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Maharajganj News: चंदन, प्यास नीचे तो महाव खतरे के निशान के पार
Thu, 07 Aug 2025 12:41 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 07 Aug 2025 12:41 AM IST
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महाव नाले का बढ़ा जलस्तर।
महराजगंज। नेपाल में बारिश के असर से भारतीय क्षेत्र की नदियों में उतार चढ़ाव हो रहा है। मंगलवार को महाव नाला खतरे के निशान से पांच फीट ऊपर बह रहा था। अब यह खतरे के निशान पांच फीट नीचे आ गया है। बीते दिन यह 10 फीट पर बह रहा था।
दूसरी ओर चंदन व प्यास के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है। गंडक नदी में बढ़ोतरी नहीं हुई है। यह बुधवार को भी खतरे के निशान से दो मीटर नीचे रही। बंधों की सुरक्षा को लेकर निगरानी तेज कर दी गई है। पिछले तीन दिनों से रुक रुककर हो रही बारिश से गंडक नदी का जलस्तर बढ़ा है, लेकिन इससे कहीं भी बाढ़ के हालात नहीं होने की संभावना है। सिंचाई खंड दो के जिम्मेदार गंडक नदी के संवेदनशील बांधों पर निगरानी करते हुए सतर्क हो चुके हैं। सिंचाई विभाग खंड द्वितीय के जेई रविन्द्र यादव ने कहा की पहाड़ों पर बारिश की वजह से नदी का जलस्तर शुरुआत में कुछ बढ़ा था। उसी पर नदी का जलस्तर ठप पड़ा हुआ है।
नदी के बी गैप, ए गैप, नेपाल और लिंक बांध पर भी बढ़ते जलस्तर का कोई असर नहीं पड़ने वाला है। क्योंकि नदी का खतरा 3.80 लाख क्यूसेक है। जबकि अभी नदी में लगभग 1.40 लाख क्यूसेक जलस्तर बना हुआ है। इतना ही नहीं पहाड़ों पर बारिश होने से पहले ही बांधों की मरम्मत का कार्य पूरा कर लिया गया है। नदी के बांध से सटे लोगों को कोई दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।
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दूसरी ओर चंदन व प्यास के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है। गंडक नदी में बढ़ोतरी नहीं हुई है। यह बुधवार को भी खतरे के निशान से दो मीटर नीचे रही। बंधों की सुरक्षा को लेकर निगरानी तेज कर दी गई है। पिछले तीन दिनों से रुक रुककर हो रही बारिश से गंडक नदी का जलस्तर बढ़ा है, लेकिन इससे कहीं भी बाढ़ के हालात नहीं होने की संभावना है। सिंचाई खंड दो के जिम्मेदार गंडक नदी के संवेदनशील बांधों पर निगरानी करते हुए सतर्क हो चुके हैं। सिंचाई विभाग खंड द्वितीय के जेई रविन्द्र यादव ने कहा की पहाड़ों पर बारिश की वजह से नदी का जलस्तर शुरुआत में कुछ बढ़ा था। उसी पर नदी का जलस्तर ठप पड़ा हुआ है।
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नदी के बी गैप, ए गैप, नेपाल और लिंक बांध पर भी बढ़ते जलस्तर का कोई असर नहीं पड़ने वाला है। क्योंकि नदी का खतरा 3.80 लाख क्यूसेक है। जबकि अभी नदी में लगभग 1.40 लाख क्यूसेक जलस्तर बना हुआ है। इतना ही नहीं पहाड़ों पर बारिश होने से पहले ही बांधों की मरम्मत का कार्य पूरा कर लिया गया है। नदी के बांध से सटे लोगों को कोई दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।
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