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Maharajganj News: गर्मी से 40% तक बढ़ी बिजली की मांग, ओवरलोडिंग से फुंक गए 300 ट्रांसफॉर्मर
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ट्रांसफार्मर की मरम्मत करते कर्मी।
जिला मुख्यालय में 24 घंटे में 25 से 30 बार हो रही बिजली ट्रिपिंग
बैकुंठपुर की 265 एमवीए क्षमता, 300 एमवीए है लोड
जनपद में 300 मेगावाट के करीब मांग की सापेक्ष 260 मेगावाट की हो रही आपूर्ति
महराजगंज। धूप की तपिश और उमस बढ़ने से जनपद में बिजली की मांग 40 प्रतिशत तक बढ़ गई है। पूरे जिले में इन दिनों 260 मेगा वाट की आपूर्ति हो रही है जबकि मांग 300 मेगावाट के करीब है। मांग की तुलना में कम आपूर्ति होने से बिजली केंद्र पर लोड बढ़ जा रहा है। इससे बार-बार बिजली गुल होने से लोगों को परेशानी हो रही है। ओवरलोडिंग की वजह से 300 से अधिक ट्रांसफार्मर फुंक चुके हैं।
जानकारी के अनुसार, बिजली की मांग बढ़ने से अधिकतर बिजलीघर ओवरलोड की समस्या से जूझ रहे हैं। मुख्यालय के बैकुंठपुर उपकेंद्र की क्षमता 265 एमवीए (मेगावोल्ट-एंपीयर) की है लेकिन इस पर 300 एमवीए का लोड है। ऐसी ही स्थिति में जनपद के अन्य बिजलीघरों की भी होने के चलते प्रचंड गर्मी के बीच हाहाकार की स्थिति है।
लू की स्थिति को देखते हुए शासन स्तर से निर्बाध बिजली आपूर्ति के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद जिला मुख्यालय की स्थिति यह है कि 24 घंटे में 25 से 30 बार बिजली ट्रिप हो रही है। कभी यह ट्रिपिंग पांच मिनट की होती तो कभी अंतराल एक घंटे तक भी खिंच जाता है। मार्च तक जनपद में करीब 190 मेगावाट बिजली की मांग थी। तापमान बढ़ने के साथ-साथ मांग में वृद्धि हुई है।
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नगर पालिका परिषद महराजगंज के शास्त्रीनगर निवासी गोविंद वर्मा ने बताया कि मुख्यालय की बिजली हर घंटे पांच से 10 मिनट के लिए कट रही है। शनिवार की रात 11:30 बजे से 1:30 बजे तक गुल रही। इस दो घंटे की अघोषित कटौती के चलते लोगों की नींद उचटी तो दोबारा नींद ही नहीं आई। इसी वार्ड के वीरेंद्र गुप्ता ने बताया कि हर आधे या एक घंटे पर आती-जाती बिजली के प्रभाव से कूलर फ्रिज जैसे उपकरण खराब हो रहे हैं और एसी जैसे कूलिंग गैजेट्स बेमतलब साबित हो रहे हैं।
कब बिजली कट जाएगी पता ही नहीं
बिजली निगम का दावा है कि जिला मुख्यालय को 24 घंटे, तहसील मुख्यालय को 21.30 घंटे व ग्रामीण क्षेत्र को 18 घंटे सप्लाई दी जा रही है। लेकिन लोगों के मुताबिक यह दावा मुख्यालय पर ही खोखला साबित हो रहा है। मुख्यालय की ट्रिपिंग कटौती ही दो से तीन घंटे हो रही है। तहसील मुख्यालय की बात करें तो 9 घंटे दिन व इतने ही घंटे रात में बिजली मिल रही है। ग्रामीण क्षेत्र में कब बिजली आएगी और कब जाएगी यह कोई नहीं बता सकता।
कंट्रोल रूम के नाम पर महज खानापूर्ति
