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Maharajganj News: जन औषधि केंद्रों पर दवाओं की बिक्री की होगी जांच
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महराजगंज। जिला संयुक्त चिकित्सालय में जेनेरिक दवाओं की जगह ब्रांडेड दवाएं बेचने के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। बृहस्पतिवार को अमर उजाला में ‘जेनरिक के नाम पर बेच रहे ब्रांडेड दवाएं’ शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा के निर्देश पर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीकांत शुक्ला ने जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने डीएम को पत्र भेजकर मामले में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित करने की जानकारी दी है।
सीएमओ कार्यालय की ओर से जारी किए गए पत्र के अनुसार, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीकांत ने जांच समिति में शामिल जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. राजीव यादव, उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजेश द्विवेदी और औषधि निरीक्षक दीपक कुमार पांडेय को निर्देश दिया है कि वह जिला संयुक्त चिकित्सालय में जाकर तथ्यों की गहन जांच कर रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत करें। उन्होंने बताया कि यदि जांच में आरोप सही पाए गए तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकारें लंबे समय से मरीजों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दे रही हैं।
प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र के माध्यम से सस्ती दर पर दवाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है ताकि गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को आर्थिक बोझ न उठाना पड़े। यदि सरकारी अस्पताल में ही जेनेरिक दवाओं की जगह महंगी ब्रांडेड दवाएं दी जा रही हैं तो यह ठीक नहीं है।
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सीएमओ कार्यालय की ओर से जारी किए गए पत्र के अनुसार, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीकांत ने जांच समिति में शामिल जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. राजीव यादव, उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजेश द्विवेदी और औषधि निरीक्षक दीपक कुमार पांडेय को निर्देश दिया है कि वह जिला संयुक्त चिकित्सालय में जाकर तथ्यों की गहन जांच कर रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत करें। उन्होंने बताया कि यदि जांच में आरोप सही पाए गए तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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उन्होंने कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकारें लंबे समय से मरीजों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दे रही हैं।
प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र के माध्यम से सस्ती दर पर दवाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है ताकि गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को आर्थिक बोझ न उठाना पड़े। यदि सरकारी अस्पताल में ही जेनेरिक दवाओं की जगह महंगी ब्रांडेड दवाएं दी जा रही हैं तो यह ठीक नहीं है।
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