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Maharajganj News: घुघली के गन्ना किसान नहीं भूल पाते 31 अक्तूबर का दिन
Thu, 31 Oct 2024 01:58 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 31 Oct 2024 01:58 AM IST
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घुघली। क्षेत्र के गन्ना किसानों को 31 अक्तूबर 1999 का दिन कभी नहीं भूलता है, इस दिन घुघली चीनी मिल बंद हुई थी। 928 कर्मचारी बेरोजगार हो गए थे। वहीं किसान भी अपनी गन्ने की फसल को लेकर इधर-उधर शुगर मिल के चक्कर लगाने को मजबूर हुए। इसका परिणाम यह हुआ कि किसानों ने गन्ना बुआई ही कम कर दी। इसमें लगातार गिरावट दर्ज की गई।
आज के समय में नाममात्र के किसान ही गन्ना की बुवाई कर रहे हैं। वहीं कर्मचारियों को अफसोस है कि अगर यह फैक्ट्री चलती तो रोजगार के लिए क्षेत्र के लोगों को अन्य प्रदेशों का सहारा नहीं लेना पड़ता। सबको यह कसक है कि काश कभी घुघली चीनी मिल को भी मुद्दा बनाया जाता और इसके चालू होने से क्षेत्र में गन्ने की फसल फिर लहलहाने लगती। क्षेत्र के लोगों को अपने नजदीक की फैक्ट्री में ही रोजगार मिलने की संभावना हो जाती तो क्षेत्र के विकास में तेजी आती।
पंजाब प्रांत के लाला केशर राम नारंग ने 1920 में पंजाब शुगर मिल की स्थापना की थी। इसके बाद घुघली ने प्रदेश के नक्शे पर अपनी अलग जगह बना ली। कृषि, शिक्षा, राजनैतिक चेतना, व्यापार और सामाजिक रूप से भी सेहतमंद हुआ, लेकिन घुघली के विकास पर उस समय ग्रहण लग गया, जब स्थापना के 78वें वर्ष बाद मिल बंद होने का एलान हुआ। थ
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आज के समय में नाममात्र के किसान ही गन्ना की बुवाई कर रहे हैं। वहीं कर्मचारियों को अफसोस है कि अगर यह फैक्ट्री चलती तो रोजगार के लिए क्षेत्र के लोगों को अन्य प्रदेशों का सहारा नहीं लेना पड़ता। सबको यह कसक है कि काश कभी घुघली चीनी मिल को भी मुद्दा बनाया जाता और इसके चालू होने से क्षेत्र में गन्ने की फसल फिर लहलहाने लगती। क्षेत्र के लोगों को अपने नजदीक की फैक्ट्री में ही रोजगार मिलने की संभावना हो जाती तो क्षेत्र के विकास में तेजी आती।
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पंजाब प्रांत के लाला केशर राम नारंग ने 1920 में पंजाब शुगर मिल की स्थापना की थी। इसके बाद घुघली ने प्रदेश के नक्शे पर अपनी अलग जगह बना ली। कृषि, शिक्षा, राजनैतिक चेतना, व्यापार और सामाजिक रूप से भी सेहतमंद हुआ, लेकिन घुघली के विकास पर उस समय ग्रहण लग गया, जब स्थापना के 78वें वर्ष बाद मिल बंद होने का एलान हुआ। थ
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