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Maharajganj News: अलविदा की नमाज में मांगी अमन-चैन की दुआ
Fri, 28 Mar 2025 06:10 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Fri, 28 Mar 2025 06:10 PM IST
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महराजगंज/मिठौरा। माह-ए-रमजान के आखिरी शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मस्जिदों में अलविदा की नमाज अदा की। रोजेदारों ने मुल्क की बेहतरी और अमन चैन की दुआ मांगी। सुरक्षा को लेकर पुलिस सतर्क रही। संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी की गई।
जनपद के नौतनवा, परतावल, घुघुली, निचलौल, पनियरा, फरेंदा, धानी, बृजमनगंज, लक्ष्मीपुर, मिठौरा, सिंदुरिया आदि मस्जिदों में रमजान महीने के आखिरी जुमे को अलविदा की नमाज अकीदत के साथ अदा की गई। मुस्लिम समाज के लोगों ने रमजान महीने के आखिरी अशरे की नमाज अदा की।
सिंदुरिया स्थित हुसैनिया मस्जिद में इमाम हाफिज अब्दुल रज्जाक ने नमाज अदा कराई। हाजी मौलाना मोहम्मद हुसैन निजामी ने कहा कि रमजान का महीना रुखसत (विदा होना) हो रहा है। इस्लाम के मुताबिक रमजान महीने के तीसरे अशरे (हिस्सा) जहन्नम से आजादी का रोजा चल रहा है। इसमें भूखों को खाना खिलाएं, जरूरतमंदों की मदद करें और रोजेदारों को इफ्तार कराएं, इससे खुदा राजी (खुश) होकर अपने बंदों (मानने वालों) को दिल से मांगी हुई दुआ को कुबूल करता है।
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उन्होंने कहा कि रमजान महीने के आखिरी जुमे को अलविदा या जुमातुल विदा कहा जाता है। यूं तो इस माह के हर दिन की अहमियत है। रमजान के आखिरी जुमे की नमाज से रमजान के समापन का संदेश मिलता है। रहमत भरा महीना जाने के गम में अलविदा-अलविदा माह-ए-रमजान अलविदा कहा जाता हैं। ईद के आने की खुशी जहां लोगों में होती है, वहीं इस रहमत भरे महीने के जाने का गम भी होता है। अलविदा के माने रुखसत करना है।
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जनपद के नौतनवा, परतावल, घुघुली, निचलौल, पनियरा, फरेंदा, धानी, बृजमनगंज, लक्ष्मीपुर, मिठौरा, सिंदुरिया आदि मस्जिदों में रमजान महीने के आखिरी जुमे को अलविदा की नमाज अकीदत के साथ अदा की गई। मुस्लिम समाज के लोगों ने रमजान महीने के आखिरी अशरे की नमाज अदा की।
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सिंदुरिया स्थित हुसैनिया मस्जिद में इमाम हाफिज अब्दुल रज्जाक ने नमाज अदा कराई। हाजी मौलाना मोहम्मद हुसैन निजामी ने कहा कि रमजान का महीना रुखसत (विदा होना) हो रहा है। इस्लाम के मुताबिक रमजान महीने के तीसरे अशरे (हिस्सा) जहन्नम से आजादी का रोजा चल रहा है। इसमें भूखों को खाना खिलाएं, जरूरतमंदों की मदद करें और रोजेदारों को इफ्तार कराएं, इससे खुदा राजी (खुश) होकर अपने बंदों (मानने वालों) को दिल से मांगी हुई दुआ को कुबूल करता है।
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उन्होंने कहा कि रमजान महीने के आखिरी जुमे को अलविदा या जुमातुल विदा कहा जाता है। यूं तो इस माह के हर दिन की अहमियत है। रमजान के आखिरी जुमे की नमाज से रमजान के समापन का संदेश मिलता है। रहमत भरा महीना जाने के गम में अलविदा-अलविदा माह-ए-रमजान अलविदा कहा जाता हैं। ईद के आने की खुशी जहां लोगों में होती है, वहीं इस रहमत भरे महीने के जाने का गम भी होता है। अलविदा के माने रुखसत करना है।