{"_id":"5be87dabbdec2269bd06af9c","slug":"mahaprav-chhath-started-with-cylindrical-food","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहाय खाय के साथ महापर्व छठ शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नहाय खाय के साथ महापर्व छठ शुरू
महराजगंज (ब्यूरो)
Updated Mon, 12 Nov 2018 12:36 AM IST
विज्ञापन
नहाय खाय के साथ महापर्व छठ शुरू
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महराजगंज। सूर्योपासना का पर्व छठ कार्तिक शुक्ल पक्ष चतुर्थी को नहाय खाय के साथ ही शुरू हो गया। घरों से लेकर बाजार और घाटों तक चहल-पहल बढ़ गई। फल व पूजन सामग्री की दुकानें सज गई हैं। श्रद्धालु जरूरी सामानों की खरीदारी में जुटे रहे। व्रती महिलाएं घाट पर वेदिका बनाने और पूजन सामग्री की व्यवस्था के साथ ही साथ साफ़-सफाई में जुटी रहीं।
शास्त्री सुशील चंद उपाध्याय ने बताया कि भगवान सूर्य की उपासना का पर्व छठ सोमवार को पंचमी के दिन खरना है। आज महिलाएं आंशिक उपवास रखेंगी। दिन में व्रत रखने के उपरांत शाम को स्वच्छ स्थान पर चूल्हे बनाकर अक्षत, धूप, दीप व सिंदूर से पूजा करेंगी। तत्पश्चात प्रसाद के लिए रखे आटे से रसियाव-रोटी बनाएंगी। उसके बाद चौक में ही खरना करेंगी। तीसरे दिन व्रत की समाप्ति पर इसी रोटी को खाकर व्रत तोड़ेंगी। खरना के पूर्व हथेली के आकार की बनी हुई तस्तरी में धूप देने के बाद थाली में परोसे सामानों में से थोड़ा-थोड़ा लेकर डालेंगी।
इसे अग्नि जिमाना कहते हैं। उसके बाद अग्रासन या गऊ ग्रास निकालने के बाद ही महिलाएं भोजन करेंगी। खरना करने के बाद बचा भोजन परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद स्वरूप बाटेंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
शास्त्री सुशील चंद उपाध्याय ने बताया कि भगवान सूर्य की उपासना का पर्व छठ सोमवार को पंचमी के दिन खरना है। आज महिलाएं आंशिक उपवास रखेंगी। दिन में व्रत रखने के उपरांत शाम को स्वच्छ स्थान पर चूल्हे बनाकर अक्षत, धूप, दीप व सिंदूर से पूजा करेंगी। तत्पश्चात प्रसाद के लिए रखे आटे से रसियाव-रोटी बनाएंगी। उसके बाद चौक में ही खरना करेंगी। तीसरे दिन व्रत की समाप्ति पर इसी रोटी को खाकर व्रत तोड़ेंगी। खरना के पूर्व हथेली के आकार की बनी हुई तस्तरी में धूप देने के बाद थाली में परोसे सामानों में से थोड़ा-थोड़ा लेकर डालेंगी।
विज्ञापन
इसे अग्नि जिमाना कहते हैं। उसके बाद अग्रासन या गऊ ग्रास निकालने के बाद ही महिलाएं भोजन करेंगी। खरना करने के बाद बचा भोजन परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद स्वरूप बाटेंगी।
विज्ञापन