फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Maharajganj News ›   Fast protest against the demarcation of Goddess

देवदह के सीमांकन का विरोध तेज

Wed, 08 Nov 2017 01:17 AM IST
महराजगंज (ब्यूरो)
महराजगंज (ब्यूरो) Updated Wed, 08 Nov 2017 01:17 AM IST
विज्ञापन
Fast protest against the demarcation of Goddess
देवदह के सीमांकन का विरोध तेज - फोटो : अमर उजाला

महराजगंज। विकास खंड के ग्राम पंचायत बनरसिंहा कला स्थित ऐतिहासिक स्थल गौतम बुद्ध के ननिहाल देवदह की जमीन के सीमांकन को लेकर किसानों में विरोध बढ़ता जा रहा है। सीमांकन से प्रभावित तीन गांवों के किसानों ने मंगलवार को देवदह के टीले पर एकत्र होकर जमकर सरकार विरोधी नारे लगाए। चेतावनी दी कि देवदह के सीमांकन व तार बाड़ लगाने के नाम पर उनके कब्जे की जमीन लेने की कोशिश हुई तो बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू करेंगे।

विज्ञापन

देवदह को संरक्षित करने के मद्देनजर वहां तार बाड़ के लिए शासन स्तर से 24 लाख स्वीकृत किए गए हैं। प्रस्तावित कार्य शुरू करने के लिए डीएम ने पुरातत्व विभाग से पिछले दिनों अनापत्ति प्रमाण जारी करने की मांग की थी। इस बीच अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने से पहले पुरातत्व विभाग की लखनऊ से आई टीम ने राजस्व कर्मियों की मदद से देवदह की जमीन दो दिन में सीमांकन किया था। सीमांकन का कार्य देर तक किए जाने से इससे प्रभावित किसान आशंकित हो गए थे। दरअसल, देवदह के नाम पर जिस 88.8 एकड़ जमीन के सीमांकन की बात कही जा रही है, उसके ज्यादातर हिस्से पर आसपास के तीन गांवों के किसान कई साल से काबिज हैं। यही नहीं, किसान उस पर खेती भी करते आ रहे हैं। सीमांकन की आड़ में हाथ से जमीन जाते देख किसान पिछले चार दिन से आंदोलनरत हैं।

विज्ञापन

मंगलवार को किसान एकजुट हो बनरसिंहा कला स्थित देवदह टीले पर जा पहुंचे। जहां किसानों ने सरकार विरोधी नारे लगाकर अपना विरोध जताया। अगुवाई करते हुए संतराम वर्मा ने आरोप लगाया कि पुरातत्व विभाग कि ओर से किसानों को नोटिस दिए बगैर देवदह के नाम पर उनके कब्जे की जमीन का सीमांकन कर दिया गया। किसानों को विश्वास में लिए बगैर सीमांकन कर निशान भी लगा दिए गए। झिनकू चौबे ने दावा किया कि पुरातत्व विभाग ने देवदह की जिस जमीन का सीमांकन किया है, उसमें से देवदह के बनरसिंहा कला, बनरसिंहा खुर्द व करमहवां बसंतपुर की अधिकांश जमीन पर किसानों का कब्जा है। उस पर चकबंदी के बाद से ही खेती करते आ रहे हैं। पुरातत्व विभाग द्वारा किसानों से बातचीत के बगैर सीमांकन किया जाना उनके साथ अन्याय है। करमहवां बसंतपुर के ग्राम प्रधान सुयश त्रिपाठी ने कहा कि अगर किसान की जमीन की जरूरत पड़ती है तो उसे तीन वर्गों में बांट कर सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा भुगतान दिया जाना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed