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गहरी जुताई करें, मिट्टी उर्वर होगी
महराजगंज (ब्यूरो)
Updated Mon, 07 May 2018 12:39 AM IST
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गहरी जुताई करें, मिट्टी उर्वर होगी
- फोटो : अमर उजाला
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महराजगंज। गेहूं की फसल की कटाई लगभग हो चुकी है। इस समय किसानों के खेत खाली पड़े हैं। ऐसे में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि खेतों की गहरी जुताई कर लें। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी में गहरी जुताई खरीब की फसलों की खेती के लिए लाभदायक होता है। बशर्ते यह काम तय समय में कर लिया जाए।
बसूली स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर बीबी सिंह ने बताया कि गर्मी में खेत की जुताई करने से रबी की फसलों पर लगे हानिकारक कीटों के अंडे या लार्वा, जो दरारों में छिपे होते हैं, वह मई व जून माह में तेज धूप से नष्ट हो जाते हैं। इससे खेत कीट पतंगों से सुरक्षित हो जाते हैं। इससे अगली फसल में कीटों के प्रकोप की संभावना कम हो जाती है। साथ ही खर पतवार उगने की संभावना भी कम हो जाती है। कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर धीरेंद्र प्रताप सिंह रबी व खरीब फसलों में प्रयोग किए गए कीट और खर पतवार नाशकों का असर जमीन में गहराई तक हो जाता है। गर्मी में जुताई कर देने से खेत में उनका प्रभाव खत्म हो जाता है। तीव्र ऊर्जा और प्रकाश से हानिकारक रसायन विघटित हो जाते हैं और उनका खेत पर असर नहीं होता। इस तरह प्रयुक्त किए गए रासायनिक उर्वरकों का 65 प्रतिशत के करीब अंश घुलनशील अवस्था में खेत में अवशेष के रूप में पड़ा रह जाता है। गर्मी में जुताई से सूर्य की तेज धूप से यह रसायन विघटित होकर घुलनशील उर्वरकों में परिवर्तित हो जाते है, जो अगली फसल को पोषण देते हैं।
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बसूली स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर बीबी सिंह ने बताया कि गर्मी में खेत की जुताई करने से रबी की फसलों पर लगे हानिकारक कीटों के अंडे या लार्वा, जो दरारों में छिपे होते हैं, वह मई व जून माह में तेज धूप से नष्ट हो जाते हैं। इससे खेत कीट पतंगों से सुरक्षित हो जाते हैं। इससे अगली फसल में कीटों के प्रकोप की संभावना कम हो जाती है। साथ ही खर पतवार उगने की संभावना भी कम हो जाती है। कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर धीरेंद्र प्रताप सिंह रबी व खरीब फसलों में प्रयोग किए गए कीट और खर पतवार नाशकों का असर जमीन में गहराई तक हो जाता है। गर्मी में जुताई कर देने से खेत में उनका प्रभाव खत्म हो जाता है। तीव्र ऊर्जा और प्रकाश से हानिकारक रसायन विघटित हो जाते हैं और उनका खेत पर असर नहीं होता। इस तरह प्रयुक्त किए गए रासायनिक उर्वरकों का 65 प्रतिशत के करीब अंश घुलनशील अवस्था में खेत में अवशेष के रूप में पड़ा रह जाता है। गर्मी में जुताई से सूर्य की तेज धूप से यह रसायन विघटित होकर घुलनशील उर्वरकों में परिवर्तित हो जाते है, जो अगली फसल को पोषण देते हैं।
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