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Maharajganj News: रियल टाइम खतौनी... चढ़ावे से मिलेगा छुटकारा
Sun, 28 May 2023 01:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sun, 28 May 2023 01:02 AM IST
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सदर तहसील परिसर में खतौनी के लिए लगी भीड़।संवाद
रियल टाइम खतौनी व्यवस्था लागू करने की तैयारियां तेज, बैनामा होने के 24 घंटे में खतौनी पर चढ़ जाएगा नाम
जुलाई तक दूर कर लेनी है खतौनी की खामियां, इसके बाद राजस्व परिषद लागू करेगा नई व्यवस्था
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। रियल टाइम खतौनी की व्यवस्था लागू होने के बाद किसी को तहसील का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। चंद महीनों के भीतर यह व्यवस्था लागू हो जाएगी। भूमि का बैनामा कराने के बाद खतौनी पर नाम चढ़वाने के लिए न ही चढ़ावा चढ़ाना पड़ेगा, न भटकना पड़ेगा। रियल टाइम खतौनी से बैनामा होने के 24 घंटे के भीतर ही खतौनी पर नाम चढ़ जाएगा। इसके लिए तहसीलों से लेकर राजस्व परिषद तक में तैयारियां तेजी से चल रही हैं।
उधर, शासन ने नई व्यवस्था लागू होने के पहले 31 जुलाई तक खतौनी से जुड़ी सभी खामियां दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। क्योंकि इसके व्यवहार में आ जाने के बाद खतौनी में नाम सुधार जैसे कई खामियों को दुरुस्त नहीं कराया जा सकेगा। हालांकि, खतौनी से जुड़ी खामियों को दुरुस्त करने की रफ्तार अभी बेहद धीमी है। इस रफ्तार से जुलाई तक लक्ष्य पूरा कर पाना आसान नहीं दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक जिले में अभी 15 से 20 फीसदी ही काम हुआ है। रियल टाइम खतौनी 19 कॉलम की होगी। अभी खतौनी सिर्फ 13 कॉलम की है।
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रियल टाइम खतौनी की व्यवस्था ऐसे काम करेगी
संपत्ति का बैनामा कराने के बाद नामांतरण के लिए विलेख की एक प्रति तहसील चली जाती है। वहां 45 दिनों में नामांतरण की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। यानी विक्रेता का नाम काटकर क्रेता का नाम चढ़ता है। इसके बाद अमल दरामद के लिए फाइल जाती है और खतौनी में नाम चढ़ने में दो से तीन महीने का समय लग जाता है। नाम जल्द चढ़वाने के लिए आवेदकों को चढ़ावा चढ़ाना पड़ता है। रियल टाइम खतौनी व्यवस्था लागू होने के बाद बैनामा होने के 24 घंटे के भीतर ही क्रेता का नाम खतौनी पर चढ़ जाएगा। बीच की सभी तरह की उलझाऊ प्रक्रिया से निजात मिल जाएगी। तहसील सूत्रों के मुताबिक ऐसे 100 से अधिक मामले में लंबित हैं, जिनकी खतौनी नहीं जारी हो सकी है। हालांकि, तहसील प्रशासन की दलील है कि कानूनी पेच की वजह से फाइलें निस्तारित होने में देरी होती हैं।
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फोटो
केस नंबर एक
धारा 80 कराने के बाद भी नहीं मिला खतौनी
पकड़ी सिसवा की रहने वाली नागमणि पटेल ने बताया कि मकान बनवाने के लिए भूमि पर लोन लेना है। इसके लिए खतौनी की जरूरत है। जिम्मेदारों ने बताया कि उक्त भूमि पर खतौनी के लिए धारा 80 कराना पड़ेगा। उसके बाद धारा 80 भी करा दिया, लेकिन दो माह से अधिक समय बीत गया। फिर भी खतौनी पर धारा 80 नहीं चढ़ पाया। न ही खतौनी मिली। रोज तहसील आकर खतौनी से संबंधित जानकारी लेकर लौट जा रही हूं।
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केस नंबर दो
चढ़ावा देने के बाद भी नहीं मिल रहा खतौनी
