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Maharajganj News: रजिस्टर्ड एग्रीमेंट नहीं... राजस्व का नुकसान, स्वयं को मुसीबत
Mon, 26 Aug 2024 01:14 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 26 Aug 2024 01:14 PM IST
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महराजगंज। शहर में हजारों दुकानें संचालित हैं, लेकिन कई मकान मालिक दुकान को किराए पर देने से पहले रजिस्टर्ड एग्रीमेंट नहीं कराते हैं। इससे किराएदारी को लेकर विवाद भी होता है। पिछले साल 306 रजिस्टर्ड एग्रीमेंट हुए थे। इस वर्ष अब तक 136 हुए हैं।
आवासीय, व्यावसायिक भवनों व दुकानों का किरायेदारी एग्रीमेंट रजिस्टर्ड न होने से सालाना लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान स्टांप व निबंधन विभाग को उठाना पड़ रहा है। निबंधन विभाग के अफसरों का कहना है कि दुकान, मकान किराये पर लेते समय बड़ी संख्या में लोग स्टांप व निबंधन विभाग से संपर्क नहीं करते हैं। सूत्रों की माने तो बिजली विभाग किरायेदार को अनरजिस्टर्ड एग्रीमेंट व शपथपत्र के आधार पर नया कनेक्शन जारी कर देता हैं। इसमें नियम कानून का पेंच फंसाकर काम करा लिया जाता है।
शहर के दुकान की किराएदारी को लेकर काफी कीचकीच हुई थी। रजिस्टर्ड एग्रीमेंट नहीं हुआ था। इससे मकान मालिक को परेशानी झेलनी पड़ी। ऐसे मामले अक्सर सामने आते रहते हैं। ज्यादातर स्थानों पर सामंजस्य होने के कारण कोई परेशानी नहीं होती है, लेकिन जहां सामंजस्य नहीं होता है वहां के लिए रजिस्टर्ड एग्रीमेंट काफी मददगार होता है।
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सब कुछ पारदर्शी होने के कारण दोनों पक्षों को समस्या नहीं होती है। कुछ मामले तो कचहरी तक पहुंच जाते हैं। जानकारों का कहना है कि रजिस्टर्ड एग्रीमेंट जरूरी होता है, इससे स्वयं को समस्या नहीं होती है।
औसत किराए पर चार फीसदी तक स्टांप शुल्क
नियमानुसार एक से पांच साल तक की किराएदारी होने पर औसतन तीन साल के किराए पर पांच से 10 साल तक किराएदारी होने पर भी चार साल के किराए पर, 10 से 20 साल तक की किराएदारी पर औसतन पांच साल के किराए पर, 20 से 30 साल तक किरायेदारी होने पर छह साल के औसतन किराये पर चार फीसदी स्टांप शुल्क जमा करना पड़ता है।
अपंजीकृत किरायेदारी एग्रीमेंट से चला रहे काम
किराएदारी एग्रीमेंट को रजिस्टर्ड होने से आय बढ़ने की उम्मीद है। रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के बिना कनेक्शन लेने वालों के नाम-पते की जानकारी जुटाकर तय दर से स्टांप शुल्क की वसूली हो सकती है। अधिकारियों की माने तो 75 फीसदी से ज्यादा किराएदार अपंजीकृत किराएदारी एग्रीमेंट से काम चला रहे हैं। किराए पर दुकान, मकान लेने के बाद रजिस्टर्ड किराएदारी अनुबंध न कराने वालों से निर्धारित शुल्क के साथ चार फीसदी की दर से स्टांप शुल्क की राशि भी ली जाएगी।
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आवासीय, व्यावसायिक भवनों व दुकानों का किरायेदारी एग्रीमेंट रजिस्टर्ड न होने से सालाना लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान स्टांप व निबंधन विभाग को उठाना पड़ रहा है। निबंधन विभाग के अफसरों का कहना है कि दुकान, मकान किराये पर लेते समय बड़ी संख्या में लोग स्टांप व निबंधन विभाग से संपर्क नहीं करते हैं। सूत्रों की माने तो बिजली विभाग किरायेदार को अनरजिस्टर्ड एग्रीमेंट व शपथपत्र के आधार पर नया कनेक्शन जारी कर देता हैं। इसमें नियम कानून का पेंच फंसाकर काम करा लिया जाता है।
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शहर के दुकान की किराएदारी को लेकर काफी कीचकीच हुई थी। रजिस्टर्ड एग्रीमेंट नहीं हुआ था। इससे मकान मालिक को परेशानी झेलनी पड़ी। ऐसे मामले अक्सर सामने आते रहते हैं। ज्यादातर स्थानों पर सामंजस्य होने के कारण कोई परेशानी नहीं होती है, लेकिन जहां सामंजस्य नहीं होता है वहां के लिए रजिस्टर्ड एग्रीमेंट काफी मददगार होता है।
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सब कुछ पारदर्शी होने के कारण दोनों पक्षों को समस्या नहीं होती है। कुछ मामले तो कचहरी तक पहुंच जाते हैं। जानकारों का कहना है कि रजिस्टर्ड एग्रीमेंट जरूरी होता है, इससे स्वयं को समस्या नहीं होती है।
औसत किराए पर चार फीसदी तक स्टांप शुल्क
नियमानुसार एक से पांच साल तक की किराएदारी होने पर औसतन तीन साल के किराए पर पांच से 10 साल तक किराएदारी होने पर भी चार साल के किराए पर, 10 से 20 साल तक की किराएदारी पर औसतन पांच साल के किराए पर, 20 से 30 साल तक किरायेदारी होने पर छह साल के औसतन किराये पर चार फीसदी स्टांप शुल्क जमा करना पड़ता है।
अपंजीकृत किरायेदारी एग्रीमेंट से चला रहे काम
किराएदारी एग्रीमेंट को रजिस्टर्ड होने से आय बढ़ने की उम्मीद है। रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के बिना कनेक्शन लेने वालों के नाम-पते की जानकारी जुटाकर तय दर से स्टांप शुल्क की वसूली हो सकती है। अधिकारियों की माने तो 75 फीसदी से ज्यादा किराएदार अपंजीकृत किराएदारी एग्रीमेंट से काम चला रहे हैं। किराए पर दुकान, मकान लेने के बाद रजिस्टर्ड किराएदारी अनुबंध न कराने वालों से निर्धारित शुल्क के साथ चार फीसदी की दर से स्टांप शुल्क की राशि भी ली जाएगी।