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कोरोना से बचाव के जरूरी सामान पर जीएसटी की मार

Thu, 27 Aug 2020 07:12 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 27 Aug 2020 07:12 PM IST
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gst hit on corona resscue items
कोरोना से बचाव के जरूरी सामान पर जीएसटी की मार
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महराजगंज। कोरोना से जंग पर जीएसटी भारी पड़ रहा है। संक्रमण के इस दौरान सैनिटाइजर, मास्क, थर्मामीटर, ऑक्सीमीटर आदि के दाम बढ़े हैं। कोरोना से बचाव के लिए मास्क व सैनिटाइजर का इस्तेमाल कर करने की वजह से घरेलू खर्चे में इन पर होने वाले व्यय को भी जोड़ रहे हैं। मास्क को छोड़कर अन्य सामान पर 12 से 18 फीसदी जीएसटी देना पड़ रहा है। लोग अब मांग कर रहे हैं कि कोरोना से बचाव में इस्तेमाल होने वाले सामान का दाम कम हो, क्योंकि यह सामान अब दैनिक जीवन में हिस्सा बन चुका है। अगर जीएसटी शून्य हो जाए तो काफी राहत मिलेगी।
कोरोना काल से पहले मास्क, सैनिटाइजर, ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर आदि सामान को डॉक्टर अस्पतालों में इस्तेमाल करते थे। अब उनके साथ ही कई लोग इनका इस्तेमाल करने लगे हैं। कोरोना से बचाव के लिए घरेलू खर्चों में हर माह मास्क, सैनिटाइजर आदि की खरीदारी बढ़ गई है। ऐसे में जीएसटी से इनकी कीमत बढ़ गई है। वर्तमान में सैनिटाइजर लगभग ज्यादातर के पास है। इसमें 12 से 18 प्रतिशत जीएसटी देनी पड़ रही है। दवा व्यापारी राकेश पटेल ने बताया कि 110 एमएल का सैनिटाइजर 55 रुपये में उपलब्ध है। इस पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगने से मूल्य में 10 रुपये की बढ़ोत्तरी हो जाएगी। कुछ ऐसे भी सैनिटाइजर हैं, जिन पर 12 प्रतिशत जीएसटी है। इसी तरह 1500 में मिलने वाला ऑक्सीमीटर से अगर 12 प्रतिशत जीएसटी को घटा दिया जाए तो इसका मूल्य 180 रुपये कम हो सकता है।
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चेहरी गांव के रहने वाले श्याम नारायण वर्मा ने बताया कि इन दिनों कोविड-19 के मरीज बढ़ रहे हैं, जिससे बचाव का सामान हर कोई खरीद रहा है। इसमें अगर जीएसटी शून्य हो जाता तो अच्छा रहता। विस्मिल नगर के रहने वाले प्रशांत मणि त्रिपाठी ने बताया कि आजकल दुकान भी सैनिटाइज करना पड़ रहा है, जिससे एक खर्च और बढ़ गया है। अगर जीएसटी नहीं लगता तो सैनिटाइजर सस्ता मिलता। वैसे भी कार्यालय, अस्पताल, शोरूम आदि स्थानों पर इंफ्रारेड थर्मामीटर का इस्तेमाल बढ़ा है। दवा के थोक विक्रेता संजीव कुमार कश्यप ने बताया कि ब्रांडेड कंपनी का इंफ्रारेड थर्मामीटर 2500 से 3000 रुपये के बीच है। अगर कोई 2500 का थर्मामीटर खरीदता है तो करीब 450 रुपये उस पर जीएसटी शामिल है। मास्क पर तो पांच फीसदी ही जीएसटी है।
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केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष आशोक चौरसिया ने बताया कि कोरोना संक्रमण काल में दुकानों पर औसत 1500 रुपये का अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है। दुकान को सैनिटाइज करना, मास्क, ग्लब्स आदि का इस्तेमाल दिनचर्या में शामिल है। अगर बचाव के सामान पर जीएसटी शून्य होता तो दुकानदार के साथ ही आमजन को राहत मिलती है। औसत प्रत्येक दिन जिले में 10 से 12 हजार मास्क की बिक्री का अनुमान है। सैनिटाइजर दो से 2500 लीटर, पल्स ऑक्सीमीटर व थर्मामीटर 150 से 200, हैंड ग्लब्स छह से सात हजार के बीच बिक्री होगी।
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