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हर माह बढ़ रहा बाहर अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों का दबाव

Wed, 29 Sep 2021 11:21 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 29 Sep 2021 11:21 PM IST
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Pressure in Children Ward
नवजात शिशु देखभाल इकाई में बढ़ा बीमार बच्चों का दबाव
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महाराजगंज। जिला अस्पताल के नवजात शिशु देखभाल इकाई में भर्ती होने वाले बीमार शिशुओं का दबाव बढ़ रहा है। खास बात यह है कि इसमें जिला अस्पताल के बच्चे कम जबकि अन्य निजी अस्पतालों और सीएचसी, पीएचसी पर जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या अधिक है। वर्तमान में इस वार्ड में 20 बेड पर 57 बच्चों का इलाज चल रहा है।
जिला अस्पताल के नवजात शिशु देखभाल इकाई में कम समय में जन्म लेने वाले, मुंह में खराब पानी चले जाने, पीलिया होने, जन्म लेने के तुरंत बाद न रोने वाले बच्चे जिला अस्पताल में भर्ती होते हैं। इस वार्ड से विगत 3 महीने के आंकड़ों पर गौर करें तो हर माह बाहर से आने वाले बच्चों की संख्या बढ़ी है। 21 जून से 20 जुलाई तक जिला अस्पताल के नवजात शिशु देखभाल इकाई में कुल 278 बच्चे भर्ती किए गए जिसमें 34 बच्चे जिला अस्पताल में जन्म लेने वाले रहे। जबकि निजी अस्पताल व सीएचसी, पीएचसी पर जन्म लेने वाले कुल 244 बच्चे भर्ती किए गए थे। वहीं, 21 जुलाई से 20 अगस्त तक इस वार्ड में कुल 359 बच्चे भर्ती किए गए। इसमें भी केवल 40 बच्चे ही जिला अस्पताल में जन्म लेने वाले रहे। जबकि 319 बच्चे बाहर के अस्पतालों से आए जिन्हें भर्ती किया गया। वहीं, 21 अगस्त से 20 सितंबर तक कुल 454 बच्चे नवजात शिशु देखभाल इकाई में भर्ती किए गए। इसमें केवल 36 बच्चे ही जिला अस्पताल में जन्मे हैं। वहीं, 418 बच्चे बाहर के अस्पताल से आए इन बच्चों की सेहत में सुधार के लिए यहां भर्ती कराया गया है।
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अप्रशिक्षित स्टाफ से डिलिवरी के करण बच्चों को कुछ परेशानी हो जाती है जिसे नवजात शिशु देख भाल इकाई में भर्ती करना जरूरी हो जाता है। जबकि जिला अस्पताल में प्रशिक्षित स्टाफ से प्रसव कराने से बच्चों को कम समस्याएं होती हैं। जिला अस्पताल में जो बच्चे नवजात शिशु देख भाल इकाई में आते हैं। उनके सेहत में सुधार का प्रयास किया जाता है।
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-डॉ. विशाल चौधरी, बाल रोग विशेषज्ञ
जिला अस्पताल में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता है। यहां जो भी मरीज या नवजात शिशु भर्ती होते हैं, उनका बेहतर ढंग से इलाज किया जाता है। बेहतर इलाज होने के कारण मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
-डॉ. एके राय, सीएमएस
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