जनार्दन यादव निवासी बहुआर ने बताया कि वह सेना के जवान हैं। जनवरी में जमीन की खरीदारी की थी। फरवरी में आदेश भी हो गया। फिर भी उन्हें खतौनी नहीं मिल रहा है। उन्होंने बताया कि खतौनी के लिए जिम्मेदारों ने चढ़ावा भी ले लिया है। खतौनी की जानकारी लेने पर जिम्मेदार बताते हैं कि अभी खतौनी नहीं निकल रही है। अब खतौनी के लिए तहसील के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
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रिपोर्ट के आधार पर नामांतरण की प्रक्रिया होती
भूमि के विक्रेता का नाम हटाकर उसकी जगह क्रेता का नाम चढ़ाने के लिए तहसील में फाइल जाती है। तब इसकी जांच लेखपाल करते हैं। लेखपाल की रिपोर्ट के आधार पर नामांतरण की प्रक्रिया होती है। तमाम लोग शिकायत कर चुके हैं कि इस दौरान जिसने चढ़ावा दे दिया, उसके खारिज दाखिल में कोई दिक्कत नहीं आती। आसानी से उसका नाम खतौनी में चढ़ जाता है। यदि किसी ने भेंट देने में कोई चूक की तो उसे तहसील का चक्कर लगाना पड़ता है। कभी लेखपाल की रिपोर्ट नहीं लग पाती है तो कभी अधिकारी नहीं मिलते हैैं। अधिकांश मामलों में लेखपाल की रिपोर्ट लगाने में विलंब होता है। इस चक्कर में 45 दिन के बजाय तीन से चार महीन लगते हैं। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारी इससे इन्कार करते हैं। अधिकारियों का कहना है कि जिस मामले में कोई आपत्ति होती है या गड़बड़ी पाई जाती है, उसमें ही दिक्कत आती है।
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नई व्यवस्था से राहत मगर फर्जीवाड़े का तोड़ जरूरी
शासन की ओर से रियल टाइम खतौनी व्यवस्था लागू किए जाने के बाद लोगों को तहसीलों की दौड़ लगाने और चढ़ावा देने से तो राहत मिल जाएगी। नई व्यवस्था में खाताधारकों का अंश तय करने में भी दिक्कत नहीं होगी। इससे कोई भी व्यक्ति अपने अंश से अधिक दूसरे का अंश नहीं बेच पाएगा, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक जमीन का फर्जीवाड़ा भी बढ़ेगा। बैनामा के 24 घंटे के भीतर ही खतौनी पर नाम चढ़ जाने से जब तक जमीन के फर्जीवाड़े की जानकारी होगी, तब तक जमीन दूसरे के नाम यानी जमीन खरीदने वाले के नाम दर्ज हो जाएगी। इसके बाद वह किसी और को दो से तीन दिन के भीतर जमीन बैनामा कर सकेगा। मौजूदा व्यवस्था में नामांतरण की प्रक्रिया के दौरान क्रेता, विक्रेता दोनों को सूचना भेजी जाती है। फर्जीवाड़े के मामले में आपत्ति दाखिल होती है और कई लोगों को राहत भी मिलती है। कई अधिवक्ता भी नुकसान की आशंका जता रहे हैं। उनका कहना है कि बैनामा के बाद इश्तिहार की प्रक्रिया होती है। क्रेता और विक्रेता के पास इसे भेजकर जानकारी दी जाती है। रियल टाइम खतौनी होने से इश्तिहार नहीं दिया जा सकेगा। इन दिक्कतों का तोड़ निकालना जरूरी है।
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रियलटाइम खतौनी के ये हैं फायदे
- भूमि का बैनामा होने के 24 घंटे के बाद ही नई खतौनी जारी हो जाएगी। विक्रेता की जगह क्रेता का नाम चढ़ जाएगा।
- इस खतौनी से गाटा संख्या में खातेदारों के नाम के आगे अंश (उनके हिस्से की कितनी भूमि है) उसका जिक्र होगा।
- अंश का जिक्र होने से कोई व्यक्ति अपने हिस्से से अधिक भूमि नहीं बेच सकेगा। कोई किसी की भूमि पर अधिक कब्जा नहीं कर सकेगा।
- खतौनी के लिए तहसील का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। काम कराने के नाम पर दलाल वसूली नहीं कर पाएंगे।
- जमीन के कारोबारी या खरीदार, किसी लालच में पड़कर आपत्ति नहीं लगा सकेंगे।