बिजली निगम ने तत्काल समस्या दुरुस्त कराने के मुख्यालय सहित निचलौल, नौतनवां व फरेंदा के लिए टोल फ्री नंबर व कंट्रोल रूम नंबर तो जारी किया गया है लेकिन किसी पर भी बात करने से समस्या का समाधान संभव नहीं है। 1912 पर फोन करने पर पहले तो विकल्प चयन में ही तीन से 5 मिनट बीत जाते हैं। इसे पूरा करने के बाद एक कंप्यूटरीकृत आवाज यह बताकर कि आपका नंबर पंजीकृत नहीं काल समाप्त कर देता है। इसके अलावा 8115067843 एवं 7380957450 पर संपर्क साधने पर घंटी तो पूरी बजती, लेकिन फोन रिसीव ही नहीं होता। मुख्यालय निवासी पिंटू ने बताया कि उमस भरी गर्मी में कटौती की जानकारी प्राप्त करने का प्रत्येक प्रयास निर्रथक साबित होता है। कर्मचारी व अधिकारी फोन ही नहीं उठाते, कंट्रोल रूप के नंबर पर सिर्फ घंटी ही बजती है किसी से बात नहीं होती।
ओवरलोडिंग में फुंक गए 300 से अधिक ट्रांसफार्मर
मुख्यालय के बैकुंठपुर में 100 केवीए क्षमता वाले ट्रांसफाॅर्मर की मरम्मत का वर्कशॉप संचालित है। इससे ऊपर की दक्षता वाले ट्रांसफाॅर्मर मरम्मत के लिए गोरखपुर भेजे जाते हैं। वर्कशॉप कर्मियों के मुताबिक मई में अब तक 300 से अधिक ट्रांसफार्मर रिप्लेस हुए जबकि 137 मरम्मत में चल रहे हैं। पहले ट्रांसफाॅर्मर पहुंचने के 24 घंटे के भीतर मरम्मत कर ट्रांसफाॅर्मर भेज दिया जाता था लेकिन अब काम बढ़ने से इसमें तीन दिन तक का समय लग रहा है जबकि 8-8 घंटे के शिफ्ट में पूरे 24 घंटे वर्कशॉप का काम चलता रहता है। ओवरलोडिंग के कारण ट्रांसफाॅर्मर अधिक जल रहे हैं।
बिजली की कटौती ने छिना सुकून
मुख्यालय का दर्जा कहने मात्र के लिए है कि यहां बिजली की आपूर्ति बेहतर है, लेकिन हकीकत यह है कि हर घंटे बिजली के आने व जाने का क्रम बना रहता है। एसी व फ्रिज जैसे उपकरण बेमतलब बनकर रह गए हैं।
-सुधा मिश्रा, रामनगर
तहसील मुख्यालय पर 21 घंटा बिजली देने का दावा है लेकिन नगर निकाय में पांच से छह घंटे किश्तों में बिजली कट रही है। इस वजह से गर्मी के मौसम में उपभोक्ताओं की दुश्वारी बढ़ी है।
-अटल बिहारी सिंह, नगर निकाय नौतनवां
उपभोक्ताओं को बिना सूचना दिए कटौती एक तरह से मनमानी है। बिजली के लगातार आने-जाने के कारण उपकरण खराब हो रहे हैं और इसका जिम्मेदार बिजली निगम है।
-अनुराग त्रिपाठी, नगर निकाय नौतनवां
गांव में बिजली आने अथवा जाने का कोई समय तय नहीं है। आम के समय तो बिजली कभी रहती ही नहीं। देर रात तक बिजली के लिए इंतजार करना पड़ता है। बिजली रहने पर ही लो वोल्टेज की समस्या बनी रहती है।
- सोनू गुप्ता, धानी बाजार
वर्जन
गर्मी की बढ़ोतरी के बीच 30 से 40 फीसदी बिजली की डिमांड जनपद में बढ़ी है। बिजली घरों पर लोड बढ़ने के कारण ट्रिपिंग की समस्या उत्पन्न हो रही है। गैस किल्लत के बीच इंडक्शन का उपयोग व एसी का प्रयोग बढ़ने से यह असंतुलन उत्पन्न हुआ है। प्राप्त होने वाली बिजली के अनुरूप आपूर्ति बेहतर रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
