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Maharajganj News: फर्जी कागजात से हथियाई प्रधानाध्यापिका की नौकरी, प्रबंधक पर भी केस
Mon, 26 Aug 2024 01:10 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 26 Aug 2024 01:10 PM IST
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महराजगंज।
बेसिक शिक्षा विभाग के अधीन वित्त पोषित पूर्व माध्यमिक विद्यालय पिपरा रसूलपुर में फर्जी कागजात पर प्रधानाध्यापिका के पद पर नियुक्ति का मामला सामने आया है। इस मामले में विभाग ने आरोपी प्रधानाध्यापिका और स्कूल प्रबंधक से जवाब मांगा था। दोनों पक्षों से कोई जवाब नहीं मिलने पर विभाग ने शनिवार को आरोपी प्रधानाध्यापिका को बर्खास्त करने के साथ ही उसके और प्रबंधक के खिलाफ कोतवाली में तहरीर दे दी, जहां देर रात दोनों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया।
बेसिक शिक्षा अधिकारी श्रवण कुमार गुप्ता ने बताया कि जिलाधिकारी के पास पूर्व माध्यमिक विद्यालय पिपरा रसूलपुर में कार्यरत प्रधानाध्यापिका निधि सिंह पत्नी नितिन सिंह निवासी 76 डी, कालेपुर, गौतमनगर, कैंट, गोरखपुर के विरुद्ध शिकायत की गई थी कि उनकी नियुक्ति फर्जी तरीके से हुई है। डीएम के निर्देश पर विभागीय जांच शुरू की गई। 13 जून 2024 को स्कूल के प्रबंधक को निधि सिंह की नियुक्ति से संबंधित समस्त अभिलेख सहित पंजीकृत डाक से प्राप्त आवेदन पत्रों, प्रकाशित विज्ञापन का विवरण और अनुभव प्रमाण पत्र आदि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। निधि सिंह को भी 27 जुलाई 2024 को नियुक्ति के संदर्भ में वांछित साक्ष्य और स्पष्टीकरण बीएसए कार्यालय को एक सप्ताह के अंदर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए, लेकिन दोनों पक्षों ने साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए। विभाग ने दोबारा 14 अगस्त 2024 को प्रबंधक और निधि सिंह से साक्ष्य मांगा। इस बार भी उन्होंने साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए।
इस दौरान विभागीय जांच में पाया गया कि निधि सिंह की नियुक्ति से संबंधित पत्रावलियां फर्जी हैं और उन पर तत्कालीन बीएसए और पटल सहायक के हस्ताक्षर भी फर्जी हैं। यही नहीं, विज्ञापन की अनुमति के लिए तैयार पत्रावली, तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी नौतनवा को पर्यवेक्षक के रूप में संबोधित पत्र और साक्षात्कार संबंधी दस्तावेज भी फर्जी हैं। जांच के दौरान तत्कालीन बीएसए रमाकांत वर्मा और वरिष्ठ सहायक मनीष सिंह ने भी बताया कि उन्होंने संबंधित पत्रावलियों पर कोई हस्ताक्षर नहीं किया। उनके हस्ताक्षर कूटरचित हैं।
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इस प्रकार सभी अभिलेखों और साक्ष्यों की विभागीय जांच के उपरांत बीएसए श्रवण कुमार गुप्ता ने आदेशित किया कि सिद्धार्थ पूर्व माध्यमिक विद्यालय पिपरा रसूलपुर जनपद-महराजगंज में प्रधानाध्यापिका के पद पर कार्यरत निधि सिंह की नियुक्ति पूर्ण रूप से कूटरचित ढंग से पत्रावली तैयार कर की गई है, जो पूर्णतः अवैध है। बीएसए ने प्रबंधक, सिद्धार्थ पूमावि पिपरा रसूलपुर को निधि सिंह की नियुक्ति, नियुक्ति तिथि एक जुलाई 2015 से निरस्त मानते हुए तत्काल पदच्युत करने का आदेश दिया। साथ ही बीईओ को प्रबंधक और निधि सिंह के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया। 24 अगस्त को बीईओ अंकिता सिंह ने कोतवाली में प्रबंधक और निधि सिंह के विरुद्ध प्राथमिकी दी, जिस पर देर रात केस दर्ज कर लिया गया।
हर कदम पर किया गया फर्जीवाड़ा
विभागीय जांच के अनुसार, प्रधानाध्यापिका पद पर निधि सिंह की नियुक्ति में सबकुछ फर्जी तरीके से किया गया। प्रबंधक ने अपने पत्र द्वारा प्रधानाध्यापक पद के लिए अनुमोदन प्रदान करने में गड़बड़ी की। पत्र को कार्यालय में प्राप्त दर्शाया गया है, जबकि उस पर प्राप्तकर्ता पटल सहायक का न तो हस्ताक्षर है और न ही दिनांक अंकित है और न ही पंजिका का क्रम संख्या ही। साथ ही पत्र को मेमो के द्वारा जारी किया गया है। तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के हस्ताक्षर के नीचे भी दिनांक अंकित नहीं है। तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की आख्या के अनुसार उपरोक्त विद्यालय में प्रधानाध्यापक की नियुक्ति से संबंधित पत्रावली उनके कार्यकाल में नहीं की गई है और न ही किसी पटल सहायक को इससे संबंधित काेई आदेश निर्देश निर्गत किया गया था।
