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Maharajganj News: फसल बीमा का लाभ मिलने में पेच देखकर घटा किसानों का रुझान
Thu, 23 Mar 2023 01:14 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 23 Mar 2023 01:14 AM IST
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फोटो
चार साल में गैर ऋणी किसानों की आधी हो गई संख्या, ऋण लेने वाले किसानों का स्वत: हो जाता है फसल बीमा
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। प्रधानमंत्री फसल बीमा का लाभ लेने में पेच को देखते हुए गैर ऋणी किसानों की संख्या घट गई है। वहीं, ऋण लेने वाले किसानों की संख्या बढ़ी है। इसका कारण यह है कि ऋण लेते समय ही फसल बीमा की किस्त कट जाती है।
वर्ष 2019 रबी में ऋण लेने वाले 31,734 किसान तो गैर ऋणी 1,742 किसानों ने फसल बीमा कराया था। वर्ष 2022-23 में ऋणी किसान 39,725 तो गैर ऋणी किसान घटकर आधे से भी कम 685 हो गए।
बीते दिनों में जिले में तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने कुछ स्थानों पर गेहूं की फसल को प्रभावित किया है। किसान परेशान हैं कि कहीं पैदावार प्रभावित न हो जाए। पनियरा क्षेत्र में खेत में गेहूं की फसल झुक गई है। किसानों को चिंता है कि खेत में लगी पूंजी कहीं बर्बाद न हो जाए। जिला प्रशासन ने टोल फ्री नंबर पर नुकसान की जानकारी देने के लिए किसानों का आह्वान किया था।
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नुकसान की रिपोर्ट तैयार होने के बाद पता चलेगा कि कितना नुकसान हुआ है। जिले में 5,99,209 किसान हैं। 40,510 किसानों ने फसल बीमा कराया है। इसमें ऋण लेने और ऋण नहीं लेने वाले किसान शामिल हैं। एग्रीकल्चर इंश्योंरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड ने फसल बीमा किया है।
पनियरा क्षेत्र के कुआचाप गांव के किसान कृष्णदेव ने बताया कि फसल बीमा के तहत मुआवजा पाने को भी धक्के खाने पड़ते हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर सरकार की ओर से भले ही किसानों के कल्याण का दावा किया जा रहा है लेकिन हकीकत में इस योजना से जुड़ने वाले गैर ऋणी किसानों की संख्या हर साल घट रही है।
कोट
खरीफ फसल में जिले के 43,000 किसानों ने फसल बीमा का लाभ लेने के लिए दावा किया था। इनका सर्वे कराया गया है। प्रभावित किसानों की सूची तैयार होने बाद नुकसान की भरपाई की जाएगी।
-फसल बीमा कराने वाले नितिन कुमार, जिला प्रबंधक, एग्रीकल्चर इश्योंरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड
वर्ष ऋणी किसान गैर ऋणी किसान
रबी वर्ष 2019-20 31,734 1,742
खरीफ वर्ष 2020 38,419 1,573
रबी वर्ष 2020-21 46,394 141
खरीफ 2021 51,577 1,836
रबी 2021-22 45,273 नहीं
खरीफ वर्ष 2022 41,273 900
रबी वर्ष 2022-23 39,825 685
कोट
फसल बीमा कराने वाले किसानों को नुकसान की भरपाई बीमा कंपनी करती है। सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही धनराशि मिलती है। किसानों को अगर कहीं समस्या होती है तो उसका त्वरित समाधान किया जाता है।
-वीरेंद्र कुमार, जिला कृषि अधिकारी
टोल फ्री नंबर पर देनी पड़ती है सूचना
जिन किसानों की फसल का नुकसान अतिवृष्टि/ओलावृष्टि के कारण हुआ है, उन किसानों को प्रभावित समय से 72 घंटे के भीतर टोल फ्री नंबर 18008896868 पर फ़ोन कर फसल नुकसान के कारण का उल्लेख कर मुआवजे के लिए आवेदन करना पड़ता है। बीमा कंपनी की ओर से राजस्व व कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ फसल नुकसान का परीक्षण कर आख्या शासन को भेजती है। अधिक जानकारी के लिए किसान जिला कृषि अधिकारी कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
लिखकर देने पर नहीं कटता है प्रीमियम
महराजगंज। 18 फरवरी 2016 को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लागू हुआ था। योजना के तहत किसानों से खरीफ सीजन में दो प्रतिशत व रबी सीजन में 1.5 प्रतिशत प्रीमियम लिया जाता है। किसानों का रुझान योजना के प्रति घट रहा है। केनरा बैंक के डीएसए अनिल कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि किसानों को अगर फसल बीमा योजना से नहीं जुड़ना है, तो इसके लिए उन्हें संबंधित बैंक में लिखकर देना होता है। इसके बाद प्रीमियम नहीं काटा जाता है।
कोट
फसल बीमा के लिए हर बार खाते से रकम काट ली जाती है। खरीफ की फसल सूखे के चलते काफी प्रभावित हुई थी लेकिन जिम्मेदारों ने न ताे फसलों का सर्वे किया, न ही उन्हें फसल बीमा का कोई लाभ मिला।
-भोली, किसान, जिगनहवां
फसल बीमा के लिए पिछले तीन सीजन से फसल लगाने से पहले खाते से किस्त काट ली जाती है, लेकिन फसल नुकसान होने पर कोई जिम्मेदार न सर्वे करने आते हैं, न ही उन्हें कोई लाभ मिल पाता है।
