{"_id":"67f032a9cc37aac14a0955b9","slug":"mutawallis-name-registered-on-five-acres-of-land-millions-of-rupees-being-distributed-maharajganj-news-c-206-1-go11002-146169-2025-04-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharajganj News: पांच एकड़ भूमि पर दर्ज हुआ मुतवल्ली का नाम, लाखों का हो रहा वारा-न्याराआ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maharajganj News: पांच एकड़ भूमि पर दर्ज हुआ मुतवल्ली का नाम, लाखों का हो रहा वारा-न्याराआ
Sat, 05 Apr 2025 12:57 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sat, 05 Apr 2025 12:57 AM IST
विज्ञापन
महराजगंज। वक्फ संशोधन विधेयक का मामला गर्म है। इसकी आंच जनपद के मुड़िला तक महसूस की जा रही है। सदर तहसील के खुटहा-मुड़िला के पास लगभग पांच एकड़ से अधिक भूभाग कब्रिस्तान से 500 मीटर तो स्थानीय मस्जिद से 200 मीटर की दूरी पर अवस्थित है।
इस जमीन को लोग वक्फ की जमीन बताते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि अभिलेखों में मुतवल्ली व उनके परिवार के नाम दर्ज हो चुका है, जिसका लाभ पिछले 20 वर्ष से मुतवल्ली का परिवार ले रहा है। इससे हर साल लाखों का वारा-न्यारा किया जा रहा है। खुटहां निवासी अधिवक्ता अमीन अंसारी ने इस गड़बड़झाले पर वाद भी दाखिल कर रखा है, लेकिन यथास्थिति निर्णय न होने के कारण बनी हुई है। वक्फ बोर्ड की जमीन पर बात करें तो जनपद में 444 संपत्तियां विभागीय रिकाॅर्ड में हैं, जिसमें मुड़िला की जमीन भी शामिल है। यह जमीन 20 वर्ष पूर्व चकबंदी विभाग की कृपा से व्यक्ति विशेष के नाम चढ़ चुकी है।
वक्फ की जमीन पर प्रशासन का सीमित अधिकार होने के कारण विभागीय कार्रवाई की बात करें तो सिर्फ सुन्नी सेंट्रल बोर्ड को अल्पसंख्यक कल्याण विभाग व जिला प्रशासन गड़बड़झाले की शिकायती पत्र भेजने का कार्य ही कर सके। अब संशोधन विधेयक पास होने व प्रशासनिक अधिकार बढ़ने से ऐसी जमीनों पर हुई धोखाधड़ी का राजफाश व कार्रवाई की जा सकेगी।
विज्ञापन
वक्फ के नाम नहीं है कोई भूमि : खुटहां-मुड़िला के लेखपाल राम उजागिर बताते हैं कि जिस जमीन को लोग वक्फ की जमीन कहते हैं वह वक्फ के नाम नहीं बल्कि एक व्यक्ति व उसके परिजनों के नाम दर्ज है। अभिलेखों में बदलाव लगभग 25 वर्ष पहले संरक्षक व सचिव के हस्ताक्षर से किया गया था। अलग-अलग गाटा संख्या में इस पूरी जमीन को बांटा गया। मौजूदा समय में इसपर दुकान व खेती होती है।
विज्ञापन
इस जमीन को लोग वक्फ की जमीन बताते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि अभिलेखों में मुतवल्ली व उनके परिवार के नाम दर्ज हो चुका है, जिसका लाभ पिछले 20 वर्ष से मुतवल्ली का परिवार ले रहा है। इससे हर साल लाखों का वारा-न्यारा किया जा रहा है। खुटहां निवासी अधिवक्ता अमीन अंसारी ने इस गड़बड़झाले पर वाद भी दाखिल कर रखा है, लेकिन यथास्थिति निर्णय न होने के कारण बनी हुई है। वक्फ बोर्ड की जमीन पर बात करें तो जनपद में 444 संपत्तियां विभागीय रिकाॅर्ड में हैं, जिसमें मुड़िला की जमीन भी शामिल है। यह जमीन 20 वर्ष पूर्व चकबंदी विभाग की कृपा से व्यक्ति विशेष के नाम चढ़ चुकी है।
विज्ञापन
वक्फ की जमीन पर प्रशासन का सीमित अधिकार होने के कारण विभागीय कार्रवाई की बात करें तो सिर्फ सुन्नी सेंट्रल बोर्ड को अल्पसंख्यक कल्याण विभाग व जिला प्रशासन गड़बड़झाले की शिकायती पत्र भेजने का कार्य ही कर सके। अब संशोधन विधेयक पास होने व प्रशासनिक अधिकार बढ़ने से ऐसी जमीनों पर हुई धोखाधड़ी का राजफाश व कार्रवाई की जा सकेगी।
विज्ञापन
वक्फ के नाम नहीं है कोई भूमि : खुटहां-मुड़िला के लेखपाल राम उजागिर बताते हैं कि जिस जमीन को लोग वक्फ की जमीन कहते हैं वह वक्फ के नाम नहीं बल्कि एक व्यक्ति व उसके परिजनों के नाम दर्ज है। अभिलेखों में बदलाव लगभग 25 वर्ष पहले संरक्षक व सचिव के हस्ताक्षर से किया गया था। अलग-अलग गाटा संख्या में इस पूरी जमीन को बांटा गया। मौजूदा समय में इसपर दुकान व खेती होती है।