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बेसिक शिक्षा विभाग के अधीन वित्त पोषित पूर्व माध्यमिक विद्यालय पिपरा रसूलपुर में फर्जी कागजात पर प्रधानाध्यापिका के पद पर नियुक्ति का मामला सामने आया है। इस मामले में विभाग ने आरोपी प्रधानाध्यापिका और स्कूल प्रबंधक से जवाब मांगा था। दोनों पक्षों से कोई जवाब नहीं मिलने पर विभाग ने शनिवार को आरोपी प्रधानाध्यापिका को बर्खास्त करने के साथ ही उसके और प्रबंधक के खिलाफ कोतवाली में तहरीर दे दी, जहां देर रात दोनों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया।
बेसिक शिक्षा अधिकारी श्रवण कुमार गुप्ता ने बताया कि जिलाधिकारी के पास पूर्व माध्यमिक विद्यालय पिपरा रसूलपुर में कार्यरत प्रधानाध्यापिका निधि सिंह पत्नी नितिन सिंह निवासी 76 डी, कालेपुर, गौतमनगर, कैंट, गोरखपुर के विरुद्ध शिकायत की गई थी कि उनकी नियुक्ति फर्जी तरीके से हुई है। डीएम के निर्देश पर विभागीय जांच शुरू की गई। 13 जून 2024 को स्कूल के प्रबंधक को निधि सिंह की नियुक्ति से संबंधित समस्त अभिलेख सहित पंजीकृत डाक से प्राप्त आवेदन पत्रों, प्रकाशित विज्ञापन का विवरण और अनुभव प्रमाण पत्र आदि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। निधि सिंह को भी 27 जुलाई 2024 को नियुक्ति के संदर्भ में वांछित साक्ष्य और स्पष्टीकरण बीएसए कार्यालय को एक सप्ताह के अंदर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए, लेकिन दोनों पक्षों ने साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए। विभाग ने दोबारा 14 अगस्त 2024 को प्रबंधक और निधि सिंह से साक्ष्य मांगा। इस बार भी उन्होंने साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए।
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इस दौरान विभागीय जांच में पाया गया कि निधि सिंह की नियुक्ति से संबंधित पत्रावलियां फर्जी हैं और उन पर तत्कालीन बीएसए और पटल सहायक के हस्ताक्षर भी फर्जी हैं। यही नहीं, विज्ञापन की अनुमति के लिए तैयार पत्रावली, तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी नौतनवा को पर्यवेक्षक के रूप में संबोधित पत्र और साक्षात्कार संबंधी दस्तावेज भी फर्जी हैं। जांच के दौरान तत्कालीन बीएसए रमाकांत वर्मा और वरिष्ठ सहायक मनीष सिंह ने भी बताया कि उन्होंने संबंधित पत्रावलियों पर कोई हस्ताक्षर नहीं किया। उनके हस्ताक्षर कूटरचित हैं।
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इस प्रकार सभी अभिलेखों और साक्ष्यों की विभागीय जांच के उपरांत बीएसए श्रवण कुमार गुप्ता ने आदेशित किया कि सिद्धार्थ पूर्व माध्यमिक विद्यालय पिपरा रसूलपुर जनपद-महराजगंज में प्रधानाध्यापिका के पद पर कार्यरत निधि सिंह की नियुक्ति पूर्ण रूप से कूटरचित ढंग से पत्रावली तैयार कर की गई है, जो पूर्णतः अवैध है। बीएसए ने प्रबंधक, सिद्धार्थ पूमावि पिपरा रसूलपुर को निधि सिंह की नियुक्ति, नियुक्ति तिथि एक जुलाई 2015 से निरस्त मानते हुए तत्काल पदच्युत करने का आदेश दिया। साथ ही बीईओ को प्रबंधक और निधि सिंह के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया। 24 अगस्त को बीईओ अंकिता सिंह ने कोतवाली में प्रबंधक और निधि सिंह के विरुद्ध प्राथमिकी दी, जिस पर देर रात केस दर्ज कर लिया गया।
हर कदम पर किया गया फर्जीवाड़ा
विभागीय जांच के अनुसार, प्रधानाध्यापिका पद पर निधि सिंह की नियुक्ति में सबकुछ फर्जी तरीके से किया गया। प्रबंधक ने अपने पत्र द्वारा प्रधानाध्यापक पद के लिए अनुमोदन प्रदान करने में गड़बड़ी की। पत्र को कार्यालय में प्राप्त दर्शाया गया है, जबकि उस पर प्राप्तकर्ता पटल सहायक का न तो हस्ताक्षर है और न ही दिनांक अंकित है और न ही पंजिका का क्रम संख्या ही। साथ ही पत्र को मेमो के द्वारा जारी किया गया है। तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के हस्ताक्षर के नीचे भी दिनांक अंकित नहीं है। तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की आख्या के अनुसार उपरोक्त विद्यालय में प्रधानाध्यापक की नियुक्ति से संबंधित पत्रावली उनके कार्यकाल में नहीं की गई है और न ही किसी पटल सहायक को इससे संबंधित काेई आदेश निर्देश निर्गत किया गया था।