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Maharajganj News: तहसील और रजिस्ट्री विभाग में सीलिंग की जमीन के रिकॉर्ड अलग-अलग
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रहें सतर्क...जमीन की रजिस्ट्री कराने के पहले सही से जांच लें रिकार्ड वरना फंस जाएगी रकम
रजिस्ट्री विभाग के पास मौजूद रिकॉर्ड में सिक्टौर मराछी, मुहम्मदपुर समेत कई अराजी नंबर है ही नहीं
रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज में लग सकती है रोक
गोरखपुर। सीलिंग की जमीनों का रिकॉर्ड तहसील और रजिस्ट्री विभाग में अलग-अलग है। रजिस्ट्री विभाग के पास रिकॉर्ड में कई गांव का ब्योरा ही नहीं है। यही नहीं सीएल-7 के रजिस्टर से कुछ पन्ने फट भी गए हैं। इसके चलते जमीन खरीदने वालों को मुश्किलें हो रही हैं। अगर किसी ने इन गांवों में जमीन की जांच दोनों जगहों पर करा ली तो बच गए वरना रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज में दिक्कतें आएंगी।
दरअसल, 11 फरवरी 2023 में तत्कालीन डीएम कृष्णा करुणेश ने 118 गांवों की 2600 से अधिक गाटों को सीलिंग की जमीन घोषित कर खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी थी। इसे लेकर तहसील और रजिस्ट्री विभाग में सीएल-7 रजिस्टर उपलब्ध कराई गई। लेकिन, दोनों जगहों के रिकॉर्ड में भिन्नता है। पिछले दिनों सिक्टौर मराछी गांव में जमीन खरीदने आए युवक सुशील पांडेय ने जब रिकॉर्ड खंगाला तो पता चला कि तहसील में रखे रजिस्टर में जमीन को सीलिंग का बताया गया है, जबकि रजिस्ट्री दफ्तर के रिकॉर्ड में गांव का जिक्र ही नहीं है। इसी प्रकार मुहम्मदपुर गांव भी रजिस्ट्री विभाग की लिस्ट में नहीं है। जानकारों का कहना है कि अगर सीलिंग की जमीनों का रिकॉर्ड मिलान किया जाए तो कई आराजी नंबर अलग-अलग दर्ज हैं। ऐसे में भू-माफिया ऐसी जमीनों को बड़ी ही आसानी से बेच सकते हैं, लेकिन खरीदने वाला फंस जाएगा क्योंकि दाखिल-खारिज होगा ही नहीं। रजिस्ट्री कार्यालय में आम लोगों की जांच पड़ताल के लिए सीएल-7 रजिस्टर रखवाया गया था लेकिन उसमें से भी कुछ पन्ने फट गए हैं। ऑनलाइन पीडीएफ में कई गांव गायब है।
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चौरीचौरा में भी फंसा था मामला
गोरखपुर। तीन साल पहले जिले के चौरीचौरा तहसील में सीलिंग की जमीन को सार्वजनिक किया गया था तब भी हड़कंप मच गया था। रुद्रापुर की दुर्गावती देवी व मीरा देवी ने आराजी नंबर 625 में जबकि यहीं के दुर्गेश ने आराजी नंबर 624 में रजिस्ट्री कराई। ये जमीनें सीलिंग की थी। इन जमीनों का दाखिल-खारिज भी हो गया था। बाद में जमीनों के नामांतरण का आदेश रद कर दिया गया।
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कोट
तहसील और रजिस्ट्री विभाग में सीलिंग की जमीनों के रिकॉर्ड को मिलान कराया जाएगा। अगर भिन्नता है तो उसे ठीक कराया जाएगा ताकि आम लोगों को असुविधा न होने पाए।
दीपक मीणा, डीएम
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रजिस्ट्री विभाग के पास मौजूद रिकॉर्ड में सिक्टौर मराछी, मुहम्मदपुर समेत कई अराजी नंबर है ही नहीं
रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज में लग सकती है रोक
गोरखपुर। सीलिंग की जमीनों का रिकॉर्ड तहसील और रजिस्ट्री विभाग में अलग-अलग है। रजिस्ट्री विभाग के पास रिकॉर्ड में कई गांव का ब्योरा ही नहीं है। यही नहीं सीएल-7 के रजिस्टर से कुछ पन्ने फट भी गए हैं। इसके चलते जमीन खरीदने वालों को मुश्किलें हो रही हैं। अगर किसी ने इन गांवों में जमीन की जांच दोनों जगहों पर करा ली तो बच गए वरना रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज में दिक्कतें आएंगी।
दरअसल, 11 फरवरी 2023 में तत्कालीन डीएम कृष्णा करुणेश ने 118 गांवों की 2600 से अधिक गाटों को सीलिंग की जमीन घोषित कर खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी थी। इसे लेकर तहसील और रजिस्ट्री विभाग में सीएल-7 रजिस्टर उपलब्ध कराई गई। लेकिन, दोनों जगहों के रिकॉर्ड में भिन्नता है। पिछले दिनों सिक्टौर मराछी गांव में जमीन खरीदने आए युवक सुशील पांडेय ने जब रिकॉर्ड खंगाला तो पता चला कि तहसील में रखे रजिस्टर में जमीन को सीलिंग का बताया गया है, जबकि रजिस्ट्री दफ्तर के रिकॉर्ड में गांव का जिक्र ही नहीं है। इसी प्रकार मुहम्मदपुर गांव भी रजिस्ट्री विभाग की लिस्ट में नहीं है। जानकारों का कहना है कि अगर सीलिंग की जमीनों का रिकॉर्ड मिलान किया जाए तो कई आराजी नंबर अलग-अलग दर्ज हैं। ऐसे में भू-माफिया ऐसी जमीनों को बड़ी ही आसानी से बेच सकते हैं, लेकिन खरीदने वाला फंस जाएगा क्योंकि दाखिल-खारिज होगा ही नहीं। रजिस्ट्री कार्यालय में आम लोगों की जांच पड़ताल के लिए सीएल-7 रजिस्टर रखवाया गया था लेकिन उसमें से भी कुछ पन्ने फट गए हैं। ऑनलाइन पीडीएफ में कई गांव गायब है।
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चौरीचौरा में भी फंसा था मामला
गोरखपुर। तीन साल पहले जिले के चौरीचौरा तहसील में सीलिंग की जमीन को सार्वजनिक किया गया था तब भी हड़कंप मच गया था। रुद्रापुर की दुर्गावती देवी व मीरा देवी ने आराजी नंबर 625 में जबकि यहीं के दुर्गेश ने आराजी नंबर 624 में रजिस्ट्री कराई। ये जमीनें सीलिंग की थी। इन जमीनों का दाखिल-खारिज भी हो गया था। बाद में जमीनों के नामांतरण का आदेश रद कर दिया गया।
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तहसील और रजिस्ट्री विभाग में सीलिंग की जमीनों के रिकॉर्ड को मिलान कराया जाएगा। अगर भिन्नता है तो उसे ठीक कराया जाएगा ताकि आम लोगों को असुविधा न होने पाए।
दीपक मीणा, डीएम