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कोट
रियल टाइम खतौनी की व्यवस्था लागू होने से ज्यादातर समस्याएं स्वत: दूर हो जाएंगी। किसी को इधरश्रउधर भटकना नहीं पड़ेगा। 24 घंटे के अंदर खतौनी जारी हो जाएगी। सिस्टम को अपडेट किया जा रहा है। जरूरी कार्यों को तेजी से कराया जा रहा है। सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह व्यवस्था लागू हो जाएगी।
डॉ. पंकज कुमार वर्मा, अपर जिलाधिकारी
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नई व्यवस्था से बैनामा के बाद ही क्रेता की खतौनी उन्हें मिल जाएगी। अभी तो नामांतरण की प्रक्रिया में तीन से चार माह लग रहा है। लोग रोजाना भटकते रहते हैं। इसे जल्द लागू करना चाहिए। यह व्यवस्था जनहित में है। श्याममोहन, अधिवक्ता
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इससे खतौनी तो 24 घंटे में मिल जाएगी, लेकिन गलत बैनामा होने, कम जमीन का पैसा देकर अधिक भूमि लिखवा लेने सहित अन्य मामलों में दिक्कत आएगी। जब तक कोई शिकायत होगी, तब तक फर्जीवाड़ा करने वाले एक ही भूमि को कई लोगों को बेच चुके होंगे।
सतीश पांडेय, अधिवक्ता
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खतौनी लेने के लिए काफी समय लग रहा है। नई व्यवस्था ठीक है, लेकिन कुछ समस्याएं हैं। रियल टाइम खतौनी की सुविधा लागू होने के बाद समझना पड़ेगा की कैसी समस्याएं आएंगी।
सुधांशु अधिवक्ता
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कई बार कम पैसा देकर लोग अधिक जमीन लिखवा लेते हैं। गरीब और अनपढ़ लोगों के साथ अक्सर ऐसी शिकायत आती है। किसी ने 60 डिस्मिल भूमि बेची और खरीदार ने 160 डिस्मिल लिखवा ली तो दिक्कत आएगी। खतौनी पर नाम चढ़ने के बाद क्रेता तत्काल मालिक हो जाएगा। अभी अधिक समय मिलने की वजह से लोग आपत्ति लगा देते हैं। नई व्यवस्था में ऐसा नहीं हो सकेगा। ऐसे में रजिस्ट्री के पहले क्रास चेकिंग और ज्यादा बरतनी पड़ेगी।
सुशील श्रीवास्तव, अधिवक्ता
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जुलाई तक दूर कर लेनी है खतौनी की खामियां, इसके बाद राजस्व परिषद लागू करेगा नई व्यवस्था
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। रियल टाइम खतौनी की व्यवस्था लागू होने के बाद किसी को तहसील का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। चंद महीनों के भीतर यह व्यवस्था लागू हो जाएगी। भूमि का बैनामा कराने के बाद खतौनी पर नाम चढ़वाने के लिए न ही चढ़ावा चढ़ाना पड़ेगा, न भटकना पड़ेगा। रियल टाइम खतौनी से बैनामा होने के 24 घंटे के भीतर ही खतौनी पर नाम चढ़ जाएगा। इसके लिए तहसीलों से लेकर राजस्व परिषद तक में तैयारियां तेजी से चल रही हैं।
उधर, शासन ने नई व्यवस्था लागू होने के पहले 31 जुलाई तक खतौनी से जुड़ी सभी खामियां दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। क्योंकि इसके व्यवहार में आ जाने के बाद खतौनी में नाम सुधार जैसे कई खामियों को दुरुस्त नहीं कराया जा सकेगा। हालांकि, खतौनी से जुड़ी खामियों को दुरुस्त करने की रफ्तार अभी बेहद धीमी है। इस रफ्तार से जुलाई तक लक्ष्य पूरा कर पाना आसान नहीं दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक जिले में अभी 15 से 20 फीसदी ही काम हुआ है। रियल टाइम खतौनी 19 कॉलम की होगी। अभी खतौनी सिर्फ 13 कॉलम की है।
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रियल टाइम खतौनी की व्यवस्था ऐसे काम करेगी
