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Maharajganj News: सरकारी डॉक्टर चला रहे निजी अस्पताल, पैथालॉजी भी पंजीकृत नहीं
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मानक के विपरीत संचालित हो रहा अस्पताल, पैथोलॉजी भी अवैध मिली
सिद्धार्थनगर के लोटन में सरकारी अस्पताल में बतौर चिकित्साधीक्षक के पद पर हैं तैनात, चला रहे निजी अस्पताल
निजी अस्पताल में युवक की मौत के बाद परिजन ने साधी चुप्पी, किया अंतिम संस्कार
नौतनवा। खनुआ तिराहा के निकट तहसील रोड पर स्थित अनन्या हॉस्पिटल में मंगलवार की रात एक व्यक्ति की इलाज के दौरान हुई मौत व हंगामा मामले में नया तथ्य सामने आया है। परिजन ने जिस डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया था वह सिद्धार्थनगर के लोटन में सरकारी अस्पताल में कार्यरत हैं और अस्पताल से संबंधित पैथोलॉजी भी पंजीकृत नहीं है।
आरोपों का जवाब देते हुए डॉक्टर अमित चौधरी ने स्वीकार किया कि वह सिद्धार्थनगर जिला के लोटन के सरकारी अस्पताल में प्रभारी चिकित्साधिकारी के पद पर तैनात हैं। उनका कहना है कि ड्यूटी से समय मिलने के बाद वह नौतनवा स्थित अपने निजी अस्पताल पर बैठते हैं। ड्यूटी के प्रति वे पूरी तरह से समर्पित हैं।
अस्पताल में युवक की मौत के बाद जिस पैथोलॉजी की जांच का हवाला देते हुए डॉ. अमित चौधरी अपना बचाव कर रहे हैं। उसकी वैधता पर को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि अस्पताल परिसर के अंदर ही केयर नाम से संचालित पैथोलॉजी स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण ही नहीं कराया गया है। इस पर डॉ. अमित कुमार चौधरी ने कहा कि पैथोलॉजी मेरे अस्पताल में है लेकिन मेरी नहीं है। रही बात रजिस्ट्रेशन न होने की तो संचालक से कहकर रजिस्ट्रेशन करवा दिया जाएगा।
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रात में हंगामा दिन में खामोश हो गए परिजन
जानकारी के अनुसार मधुबन नगर वार्ड निवासी विनोद (36) वर्ष का मंगलवार की शाम अचानक सांस फूलने लगी थी। मृतक के पिता ओमप्रकाश का आरोप है कि उन्होंने बेटे को तत्काल खनुआ तिराहा के निकट तहसील रोड पर स्थित अस्पताल में भर्ती कराया। आरोप है कि यहां चिकित्सक के इंजेक्शन लगाने के बाद विनोद के नाक और मुंह से खून आने लगा और कुछ ही देर में उसकी मौत भी हो गई।
घटना से आक्रोशित परिजन ने अस्पताल के सामने सड़क पर उतरकर हंगामा करना शुरू कर दिया। परिजन गंभीर आरोप लगाते हुए अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे। बुधवार की सुबह मृतक विनोद का बिना पोस्टमार्टम कराए ही परिजन ने अंतिम संस्कार कर दिया। बताया जा रहा है कि अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई की लटकती तलवार को देखते हुए रात से ही मामले को मैनेज करने का खेल शुरू हो गया था। मामला 24 घंटे में ही पूरी तरह से शांत हो गया। बुधवार को परिजन ने युवक का अंतिम संस्कार कर दिया। रात में हंगामा करने वाले परिजन ने सुबह कहीं कोई शिकायत नहीं की।
थानाध्यक्ष अभिषेक सिंह का कहना है कि मामले में परिजन कोई कार्रवाई नहीं चाहते हैं। वहीं इस संबंध में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. सुरेंद्र कुमार का कहना है कि घटनाक्रम संज्ञान में है। किंतु पीड़ित परिवार की ओर से अब तक कोई शिकायती पत्र नहीं मिला है।
वर्जन
