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मौसम बदलने से तेज बुखार, निमोनिया की चपेट में आ रहे मासूम

Fri, 21 Oct 2022 12:25 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 21 Oct 2022 12:25 AM IST
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High fever due to change of weather, innocent people in the grip of pneumonia
मौसम बदलने से तेज बुखार, निमोनिया की चपेट में आ रहे मासूम
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महराजगंज। मौसम में बदलाव के कारण निमोनिया एवं तेज बुखार की चपेट में मासूम आ रहे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी ही नहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी तेज बुखार एवं निमोनिया से पीडित बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इसके अलावा शहर के निजी अस्पतालों में भी निमोनिया, तेज बुखार के मरीज बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। सीएचसी पर पांच से छह की संख्या में तो जिला अस्पताल की ओपीडी में 15 से 20 मासूम इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल की ओपीडी में 800 से अधिक मरीज इलाज के लिए आते हैं। इसमें तेज बुखार एवं निमोनिया से पीडित बच्चे भी आ रहे हैं। जिला अस्पताल में निमोनिया पीड़ित दो बच्चे भर्ती हुए हैं। जेई एईएस वार्ड 15 बेड का है जिसमें 30 मरीज भर्ती हैं। निमोनिया के दो, तेज बुखार के नौ बच्चे भर्ती हैं। इसके अलावा झटका, उल्टी दस्त आदि के मरीजों का उपचार हो रहा है। मरीजों की संख्या बढ़ने से एक बेड पर दो बच्चे भर्ती किए गए हैं।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी राय ने बताया कि बीमारी से बचाव के प्रति बच्चों का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि खांसी, सांस तेज चलना, पसली चलना बच्चे में ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। मौसम में बदलाव की वजह से बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। बच्चे निमोनिया की चपेट में आ रहे हैं। इसके अलावा तेज बुखार, शरीर में अकड़न की समस्या हो रही है। मुंह में छाले और हाथ-पैर में दाने निकलने से पीड़ित बच्चे भी अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। जिन बच्चों के मुंह में छाले और हाथ-पैर में दाने निकल रहे हों, उन्हें स्कूल नहीं भेजना चाहिए। यह संक्रामक बीमारी है। एक से दूसरे बच्चों में फैल सकती है। बच्चों को घर में चार से पांच दिन आइसोलेट करना चाहिए। चार से पांच दिन में बीमारी ठीक हो रही है।
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बचाव के लिए इन बिन्दुओं पर दें ध्यान -
पानी पर्याप्त मात्रा में पिलाएं। घर पर बना पौष्टिक भोजन ही खिलाएं।
समस्या बढ़ने पर चिकित्सक से परामर्श जरूर लें। बच्चों को ठंडा पानी न पीने दें।
एसी का इस्तेमाल कम से कम करें।
बच्चों को पूरी बाजू के कपड़े पहनाएं।
मच्छरदानी जरूर लगाएं, जिससे मच्छर न काटने पाएं।
अस्पताल में इलाज के बेहतर इंतजाम हैं। मौसम में बदलाव का असर बच्चों में दिख रहा है। चिकित्सकों की टीम वार्डों में भर्ती बच्चों की समय समय पर जांच कर इलाज करने में जुटी है।
डॉ. एके द्विवेदी, प्रभारी, सीएमएस
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