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Maharajganj News: असंगठित क्षेत्र के शोधकर्ताओं की होगी खोज, पेटेंट हो सकेंगे माॅडल
Tue, 19 Nov 2024 01:37 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Tue, 19 Nov 2024 01:37 AM IST
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महराजगंज। विपरीत परिस्थितियों में नई खोज करने वालों की प्रतिभा को पहचान मिलेगी। असंगठित क्षेत्र के ऐसे शोधकर्ताओं की खोज के लिए शासन व विज्ञान प्रौद्योगिकी परिषद ने संयुक्त अभियान प्रारंभ किया है। 2025 में इसके लिए आयोजन कराने के लिए डीआईओएस कार्यालय को पत्र भेजा गया है। स्कूल काॅलेजों के विद्यार्थी, प्रशिक्षु, किसान, चिकित्सक, मैकेनिक इसमें प्रतिभाग कर सकेंगे। ऐसे लोगों की खोज व आमंत्रण के लिए डीआईओएस कार्यालय के अलावा कृषि, ग्रामोद्योग, जिला उद्योग, पंचायतीराज से भी सहयोग के लिए निर्देश दिए गए हैं।
आयोजित कार्यक्रम में शोधकर्ता अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। अगर किसी शोधकर्ता का शोध सामाजिक दृष्टिकोण से उपयोगी साबित हो सकता है तो उसे पेटेंट कराने का प्रस्ताव जनपद के मार्फत किया जाएगा। असंगठित क्षेत्रों में ऐसे बहुत से लोग हैं, जो कम पढ़े-लिखे होकर भी अपने काम को नए तरीके से कर रहे हैं। उनका शोध अन्य के लिए भी प्रेरणास्रोत हो सकता है। प्रचार-प्रसार और प्रोत्साहन के अभाव में उनकी प्रतिभा लोगों के सामने नहीं आ पाती। जबकि, उनकी खोज समाज के लिए महत्वपूर्ण होती है। ऐसे लोगों को मार्गदर्शन और तकनीकी सहायता देकर उनके माॅडल को व्यावसायिक दृष्टिकोण से विकसित कराने की पहल विभिन्न विभागों की ओर से की जा सकेगी। इसमें औषधीय पौधों व जड़ी-बूटियों से सस्ती विशेष मर्ज की दवा तैयार करने वाले आयुष चिकित्सक, कृषि क्षेत्र में माॅडल खेती, जैविक खेती करने वाले किसान, पंचायती राज विभाग के लिए उपयोगी सामग्री, कम लागत के मैकेनिकल उपकरण, लघु स्टार्टअप डालने वाले शामिल हो सकेंगे। जिला विद्यालय निरीक्षक प्रदीप कुमार शर्मा ने बताया कि शैक्षिक सत्र 2025 में इसके आयोजन की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी।
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आयोजित कार्यक्रम में शोधकर्ता अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। अगर किसी शोधकर्ता का शोध सामाजिक दृष्टिकोण से उपयोगी साबित हो सकता है तो उसे पेटेंट कराने का प्रस्ताव जनपद के मार्फत किया जाएगा। असंगठित क्षेत्रों में ऐसे बहुत से लोग हैं, जो कम पढ़े-लिखे होकर भी अपने काम को नए तरीके से कर रहे हैं। उनका शोध अन्य के लिए भी प्रेरणास्रोत हो सकता है। प्रचार-प्रसार और प्रोत्साहन के अभाव में उनकी प्रतिभा लोगों के सामने नहीं आ पाती। जबकि, उनकी खोज समाज के लिए महत्वपूर्ण होती है। ऐसे लोगों को मार्गदर्शन और तकनीकी सहायता देकर उनके माॅडल को व्यावसायिक दृष्टिकोण से विकसित कराने की पहल विभिन्न विभागों की ओर से की जा सकेगी। इसमें औषधीय पौधों व जड़ी-बूटियों से सस्ती विशेष मर्ज की दवा तैयार करने वाले आयुष चिकित्सक, कृषि क्षेत्र में माॅडल खेती, जैविक खेती करने वाले किसान, पंचायती राज विभाग के लिए उपयोगी सामग्री, कम लागत के मैकेनिकल उपकरण, लघु स्टार्टअप डालने वाले शामिल हो सकेंगे। जिला विद्यालय निरीक्षक प्रदीप कुमार शर्मा ने बताया कि शैक्षिक सत्र 2025 में इसके आयोजन की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी।
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