संपत्ति का बैनामा कराने के बाद नामांतरण के लिए विलेख की एक प्रति तहसील चली जाती है। वहां 45 दिनों में नामांतरण की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। यानी विक्रेता का नाम काटकर क्रेता का नाम चढ़ता है। इसके बाद अमल दरामद के लिए फाइल जाती है और खतौनी में नाम चढ़ने में दो से तीन महीने का समय लग जाता है। नाम जल्द चढ़वाने के लिए आवेदकों को चढ़ावा चढ़ाना पड़ता है। रियल टाइम खतौनी व्यवस्था लागू होने के बाद बैनामा होने के 24 घंटे के भीतर ही क्रेता का नाम खतौनी पर चढ़ जाएगा। बीच की सभी तरह की उलझाऊ प्रक्रिया से निजात मिल जाएगी। तहसील सूत्रों के मुताबिक ऐसे 100 से अधिक मामले में लंबित हैं, जिनकी खतौनी नहीं जारी हो सकी है। हालांकि, तहसील प्रशासन की दलील है कि कानूनी पेच की वजह से फाइलें निस्तारित होने में देरी होती हैं।
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धारा 80 कराने के बाद भी नहीं मिला खतौनी
पकड़ी सिसवा की रहने वाली नागमणि पटेल ने बताया कि मकान बनवाने के लिए भूमि पर लोन लेना है। इसके लिए खतौनी की जरूरत है। जिम्मेदारों ने बताया कि उक्त भूमि पर खतौनी के लिए धारा 80 कराना पड़ेगा। उसके बाद धारा 80 भी करा दिया, लेकिन दो माह से अधिक समय बीत गया। फिर भी खतौनी पर धारा 80 नहीं चढ़ पाया। न ही खतौनी मिली। रोज तहसील आकर खतौनी से संबंधित जानकारी लेकर लौट जा रही हूं।
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केस नंबर दो
चढ़ावा देने के बाद भी नहीं मिल रहा खतौनी
जनार्दन यादव निवासी बहुआर ने बताया कि वह सेना के जवान हैं। जनवरी में जमीन की खरीदारी की थी। फरवरी में आदेश भी हो गया। फिर भी उन्हें खतौनी नहीं मिल रहा है। उन्होंने बताया कि खतौनी के लिए जिम्मेदारों ने चढ़ावा भी ले लिया है। खतौनी की जानकारी लेने पर जिम्मेदार बताते हैं कि अभी खतौनी नहीं निकल रही है। अब खतौनी के लिए तहसील के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
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रिपोर्ट के आधार पर नामांतरण की प्रक्रिया होती
भूमि के विक्रेता का नाम हटाकर उसकी जगह क्रेता का नाम चढ़ाने के लिए तहसील में फाइल जाती है। तब इसकी जांच लेखपाल करते हैं। लेखपाल की रिपोर्ट के आधार पर नामांतरण की प्रक्रिया होती है। तमाम लोग शिकायत कर चुके हैं कि इस दौरान जिसने चढ़ावा दे दिया, उसके खारिज दाखिल में कोई दिक्कत नहीं आती। आसानी से उसका नाम खतौनी में चढ़ जाता है। यदि किसी ने भेंट देने में कोई चूक की तो उसे तहसील का चक्कर लगाना पड़ता है। कभी लेखपाल की रिपोर्ट नहीं लग पाती है तो कभी अधिकारी नहीं मिलते हैैं। अधिकांश मामलों में लेखपाल की रिपोर्ट लगाने में विलंब होता है। इस चक्कर में 45 दिन के बजाय तीन से चार महीन लगते हैं। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारी इससे इन्कार करते हैं। अधिकारियों का कहना है कि जिस मामले में कोई आपत्ति होती है या गड़बड़ी पाई जाती है, उसमें ही दिक्कत आती है।
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नई व्यवस्था से राहत मगर फर्जीवाड़े का तोड़ जरूरी
