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जागरूकता बेअसर, किसानों का पंजीकरण कम
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जागरूकता बेअसर, किसानों का पंजीकरण कम
निचलौल तहसील क्षेत्र में महज 163 किसानों ने कराया पंजीकरण
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिले में खुलने वाले क्रय केंद्रों पर धान की बिक्री के लिए किसानों के पंजीकरण की गति काफी धीमी है। विभाग की ओर से किसानों को जागरूक करने की पहल का असर नहीं दिख रहा है। क्रय केंद्रों पर धान की बिक्री के लिए तमाम तरह के नियम-कानून के पेच में फंसने के कारण किसान पंजीकरण में रुचि नहीं ले रहे हैं। हालत यह है कि अभी तक महज 1,950 किसानों ने पंजीकरण कराया है। सबसे खराब स्थिति निचलौल तहसील की है। जहां के सिर्फ 163 किसानों ने ही धान की बिक्री के लिए पंजीकरण कराया है।
प्रशासन की तरफ से धान खरीद की तैयारी शुरू कर दी गई है। क्रय केंद्रों के निर्धारण की रूपरेखा तैयार ली गई है। जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद क्रय केंद्रों की संख्या का निर्धारण कर दिया जाएगा। किसानों को केंद्रों पर धान की बिक्री के लिए पहले पंजीकरण कराना है। इसके लिए विभाग की ओर से किसानों को जागरूक करने का प्रयास किया गया, लेकिन जागरूकता अभियान का कोई खास असर नहीं दिख रहा है। किसानों की मानें तो सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की बिक्री के लिए तमाम औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं। नियम कानूून के पेच की परेशानी होती है। वहीं, प्राइवेट केंद्रों पर कोई परेशानी नहीं होती है और भुगतान भी तुरंत हो जाता है।
विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार सदर तहसील में 1,380 किसानों ने पंजीकरण कराया है। जबकि फरेंदा तहसील के 221, निचलौल के 163 और नौतनवां के 186 किसानों ने धान बेचने के लिए पंजीकरण कराया है। सभी तहसीलों में सबसे खराब स्थिति निचलौल तहसील की है। सदर तहसील में जागरूकता का असर कुछ दिखा है।
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जिला खाद्य विपणन अधिकारी अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि पासबुक, खतौनी, आधार कार्ड में दर्ज नाम एक जैसे होने चाहिए, तभी पंजीकरण होगा। किसानों को इस पर विशेष ध्यान देना होगा। बीते 25 अगस्त से पंजीकरण शुरू है। किसानों को पंजीकरण कराने के लिए विभाग की ओर से जागरूक करने की हर संभव कोशिश की जा रही है। कार्यालय में आने वाले किसानों को भी जागरूक किया जा रहा है।
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निचलौल तहसील क्षेत्र में महज 163 किसानों ने कराया पंजीकरण
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिले में खुलने वाले क्रय केंद्रों पर धान की बिक्री के लिए किसानों के पंजीकरण की गति काफी धीमी है। विभाग की ओर से किसानों को जागरूक करने की पहल का असर नहीं दिख रहा है। क्रय केंद्रों पर धान की बिक्री के लिए तमाम तरह के नियम-कानून के पेच में फंसने के कारण किसान पंजीकरण में रुचि नहीं ले रहे हैं। हालत यह है कि अभी तक महज 1,950 किसानों ने पंजीकरण कराया है। सबसे खराब स्थिति निचलौल तहसील की है। जहां के सिर्फ 163 किसानों ने ही धान की बिक्री के लिए पंजीकरण कराया है।
प्रशासन की तरफ से धान खरीद की तैयारी शुरू कर दी गई है। क्रय केंद्रों के निर्धारण की रूपरेखा तैयार ली गई है। जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद क्रय केंद्रों की संख्या का निर्धारण कर दिया जाएगा। किसानों को केंद्रों पर धान की बिक्री के लिए पहले पंजीकरण कराना है। इसके लिए विभाग की ओर से किसानों को जागरूक करने का प्रयास किया गया, लेकिन जागरूकता अभियान का कोई खास असर नहीं दिख रहा है। किसानों की मानें तो सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की बिक्री के लिए तमाम औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं। नियम कानूून के पेच की परेशानी होती है। वहीं, प्राइवेट केंद्रों पर कोई परेशानी नहीं होती है और भुगतान भी तुरंत हो जाता है।
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विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार सदर तहसील में 1,380 किसानों ने पंजीकरण कराया है। जबकि फरेंदा तहसील के 221, निचलौल के 163 और नौतनवां के 186 किसानों ने धान बेचने के लिए पंजीकरण कराया है। सभी तहसीलों में सबसे खराब स्थिति निचलौल तहसील की है। सदर तहसील में जागरूकता का असर कुछ दिखा है।
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जिला खाद्य विपणन अधिकारी अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि पासबुक, खतौनी, आधार कार्ड में दर्ज नाम एक जैसे होने चाहिए, तभी पंजीकरण होगा। किसानों को इस पर विशेष ध्यान देना होगा। बीते 25 अगस्त से पंजीकरण शुरू है। किसानों को पंजीकरण कराने के लिए विभाग की ओर से जागरूक करने की हर संभव कोशिश की जा रही है। कार्यालय में आने वाले किसानों को भी जागरूक किया जा रहा है।