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Maharajganj News: सहालग के खानपान में सेहत की फिक्र, बदल रहे मेन्यू
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तले भूने खाद्य नहीं, फ्रूट, सलाद वेज सूप का बढ़ रहा क्रेज
पारंपरिक स्वाद के लिए यूथ कर रहे कैटर्स से डिमांड
महराजगंज। सहालग के खानपान में स्वाद के साथ-साथ सेहत का ध्यान भी रखा जा रहा है। कैटर्स का दावा है कि इसमें यूथ बदलाव चाहते। इसलिए अब पारंपरिक स्वाद व श्री अन्न से तैयार व्यंजनों का क्रेज बढ़ा है।
कैटर्स अमरनाथ बरवां खुर्द ने बताया सहालग में सजावट, बैंड-बाजे और सवारी के बाद मेहमानों की नजरें सबसे ज्यादा शानदार और स्वादिष्ट मेन्यू पर रहती हैं। ऐसे में पारंपरिक और प्रादेशिक व्यंजनों का मेल मेहमानों को नया अनुभव दे रहा है। मक्का व बाजरा मिक्स आटे की रोटी व सरसों का साग इन दिनों लगभग हर मांगलिक कार्यक्रम में लोग बनवा रहे हैं।
महेंद्र कैटर्स शिकारपुर ने बताया कि हर बार की तरह इस बार भी सहालग का मेन्यू मिल रहा है लेकिन पहले की तरह गरिष्ठ व तेल मसाला वाले भोजन की जगह लोग सेहत के अनुकूल खाना पसंद कर रहे हैं। फास्ट फूड में श्री अन्न के आटे से तैयार माइक्रोनी, पास्ता, पोहा मेन्यू में मिल रहा है। लोग इसे पसंद भी कर रहे हैं। पहले इसकी जगह चाट, फुलकी, फिंगर, चाउमिन, बर्गर, मोमो होते थे। अब इनकी मांग कम हो रही है। रामनगर के कैटर्स लालसा ने बताया कि सहालग मेन्यू सिर्फ पारंपरिक भारतीय व्यंजनों तक सीमित नहीं रहा। जिन घरों में शादी है वह सबसे पहले बेहतर कैटर्स खोजते हैं।
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शहरों में लोग प्लेट के अनुसार बुकिंग तय करते लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी लोग संख्या के अनुसार ही लग्न बुक करा रहे हैं। पहले मटर पनीर, छोला के अलावा शाही पनीर की मांग अधिक होती थी। श्री अन्न वेज कबाब पराठा व डोसा का चलन भी तेजी से बढ़ा है।
वर्जन
अधिक तेल, मसाला या तला भुना व मैदा निर्मित खाद्य जिनकी सहालग के मेन्यू में अधिक होते हैं। यह सेहत के लिए नुकसानदायक हैं। यह अच्छी बात है कि युवा मेन्यू परिवर्तित कराकर सेहतमंद खाद्य चुन रहे हैं।
-डाॅ. एके द्विवेदी, सीएमएस, जिला अस्पताल
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पारंपरिक स्वाद के लिए यूथ कर रहे कैटर्स से डिमांड
महराजगंज। सहालग के खानपान में स्वाद के साथ-साथ सेहत का ध्यान भी रखा जा रहा है। कैटर्स का दावा है कि इसमें यूथ बदलाव चाहते। इसलिए अब पारंपरिक स्वाद व श्री अन्न से तैयार व्यंजनों का क्रेज बढ़ा है।
कैटर्स अमरनाथ बरवां खुर्द ने बताया सहालग में सजावट, बैंड-बाजे और सवारी के बाद मेहमानों की नजरें सबसे ज्यादा शानदार और स्वादिष्ट मेन्यू पर रहती हैं। ऐसे में पारंपरिक और प्रादेशिक व्यंजनों का मेल मेहमानों को नया अनुभव दे रहा है। मक्का व बाजरा मिक्स आटे की रोटी व सरसों का साग इन दिनों लगभग हर मांगलिक कार्यक्रम में लोग बनवा रहे हैं।
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महेंद्र कैटर्स शिकारपुर ने बताया कि हर बार की तरह इस बार भी सहालग का मेन्यू मिल रहा है लेकिन पहले की तरह गरिष्ठ व तेल मसाला वाले भोजन की जगह लोग सेहत के अनुकूल खाना पसंद कर रहे हैं। फास्ट फूड में श्री अन्न के आटे से तैयार माइक्रोनी, पास्ता, पोहा मेन्यू में मिल रहा है। लोग इसे पसंद भी कर रहे हैं। पहले इसकी जगह चाट, फुलकी, फिंगर, चाउमिन, बर्गर, मोमो होते थे। अब इनकी मांग कम हो रही है। रामनगर के कैटर्स लालसा ने बताया कि सहालग मेन्यू सिर्फ पारंपरिक भारतीय व्यंजनों तक सीमित नहीं रहा। जिन घरों में शादी है वह सबसे पहले बेहतर कैटर्स खोजते हैं।
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शहरों में लोग प्लेट के अनुसार बुकिंग तय करते लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी लोग संख्या के अनुसार ही लग्न बुक करा रहे हैं। पहले मटर पनीर, छोला के अलावा शाही पनीर की मांग अधिक होती थी। श्री अन्न वेज कबाब पराठा व डोसा का चलन भी तेजी से बढ़ा है।
वर्जन
अधिक तेल, मसाला या तला भुना व मैदा निर्मित खाद्य जिनकी सहालग के मेन्यू में अधिक होते हैं। यह सेहत के लिए नुकसानदायक हैं। यह अच्छी बात है कि युवा मेन्यू परिवर्तित कराकर सेहतमंद खाद्य चुन रहे हैं।
-डाॅ. एके द्विवेदी, सीएमएस, जिला अस्पताल