-वाईपी सिंह, अधीक्षण अभियंता विद्युत, महराजगंज
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बैकुंठपुर की 265 एमवीए क्षमता, 300 एमवीए है लोड
जनपद में 300 मेगावाट के करीब मांग की सापेक्ष 260 मेगावाट की हो रही आपूर्ति
महराजगंज। धूप की तपिश और उमस बढ़ने से जनपद में बिजली की मांग 40 प्रतिशत तक बढ़ गई है। पूरे जिले में इन दिनों 260 मेगा वाट की आपूर्ति हो रही है जबकि मांग 300 मेगावाट के करीब है। मांग की तुलना में कम आपूर्ति होने से बिजली केंद्र पर लोड बढ़ जा रहा है। इससे बार-बार बिजली गुल होने से लोगों को परेशानी हो रही है। ओवरलोडिंग की वजह से 300 से अधिक ट्रांसफार्मर फुंक चुके हैं।
जानकारी के अनुसार, बिजली की मांग बढ़ने से अधिकतर बिजलीघर ओवरलोड की समस्या से जूझ रहे हैं। मुख्यालय के बैकुंठपुर उपकेंद्र की क्षमता 265 एमवीए (मेगावोल्ट-एंपीयर) की है लेकिन इस पर 300 एमवीए का लोड है। ऐसी ही स्थिति में जनपद के अन्य बिजलीघरों की भी होने के चलते प्रचंड गर्मी के बीच हाहाकार की स्थिति है।
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लू की स्थिति को देखते हुए शासन स्तर से निर्बाध बिजली आपूर्ति के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद जिला मुख्यालय की स्थिति यह है कि 24 घंटे में 25 से 30 बार बिजली ट्रिप हो रही है। कभी यह ट्रिपिंग पांच मिनट की होती तो कभी अंतराल एक घंटे तक भी खिंच जाता है। मार्च तक जनपद में करीब 190 मेगावाट बिजली की मांग थी। तापमान बढ़ने के साथ-साथ मांग में वृद्धि हुई है।
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नगर पालिका परिषद महराजगंज के शास्त्रीनगर निवासी गोविंद वर्मा ने बताया कि मुख्यालय की बिजली हर घंटे पांच से 10 मिनट के लिए कट रही है। शनिवार की रात 11:30 बजे से 1:30 बजे तक गुल रही। इस दो घंटे की अघोषित कटौती के चलते लोगों की नींद उचटी तो दोबारा नींद ही नहीं आई। इसी वार्ड के वीरेंद्र गुप्ता ने बताया कि हर आधे या एक घंटे पर आती-जाती बिजली के प्रभाव से कूलर फ्रिज जैसे उपकरण खराब हो रहे हैं और एसी जैसे कूलिंग गैजेट्स बेमतलब साबित हो रहे हैं।
कब बिजली कट जाएगी पता ही नहीं
बिजली निगम का दावा है कि जिला मुख्यालय को 24 घंटे, तहसील मुख्यालय को 21.30 घंटे व ग्रामीण क्षेत्र को 18 घंटे सप्लाई दी जा रही है। लेकिन लोगों के मुताबिक यह दावा मुख्यालय पर ही खोखला साबित हो रहा है। मुख्यालय की ट्रिपिंग कटौती ही दो से तीन घंटे हो रही है। तहसील मुख्यालय की बात करें तो 9 घंटे दिन व इतने ही घंटे रात में बिजली मिल रही है। ग्रामीण क्षेत्र में कब बिजली आएगी और कब जाएगी यह कोई नहीं बता सकता।
कंट्रोल रूम के नाम पर महज खानापूर्ति
