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Maharajganj News: सूर्य ने शुक्र राशि में किया प्रवेश, अब जुलाई में बजेगी शहनाई
Tue, 30 Apr 2024 03:12 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Tue, 30 Apr 2024 03:12 AM IST
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-चतुर्मास के कारण भी मांगलिक उत्सवों पर लगेगा लगाम
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। सूर्य शुक्र राशि में चले गए हैं। मई और जून में एक भी शुभ मुहूर्त नहीं बन पा रहे हैं। अब जुलाई में शहनाई बजेगी। जिन घरों में जुलाई माह में शादी है वह तैयारी में जुट गए हैं। दो माह तक सहालग न होने के कारण विवाह समारोह से जुड़े लोगों के सामने रोजी-रोटी की दिक्कत होगी।
पंडित शरदेंदु पांडेय बताते हैं कि इस वर्ष 2024 में 25 अप्रैल से 29 जून तक शुक्र ग्रह के अस्त होने के कारण मई और जून महीने में कोई विवाह मुहूर्त नहीं हैं। इसके बाद नौ से 15 जुलाई तक विवाह के 5-6 मुहूर्त रहेंगे। उसके बाद 16 जुलाई से 11 नवंबर तक चातुर्मास होने के कारण कोई विवाह मुहूर्त नहीं है। 12 नवंबर से 15 दिसंबर तक 15-16 शुभ विवाह मुहूर्त बनेंगे।
नीरज पटवा, अमरीष आदि का कहना है कि वह विवाह से जुड़े काम करते हैं, उन्होंने विवाह घर सजा रखे हैं। हर साल मई और जून माह में खूब सहालग होते रहते हैं, लेकिन इस बार मई और जून माह में एक भी सहालग नहीं है। ऐसे में लागत और किराया निकालना मुश्किल होगा। काम में लगे कर्मचारियों को कैसे भुगतान करेंगे, यह भी बड़ी समस्या है।
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विवाह घरों के साथ ही बैंड संचालकों को भी दिक्कत होने वाली है। बैंड संचालक रोशन बताते है कि बैंड वालों के लिए लेबर का भुगतान एडवांस करना होता है। कई कलाकार ऐसे होते हैं, जिन्हें सालाना के हिसाब से भुगतान करना होता है। ऐसे में मई और जून माह में सहालग न होेने से खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है। बग्घी और घोड़े आदि का खर्चा भी मुश्किल होगा।
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रेडीमेड वस्त्र के दुकानदार भी सहालग न होने से परेशान
दुल्हा और दुल्हन सजाने वाले ब्यूटी पार्लर और रेडीमेड वस्त्र के दुकानदार भी सहालग न होने से परेशान हैं। उनका कहना है कि उन्होंने सहालग के हिसाब से नई नई डिजाइन और वैराइटी के कोट, शेरवानी आदि मंगवाए थे। अब दो महीने तक कैसे खर्च निकलेगा। रेडीमेड वस्त्र विक्रेता सचिन जायसवाल ने बताया कि डिजाइन बदलती रहती है। यदि दो माह बाद डिजाइन बदल गई है तो उनके सामान का नुकसान हो सकता है। गुड्डू कैटर्स का कहना है कि उनके साथ बुकिंग के लिए करीब 20 से 25 लोगों का समूह होता है। मई और जून जैसे महीने बिना सहालग के गुजरने वाले हैं। हम लोगों का इसी सहालग के मौसम से साल भर का खर्च चलता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। सूर्य शुक्र राशि में चले गए हैं। मई और जून में एक भी शुभ मुहूर्त नहीं बन पा रहे हैं। अब जुलाई में शहनाई बजेगी। जिन घरों में जुलाई माह में शादी है वह तैयारी में जुट गए हैं। दो माह तक सहालग न होने के कारण विवाह समारोह से जुड़े लोगों के सामने रोजी-रोटी की दिक्कत होगी।
पंडित शरदेंदु पांडेय बताते हैं कि इस वर्ष 2024 में 25 अप्रैल से 29 जून तक शुक्र ग्रह के अस्त होने के कारण मई और जून महीने में कोई विवाह मुहूर्त नहीं हैं। इसके बाद नौ से 15 जुलाई तक विवाह के 5-6 मुहूर्त रहेंगे। उसके बाद 16 जुलाई से 11 नवंबर तक चातुर्मास होने के कारण कोई विवाह मुहूर्त नहीं है। 12 नवंबर से 15 दिसंबर तक 15-16 शुभ विवाह मुहूर्त बनेंगे।
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नीरज पटवा, अमरीष आदि का कहना है कि वह विवाह से जुड़े काम करते हैं, उन्होंने विवाह घर सजा रखे हैं। हर साल मई और जून माह में खूब सहालग होते रहते हैं, लेकिन इस बार मई और जून माह में एक भी सहालग नहीं है। ऐसे में लागत और किराया निकालना मुश्किल होगा। काम में लगे कर्मचारियों को कैसे भुगतान करेंगे, यह भी बड़ी समस्या है।
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विवाह घरों के साथ ही बैंड संचालकों को भी दिक्कत होने वाली है। बैंड संचालक रोशन बताते है कि बैंड वालों के लिए लेबर का भुगतान एडवांस करना होता है। कई कलाकार ऐसे होते हैं, जिन्हें सालाना के हिसाब से भुगतान करना होता है। ऐसे में मई और जून माह में सहालग न होेने से खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है। बग्घी और घोड़े आदि का खर्चा भी मुश्किल होगा।
रेडीमेड वस्त्र के दुकानदार भी सहालग न होने से परेशान
दुल्हा और दुल्हन सजाने वाले ब्यूटी पार्लर और रेडीमेड वस्त्र के दुकानदार भी सहालग न होने से परेशान हैं। उनका कहना है कि उन्होंने सहालग के हिसाब से नई नई डिजाइन और वैराइटी के कोट, शेरवानी आदि मंगवाए थे। अब दो महीने तक कैसे खर्च निकलेगा। रेडीमेड वस्त्र विक्रेता सचिन जायसवाल ने बताया कि डिजाइन बदलती रहती है। यदि दो माह बाद डिजाइन बदल गई है तो उनके सामान का नुकसान हो सकता है। गुड्डू कैटर्स का कहना है कि उनके साथ बुकिंग के लिए करीब 20 से 25 लोगों का समूह होता है। मई और जून जैसे महीने बिना सहालग के गुजरने वाले हैं। हम लोगों का इसी सहालग के मौसम से साल भर का खर्च चलता है।