-विद्यासागर, किसान, सेखुई
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चार साल में गैर ऋणी किसानों की आधी हो गई संख्या, ऋण लेने वाले किसानों का स्वत: हो जाता है फसल बीमा
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। प्रधानमंत्री फसल बीमा का लाभ लेने में पेच को देखते हुए गैर ऋणी किसानों की संख्या घट गई है। वहीं, ऋण लेने वाले किसानों की संख्या बढ़ी है। इसका कारण यह है कि ऋण लेते समय ही फसल बीमा की किस्त कट जाती है।
वर्ष 2019 रबी में ऋण लेने वाले 31,734 किसान तो गैर ऋणी 1,742 किसानों ने फसल बीमा कराया था। वर्ष 2022-23 में ऋणी किसान 39,725 तो गैर ऋणी किसान घटकर आधे से भी कम 685 हो गए।
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बीते दिनों में जिले में तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने कुछ स्थानों पर गेहूं की फसल को प्रभावित किया है। किसान परेशान हैं कि कहीं पैदावार प्रभावित न हो जाए। पनियरा क्षेत्र में खेत में गेहूं की फसल झुक गई है। किसानों को चिंता है कि खेत में लगी पूंजी कहीं बर्बाद न हो जाए। जिला प्रशासन ने टोल फ्री नंबर पर नुकसान की जानकारी देने के लिए किसानों का आह्वान किया था।
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नुकसान की रिपोर्ट तैयार होने के बाद पता चलेगा कि कितना नुकसान हुआ है। जिले में 5,99,209 किसान हैं। 40,510 किसानों ने फसल बीमा कराया है। इसमें ऋण लेने और ऋण नहीं लेने वाले किसान शामिल हैं। एग्रीकल्चर इंश्योंरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड ने फसल बीमा किया है।
पनियरा क्षेत्र के कुआचाप गांव के किसान कृष्णदेव ने बताया कि फसल बीमा के तहत मुआवजा पाने को भी धक्के खाने पड़ते हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर सरकार की ओर से भले ही किसानों के कल्याण का दावा किया जा रहा है लेकिन हकीकत में इस योजना से जुड़ने वाले गैर ऋणी किसानों की संख्या हर साल घट रही है।
कोट
खरीफ फसल में जिले के 43,000 किसानों ने फसल बीमा का लाभ लेने के लिए दावा किया था। इनका सर्वे कराया गया है। प्रभावित किसानों की सूची तैयार होने बाद नुकसान की भरपाई की जाएगी।
-फसल बीमा कराने वाले नितिन कुमार, जिला प्रबंधक, एग्रीकल्चर इश्योंरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड
वर्ष ऋणी किसान गैर ऋणी किसान
रबी वर्ष 2019-20 31,734 1,742
खरीफ वर्ष 2020 38,419 1,573
रबी वर्ष 2020-21 46,394 141
खरीफ 2021 51,577 1,836
रबी 2021-22 45,273 नहीं
खरीफ वर्ष 2022 41,273 900
रबी वर्ष 2022-23 39,825 685
कोट
फसल बीमा कराने वाले किसानों को नुकसान की भरपाई बीमा कंपनी करती है। सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही धनराशि मिलती है। किसानों को अगर कहीं समस्या होती है तो उसका त्वरित समाधान किया जाता है।
-वीरेंद्र कुमार, जिला कृषि अधिकारी
टोल फ्री नंबर पर देनी पड़ती है सूचना
जिन किसानों की फसल का नुकसान अतिवृष्टि/ओलावृष्टि के कारण हुआ है, उन किसानों को प्रभावित समय से 72 घंटे के भीतर टोल फ्री नंबर 18008896868 पर फ़ोन कर फसल नुकसान के कारण का उल्लेख कर मुआवजे के लिए आवेदन करना पड़ता है। बीमा कंपनी की ओर से राजस्व व कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ फसल नुकसान का परीक्षण कर आख्या शासन को भेजती है। अधिक जानकारी के लिए किसान जिला कृषि अधिकारी कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
लिखकर देने पर नहीं कटता है प्रीमियम
महराजगंज। 18 फरवरी 2016 को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लागू हुआ था। योजना के तहत किसानों से खरीफ सीजन में दो प्रतिशत व रबी सीजन में 1.5 प्रतिशत प्रीमियम लिया जाता है। किसानों का रुझान योजना के प्रति घट रहा है। केनरा बैंक के डीएसए अनिल कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि किसानों को अगर फसल बीमा योजना से नहीं जुड़ना है, तो इसके लिए उन्हें संबंधित बैंक में लिखकर देना होता है। इसके बाद प्रीमियम नहीं काटा जाता है।
कोट
फसल बीमा के लिए हर बार खाते से रकम काट ली जाती है। खरीफ की फसल सूखे के चलते काफी प्रभावित हुई थी लेकिन जिम्मेदारों ने न ताे फसलों का सर्वे किया, न ही उन्हें फसल बीमा का कोई लाभ मिला।
-भोली, किसान, जिगनहवां
फसल बीमा के लिए पिछले तीन सीजन से फसल लगाने से पहले खाते से किस्त काट ली जाती है, लेकिन फसल नुकसान होने पर कोई जिम्मेदार न सर्वे करने आते हैं, न ही उन्हें कोई लाभ मिल पाता है।
-विद्यासागर, किसान, सेखुई