की फसल काटकर घर पर ही चूड़ा तैयार किया जाता था। अब खेती और पशुपालन की बदलती व्यवस्था के कारण त्योहारों पर घर में तैयार होने वाली चीजों की जगह बाजार से खरीदारी का चलन बढ़ गया है। इसका असर पर्व-त्योहारों की परंपरागत खरीदारी पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
फोटो परिचय : निचलौल शहर में दही और चूड़ा खरीदने के लिए लगी भीड़।
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निचलौल। समय के साथ गांव और शहर की जीवनशैली में आए बदलाव का असर पर्व-त्योहारों की खरीदारी पर भी दिखाई देने लगा है। कभी जितिया पर्व पर शहर के लोग गांवों में जाकर सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दही खरीदते थे लेकिन अब तस्वीर बदल गई है। शुक्रवार को जितिया पर्व की तैयारियों के बीच निचलौल शहर के चौक-चौराहों पर गांव से आए लोग दही और चूड़ा खरीदते नजर आए।
हिंदू धर्म में संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना के लिए महिलाएं जितिया व्रत रखती हैं। शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ व्रत की शुरुआत हुई। शनिवार को महिलाएं निर्जला व्रत रखेंगी, जबकि रविवार को सूर्योदय के समय पारण कर व्रत समाप्त करेंगी।
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जितिया पर्व को लेकर दही और चूड़ा की मांग बढ़ने से बाजार में इनके दाम भी चर्चा में रहे। खोनहौली निवासी लल्लन यादव ने बताया कि वह निचलौल बाजार दही खरीदने आए थे। उन्होंने कहा कि पहले शहर के लोग गांव में दही खरीदने आते थे। उस समय अच्छी गुणवत्ता की दही कम कीमत में मिल जाती थी। अब गांव के लोगों को ही पर्व के लिए शहर से दही खरीदनी पड़ रही है।
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बाजार में शुक्रवार को दही करीब 50 रुपये पाव और चूड़ा 65 रुपये किलो बिक रहा था। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ वर्ष पहले त्योहार से पहले खेतों में तैयार धान की फसल काटकर घर पर ही चूड़ा तैयार किया जाता था। अब खेती और पशुपालन की बदलती व्यवस्था के कारण त्योहारों पर घर में तैयार होने वाली चीजों की जगह बाजार से खरीदारी का चलन बढ़ गया है। इसका असर पर्व-त्योहारों की परंपरागत खरीदारी पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
फोटो परिचय : निचलौल शहर में दही और चूड़ा खरीदने के लिए लगी भीड़।