बिजली निगम ने तत्काल समस्या दुरुस्त कराने के मुख्यालय सहित निचलौल, नौतनवां व फरेंदा के लिए टोल फ्री नंबर व कंट्रोल रूम नंबर तो जारी किया गया है लेकिन किसी पर भी बात करने से समस्या का समाधान संभव नहीं है। 1912 पर फोन करने पर पहले तो विकल्प चयन में ही तीन से 5 मिनट बीत जाते हैं। इसे पूरा करने के बाद एक कंप्यूटरीकृत आवाज यह बताकर कि आपका नंबर पंजीकृत नहीं काल समाप्त कर देता है। इसके अलावा 8115067843 एवं 7380957450 पर संपर्क साधने पर घंटी तो पूरी बजती, लेकिन फोन रिसीव ही नहीं होता। मुख्यालय निवासी पिंटू ने बताया कि उमस भरी गर्मी में कटौती की जानकारी प्राप्त करने का प्रत्येक प्रयास निर्रथक साबित होता है। कर्मचारी व अधिकारी फोन ही नहीं उठाते, कंट्रोल रूप के नंबर पर सिर्फ घंटी ही बजती है किसी से बात नहीं होती।
ओवरलोडिंग में फुंक गए 300 से अधिक ट्रांसफार्मर
मुख्यालय के बैकुंठपुर में 100 केवीए क्षमता वाले ट्रांसफाॅर्मर की मरम्मत का वर्कशॉप संचालित है। इससे ऊपर की दक्षता वाले ट्रांसफाॅर्मर मरम्मत के लिए गोरखपुर भेजे जाते हैं। वर्कशॉप कर्मियों के मुताबिक मई में अब तक 300 से अधिक ट्रांसफार्मर रिप्लेस हुए जबकि 137 मरम्मत में चल रहे हैं। पहले ट्रांसफाॅर्मर पहुंचने के 24 घंटे के भीतर मरम्मत कर ट्रांसफाॅर्मर भेज दिया जाता था लेकिन अब काम बढ़ने से इसमें तीन दिन तक का समय लग रहा है जबकि 8-8 घंटे के शिफ्ट में पूरे 24 घंटे वर्कशॉप का काम चलता रहता है। ओवरलोडिंग के कारण ट्रांसफाॅर्मर अधिक जल रहे हैं।
बिजली की कटौती ने छिना सुकून
मुख्यालय का दर्जा कहने मात्र के लिए है कि यहां बिजली की आपूर्ति बेहतर है, लेकिन हकीकत यह है कि हर घंटे बिजली के आने व जाने का क्रम बना रहता है। एसी व फ्रिज जैसे उपकरण बेमतलब बनकर रह गए हैं।
-सुधा मिश्रा, रामनगर
तहसील मुख्यालय पर 21 घंटा बिजली देने का दावा है लेकिन नगर निकाय में पांच से छह घंटे किश्तों में बिजली कट रही है। इस वजह से गर्मी के मौसम में उपभोक्ताओं की दुश्वारी बढ़ी है।
-अटल बिहारी सिंह, नगर निकाय नौतनवां
उपभोक्ताओं को बिना सूचना दिए कटौती एक तरह से मनमानी है। बिजली के लगातार आने-जाने के कारण उपकरण खराब हो रहे हैं और इसका जिम्मेदार बिजली निगम है।
-अनुराग त्रिपाठी, नगर निकाय नौतनवां
गांव में बिजली आने अथवा जाने का कोई समय तय नहीं है। आम के समय तो बिजली कभी रहती ही नहीं। देर रात तक बिजली के लिए इंतजार करना पड़ता है। बिजली रहने पर ही लो वोल्टेज की समस्या बनी रहती है।
- सोनू गुप्ता, धानी बाजार
वर्जन
गर्मी की बढ़ोतरी के बीच 30 से 40 फीसदी बिजली की डिमांड जनपद में बढ़ी है। बिजली घरों पर लोड बढ़ने के कारण ट्रिपिंग की समस्या उत्पन्न हो रही है। गैस किल्लत के बीच इंडक्शन का उपयोग व एसी का प्रयोग बढ़ने से यह असंतुलन उत्पन्न हुआ है। प्राप्त होने वाली बिजली के अनुरूप आपूर्ति बेहतर रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
-वाईपी सिंह, अधीक्षण अभियंता विद्युत, महराजगंज