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भगवान बुद्ध के बचपन की यादों को तलाशने का काम शुरू

Sat, 12 Nov 2022 06:00 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 12 Nov 2022 06:00 AM IST
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lord buddha
भगवान बुद्ध के बचपन की यादों को तलाशने का कार्य शुरू
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अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों समेत एक टीम ने नेपाल के तिलौराकोट में उत्खनन शुरू किया
पीसी मुखर्जी ने 1899 में प्राचीन तिरौलाकोट पैलेस के पूर्वी द्वार की खोज की थी
महराजगंज। कपिलवस्तु की प्राचीन राजधानी नेपाल के तिलौराकोट क्षेत्र में भगवान बुद्ध के बचपन की खोज के लिए खुदाई शुरू कर दी। यूनेस्को जापानी फंड इन ट्रस्ट के सहयोग से पुरातत्व विभाग, ब्रिटेन के डरहम विश्वविद्यालय, लुंबिनी विकास कोष के विशेषज्ञों और पुरातत्वविदों ने नवंबर से तिरौलाकोट क्षेत्र में खुदाई शुरू कर दी।
पीसी मुखर्जी ने 1899 में प्राचीन तिरौलाकोट पैलेस के पूर्वी द्वार की खोज की थी। मुखर्जी के अनुसार प्राचीन सुरक्षा दीवार के चारों ओर एक नहर (कीचड़) है और बाहर की तरफ नदियां जैसी संरचनाएं हैं इसलिए वैज्ञानिक रूप से क्षेत्र का पता लगाने के लिए खुदाई शुरू कर दी गई है।
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प्रोफेसर डॉ. रविन ने बताया कि खुदाई से मिले सबूतों की जांच आधुनिक तकनीक से की जाएगी। 2014 के बाद से, यूनेस्को जापान का ट्रस्ट इन ट्रस्ट विभिन्न वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग करके तिलौराकोट और लुंबिनी में पुरातत्व अध्ययन कर रहा है। लुंबिनी विकास कोष के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी ज्ञानिन राय को कहा कि उत्खनन से और सबूत मिलेंगे। तिमलौराकोट को विश्व विरासत सूची में सूचीबद्ध करने की पहल हो रही है।
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उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों समेत एक टीम ने वैज्ञानिक उत्खनन शुरू कर दी है। लुंबिनी विकास कोष की पुरातत्व शाखा प्रमुख हिमाल उप्रेती ने कहा कि प्राचीन सुरक्षा दीवार के चारों ओर नहर और पूर्वी द्वार के बाहर संरचना क्षेत्र की खुदाई प्राचीन काल में एक नदी सेल की उपस्थिति के कारण की गई थी।

उन्होंने कहा कि पिछले साल खुदाई कर ढके गए महल क्षेत्र के खंडहरों की फिर से खुदाई की जाएगी और शेष क्षेत्रों का पता लगाया जाएगा। पूर्वी किले के अंदर और दीवार के बाहर खुदाई में मिली ईंटों के अलावा मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े, मिट्टी की मूर्तियों, सिक्कों, कोयले, पौधों के अवशेषों के आकार का वैज्ञानिक शोध कर अवधि (वर्षों की अवधि) निर्धारित की जाएगी।
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