शासन की ओर से रियल टाइम खतौनी व्यवस्था लागू किए जाने के बाद लोगों को तहसीलों की दौड़ लगाने और चढ़ावा देने से तो राहत मिल जाएगी। नई व्यवस्था में खाताधारकों का अंश तय करने में भी दिक्कत नहीं होगी। इससे कोई भी व्यक्ति अपने अंश से अधिक दूसरे का अंश नहीं बेच पाएगा, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक जमीन का फर्जीवाड़ा भी बढ़ेगा। बैनामा के 24 घंटे के भीतर ही खतौनी पर नाम चढ़ जाने से जब तक जमीन के फर्जीवाड़े की जानकारी होगी, तब तक जमीन दूसरे के नाम यानी जमीन खरीदने वाले के नाम दर्ज हो जाएगी। इसके बाद वह किसी और को दो से तीन दिन के भीतर जमीन बैनामा कर सकेगा। मौजूदा व्यवस्था में नामांतरण की प्रक्रिया के दौरान क्रेता, विक्रेता दोनों को सूचना भेजी जाती है। फर्जीवाड़े के मामले में आपत्ति दाखिल होती है और कई लोगों को राहत भी मिलती है। कई अधिवक्ता भी नुकसान की आशंका जता रहे हैं। उनका कहना है कि बैनामा के बाद इश्तिहार की प्रक्रिया होती है। क्रेता और विक्रेता के पास इसे भेजकर जानकारी दी जाती है। रियल टाइम खतौनी होने से इश्तिहार नहीं दिया जा सकेगा। इन दिक्कतों का तोड़ निकालना जरूरी है।
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रियलटाइम खतौनी के ये हैं फायदे
- भूमि का बैनामा होने के 24 घंटे के बाद ही नई खतौनी जारी हो जाएगी। विक्रेता की जगह क्रेता का नाम चढ़ जाएगा।
- इस खतौनी से गाटा संख्या में खातेदारों के नाम के आगे अंश (उनके हिस्से की कितनी भूमि है) उसका जिक्र होगा।
- अंश का जिक्र होने से कोई व्यक्ति अपने हिस्से से अधिक भूमि नहीं बेच सकेगा। कोई किसी की भूमि पर अधिक कब्जा नहीं कर सकेगा।
- खतौनी के लिए तहसील का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। काम कराने के नाम पर दलाल वसूली नहीं कर पाएंगे।
- जमीन के कारोबारी या खरीदार, किसी लालच में पड़कर आपत्ति नहीं लगा सकेंगे।
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कोट
रियल टाइम खतौनी की व्यवस्था लागू होने से ज्यादातर समस्याएं स्वत: दूर हो जाएंगी। किसी को इधरश्रउधर भटकना नहीं पड़ेगा। 24 घंटे के अंदर खतौनी जारी हो जाएगी। सिस्टम को अपडेट किया जा रहा है। जरूरी कार्यों को तेजी से कराया जा रहा है। सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह व्यवस्था लागू हो जाएगी।
डॉ. पंकज कुमार वर्मा, अपर जिलाधिकारी
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नई व्यवस्था से बैनामा के बाद ही क्रेता की खतौनी उन्हें मिल जाएगी। अभी तो नामांतरण की प्रक्रिया में तीन से चार माह लग रहा है। लोग रोजाना भटकते रहते हैं। इसे जल्द लागू करना चाहिए। यह व्यवस्था जनहित में है। श्याममोहन, अधिवक्ता
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इससे खतौनी तो 24 घंटे में मिल जाएगी, लेकिन गलत बैनामा होने, कम जमीन का पैसा देकर अधिक भूमि लिखवा लेने सहित अन्य मामलों में दिक्कत आएगी। जब तक कोई शिकायत होगी, तब तक फर्जीवाड़ा करने वाले एक ही भूमि को कई लोगों को बेच चुके होंगे।
सतीश पांडेय, अधिवक्ता
...
खतौनी लेने के लिए काफी समय लग रहा है। नई व्यवस्था ठीक है, लेकिन कुछ समस्याएं हैं। रियल टाइम खतौनी की सुविधा लागू होने के बाद समझना पड़ेगा की कैसी समस्याएं आएंगी।
सुधांशु अधिवक्ता
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कई बार कम पैसा देकर लोग अधिक जमीन लिखवा लेते हैं। गरीब और अनपढ़ लोगों के साथ अक्सर ऐसी शिकायत आती है। किसी ने 60 डिस्मिल भूमि बेची और खरीदार ने 160 डिस्मिल लिखवा ली तो दिक्कत आएगी। खतौनी पर नाम चढ़ने के बाद क्रेता तत्काल मालिक हो जाएगा। अभी अधिक समय मिलने की वजह से लोग आपत्ति लगा देते हैं। नई व्यवस्था में ऐसा नहीं हो सकेगा। ऐसे में रजिस्ट्री के पहले क्रास चेकिंग और ज्यादा बरतनी पड़ेगी।
सुशील श्रीवास्तव, अधिवक्ता