डॉक्टर के अस्पताल संचालन के संबंध में हमें कोई जानकारी नहीं है। शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. संजय कुमार दोहरे, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर के लोटन में सरकारी अस्पताल में बतौर चिकित्साधीक्षक के पद पर हैं तैनात, चला रहे निजी अस्पताल
निजी अस्पताल में युवक की मौत के बाद परिजन ने साधी चुप्पी, किया अंतिम संस्कार
नौतनवा। खनुआ तिराहा के निकट तहसील रोड पर स्थित अनन्या हॉस्पिटल में मंगलवार की रात एक व्यक्ति की इलाज के दौरान हुई मौत व हंगामा मामले में नया तथ्य सामने आया है। परिजन ने जिस डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया था वह सिद्धार्थनगर के लोटन में सरकारी अस्पताल में कार्यरत हैं और अस्पताल से संबंधित पैथोलॉजी भी पंजीकृत नहीं है।
आरोपों का जवाब देते हुए डॉक्टर अमित चौधरी ने स्वीकार किया कि वह सिद्धार्थनगर जिला के लोटन के सरकारी अस्पताल में प्रभारी चिकित्साधिकारी के पद पर तैनात हैं। उनका कहना है कि ड्यूटी से समय मिलने के बाद वह नौतनवा स्थित अपने निजी अस्पताल पर बैठते हैं। ड्यूटी के प्रति वे पूरी तरह से समर्पित हैं।
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अस्पताल में युवक की मौत के बाद जिस पैथोलॉजी की जांच का हवाला देते हुए डॉ. अमित चौधरी अपना बचाव कर रहे हैं। उसकी वैधता पर को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि अस्पताल परिसर के अंदर ही केयर नाम से संचालित पैथोलॉजी स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण ही नहीं कराया गया है। इस पर डॉ. अमित कुमार चौधरी ने कहा कि पैथोलॉजी मेरे अस्पताल में है लेकिन मेरी नहीं है। रही बात रजिस्ट्रेशन न होने की तो संचालक से कहकर रजिस्ट्रेशन करवा दिया जाएगा।
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रात में हंगामा दिन में खामोश हो गए परिजन
जानकारी के अनुसार मधुबन नगर वार्ड निवासी विनोद (36) वर्ष का मंगलवार की शाम अचानक सांस फूलने लगी थी। मृतक के पिता ओमप्रकाश का आरोप है कि उन्होंने बेटे को तत्काल खनुआ तिराहा के निकट तहसील रोड पर स्थित अस्पताल में भर्ती कराया। आरोप है कि यहां चिकित्सक के इंजेक्शन लगाने के बाद विनोद के नाक और मुंह से खून आने लगा और कुछ ही देर में उसकी मौत भी हो गई।
घटना से आक्रोशित परिजन ने अस्पताल के सामने सड़क पर उतरकर हंगामा करना शुरू कर दिया। परिजन गंभीर आरोप लगाते हुए अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे। बुधवार की सुबह मृतक विनोद का बिना पोस्टमार्टम कराए ही परिजन ने अंतिम संस्कार कर दिया। बताया जा रहा है कि अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई की लटकती तलवार को देखते हुए रात से ही मामले को मैनेज करने का खेल शुरू हो गया था। मामला 24 घंटे में ही पूरी तरह से शांत हो गया। बुधवार को परिजन ने युवक का अंतिम संस्कार कर दिया। रात में हंगामा करने वाले परिजन ने सुबह कहीं कोई शिकायत नहीं की।
थानाध्यक्ष अभिषेक सिंह का कहना है कि मामले में परिजन कोई कार्रवाई नहीं चाहते हैं। वहीं इस संबंध में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. सुरेंद्र कुमार का कहना है कि घटनाक्रम संज्ञान में है। किंतु पीड़ित परिवार की ओर से अब तक कोई शिकायती पत्र नहीं मिला है।
वर्जन
डॉक्टर के अस्पताल संचालन के संबंध में हमें कोई जानकारी नहीं है। शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. संजय कुमार दोहरे, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सिद्धार्थनगर