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पर्यटकों के लिए खुला लुम्बिनी का मायादेवी मंदिर
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पर्यटकों के लिए खुला लुंबिनी का मायादेवी मंदिर
सोनौली (महराजगंज)। कोरोना संक्रमण के कारण करीब साढ़े तीन महीने से बंद सीमावर्ती क्षेत्र का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल लुंबिनी स्थित मायादेवी मंदिर बृहस्पतिवार से पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। मंदिर के खुलते ही लुंबिनी के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर पोखरेल अपनी पत्नी के साथ दर्शनों के लिए पहुंचे। मंदिर खुलने के साथ ही घरेलू पर्यटकों की चहल-पहल भी बढ़ गई है।
बृहस्पतिवार की दोपहर तक 500 से अधिक पर्यटकों ने मंदिर का दर्शन किया। पर्यटकों को स्वास्थ्य सुरक्षा उपाय अपनाकर मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई है। दर्शकों को डेढ़ मीटर की दूरी पर खड़ा किया जा रहा है और उन्हें अंदर जाने के लिए मास्क अनिवार्य है। पर्यटक मंदिर, अशोक स्तंभ, पुष्करणी तालाब, स्तूप के खंडहर और प्राचीन कुएं को देखे। 29 अप्रैल को कोरोना की दूसरी लहर फैलने के बाद मंदिर को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। जबकि इससे पहले कोरोना वायरस संक्रमण की पहली लहर के चलते मंदिर को आठ महीने के लिए बंद कर दिया गया था। लुंबिनी विकाश निधि सचिव सानुराजा शाक्य ने बताया कि स्वास्थ्य मानकों के पालन करते हुए मंदिर खोला गया है।
घरेलू और विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री प्रतिवर्ष लुंबिनी आते हैं। भारत -नेपाल अवध मैत्री समाज के अध्यक्ष अजय गुप्ता ने बताया कि देश में संक्रमण कम हुआ है। सरकार ने प्रसिद्ध धर्म स्थलों विद्यालय को खोल कर अच्छा संकेत दे रही है। ठप पड़े पर्यटन, स्कूल, होटल उद्योग को संजीवनी मिली है।
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सोनौली (महराजगंज)। कोरोना संक्रमण के कारण करीब साढ़े तीन महीने से बंद सीमावर्ती क्षेत्र का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल लुंबिनी स्थित मायादेवी मंदिर बृहस्पतिवार से पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। मंदिर के खुलते ही लुंबिनी के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर पोखरेल अपनी पत्नी के साथ दर्शनों के लिए पहुंचे। मंदिर खुलने के साथ ही घरेलू पर्यटकों की चहल-पहल भी बढ़ गई है।
बृहस्पतिवार की दोपहर तक 500 से अधिक पर्यटकों ने मंदिर का दर्शन किया। पर्यटकों को स्वास्थ्य सुरक्षा उपाय अपनाकर मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई है। दर्शकों को डेढ़ मीटर की दूरी पर खड़ा किया जा रहा है और उन्हें अंदर जाने के लिए मास्क अनिवार्य है। पर्यटक मंदिर, अशोक स्तंभ, पुष्करणी तालाब, स्तूप के खंडहर और प्राचीन कुएं को देखे। 29 अप्रैल को कोरोना की दूसरी लहर फैलने के बाद मंदिर को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। जबकि इससे पहले कोरोना वायरस संक्रमण की पहली लहर के चलते मंदिर को आठ महीने के लिए बंद कर दिया गया था। लुंबिनी विकाश निधि सचिव सानुराजा शाक्य ने बताया कि स्वास्थ्य मानकों के पालन करते हुए मंदिर खोला गया है।
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घरेलू और विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री प्रतिवर्ष लुंबिनी आते हैं। भारत -नेपाल अवध मैत्री समाज के अध्यक्ष अजय गुप्ता ने बताया कि देश में संक्रमण कम हुआ है। सरकार ने प्रसिद्ध धर्म स्थलों विद्यालय को खोल कर अच्छा संकेत दे रही है। ठप पड़े पर्यटन, स्कूल, होटल उद्योग को संजीवनी मिली है।
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