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Maharajganj News: मेडिकल स्टोर तो कहीं अवैध अस्पताल में मुन्ना भाई कर रहे इलाज

Wed, 11 Feb 2026 11:13 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 11 Feb 2026 11:13 PM IST
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Munna Bhai is getting treatment at some medical stores and some illegal hospitals.
महराजगंज। जिले में अवैध अस्पताल ही नहीं मेडिकल स्टोर पर भी मुन्ना भाई इलाज कर रहे हैं। डॉक्टर की जगह अस्पताल में काम करने वाले कर्मी मरीज को मौत के मुंह में डाल रहे हैं। मेडिकल स्टोर संचालक भी खुद डॉक्टर बन बैठे हैं। जबकि, उनका काम सिर्फ दवा की बिक्री का है। विभाग की कार्रवाई के बाद भी मनमानी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
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बीते दिन कटहरी बाजार शीतलापुर गांव की सुभावती (55) की मेडिकल स्टोर पर इंजेक्शन लगने के बाद मौत हो गई थी। यहां गांव के चौराहे पर मेडिकल स्टोर संचालित है। गांव के लोगों को छोटी मोटी बीमारी का इलाज इन्ही मेडिकल स्टोर पर ही हो जाता है। कटहरी के जितेंद्र कहते हैं की दवा के बारे में जानकारी रखने वाले अपने आप को किसी से डाॅक्टर से कम नहीं समझते हैं। क्षेत्र में लोग इनको डाॅक्टर साहब ही कह कर बुलाते हैं। गांव के बहादुर यादव ने बताया कि गांव से पीएचसी जहदा करीब तीन किमी दूर है। सिसवा सीएचसी सात किमी तो निचलौल सीएचसी 12 किमी की दूरी पर है। कुछ खास दूरी नहीं है। सरकारी अस्पतालों में दवा मुफ्त मिलने के साथ ही योग्य डॉक्टर इलाज करते हैं, लेकिन गांव में गली चौराहों पर काम करने वाले झोला छाप लोगोंं को गुमराह करते हैं। उनको सरकारी अस्पताल में बेहतर सुविधा नहीं होने की बात कर जाल में फंसा लेते हैं। बीमारी कोई भी हो ग्लूकोस चढ़ाना तत्काल शुरू कर देते हैं। गांव के सीधे साधे लोग समझ नहीं पाते हैं। अंत में उनको अपनी जान गंवानी पड़ती है। सुभावती के मौत के बाद से ही मेडिकल स्टोर बंद है। संचालक का पता नहीं है। मृतका के घर वालों की ओर से कोठीभार थाने में तहरीर देने के बाद पुलिस की ओर से आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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क्षेत्र में यह कोई पहली घटना नहीं है। निचलौल कस्बे में भी गर्भपात कराने के दौरान युवती की मौत हो गई थी। इस प्रकरण में भी कार्रवाई हुई थी। यह मामला करीब एक माह पहले यह घटना हुई थी। झोला छाप का जाल जिले में हर जगह फैला हुआ है, लेकिन इनपर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। तमाम बचने के लिए मेडिकल स्टोर का लाइसेंस ले रखे हैं। इसी की आड़ में मरीजों की भर्ती कर इलाज करते हैं।
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कई अस्पताल मुन्ना भाई जुुगाड़ तंत्र से चला रहे हैं। अस्पताल में डॉक्टर हैं ही नहीं और उनके नाम पर रजिस्ट्रेशन है। ये डॉक्टर किसी और शहर में प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं और अपने नाम से रजिस्ट्रेशन के एवज में हर माह लाखों रुपये मुन्ना भाई से लेते हैं। इस बात का खुलासा भी हो चुका है। इसके बाद भी मुन्ना भाई और एमबीबीएस डॉक्टरों का गठजोड़ फल-फूल रहा है। शहर के अलावा परतावल, पनियरा, निचलौल, सिसवा, ठूठीबारी, बरगदवा, घुघली इलाके में 30 से 35 फीसदी अस्पताल इसी तरह से चलाए जाने की चर्चा है।

सूत्र बताते हैं कि महराजगंज शहर में एक अस्पताल है, वहां भी डॉक्टर नहीं दिखते हैं। विभाग की मेहरबानी से संचालित हो रहा है। खास बात यह है कि डॉक्टर जिस अस्पताल को अधिकृत करते हैं, वह वहां खुद न रहकर अन्य शहर में रहते हैं। मरीजों का इलाज भगवान भरोसे हो रहा है।
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