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Maharajganj News: घोटाले का मोहरा बने किसान, महामारी में भी ठगे गए
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करीब दो करोड़ रुपये सरकारी धन गबन करने के मामले ने पकड़ा तूल, विभागीय कर्मियों ने खुद को बचाने के लिए किसानों को फंसाया
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिले में कृषि विभाग की कारगुजारियों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। कृषि विभाग में करोड़ों रुपये सब्सिडी घोटाले को लेकर हड़कंप मचा हुआ है। आनन-फानन में विभागीय कर्मी अपना गला बचाने के लिए किसानों को मोहरा बना दिए हैं। करीब दो करोड़ के घोटाले के इस खेल में तमाम किरदार हैं, उनकी सांसें अटकी हुई है कि कहीं वह भी गिरफ्त में न आ जाएं। उधर कृषि विभाग के जिम्मेदारों ने महामारी (कोविड काल) 2020-21 में भी किसानों को ठगा है।
जानकारी के अनुसार, फर्जी बिल एवं जीएसटी नंबर पर भी यंत्रों पर सब्सिडी जारी कर दी गई। विभाग की परत दर परत अनियमितता उजागर हुई तो सभी सन्न रह गए। दरअसल कृषि उपनिदेशक कार्यालय में वर्ष 2018-19 और 2019-20 में कृषि यंत्रों की सब्सिडी में जमकर खेल किया गया। फर्जी बिल एवं जीएसटी नंबर पर भी यंत्रों पर सब्सिडी जारी कर दी गई। यंत्र की खरीदारी में कपड़े की दुकान की रसीद लगाई गई थी। कुछ ऐसे किसानों के नाम भी सामने आए, जो एक या दो वर्ष पूर्व ही यंत्रों की खरीदारी कर चुके थे। फर्जी खाता खाेलकर किसानों के नाम पर करीब दो करोड़ रुपये सरकारी धन गबन कर लिया गया। इस प्रकरण में 104 किसानों के नाम पर केस दर्ज हुआ है। 10 फर्मों के खिलाफ भी केस दर्ज हो चुका है। कृषि विभाग के बाबू की तहरीर पर केस दर्ज होते ही किसान मुखर होना शुरू हो गए हैं। किसानों की माने तो उनको मोहरा बनाया जा रहा है। असल खेल तो विभाग के बाबूओं ने खेला है। किसान बता रहे हैं कि रकम हजम करने का जुगाड़ बाबूओं ने बनाया और हजम कर लिया। बेवजह केस दर्ज कर विभाग के बाबू अधिकारी अपना दामन बचा रहे हैं।
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किसानों को सब्सिडी मिली नहीं, झेलना पड़ेगा केस
बनकटवा गांव के किसान अनिल गौंड ने बताया कि भूसा मशीन, रोटावेटर, थ्रेसर खरीदा था। केवल थ्रेसर की सब्सिडी 45000 रुपये मिली है। भूसा मशीन और रोटवेटर की सब्सिडी नहीं मिली है। करीब एक लाख रुपये की सब्सिडी मिली थी। रकम तो मिली नहीं बदले में केस दर्ज करा दिया गया। रकम कहां गई किसी तो पता नहीं। विशुनपुर भडेहर निवासी त्रियुगी पटेल ने बताया कि कृषि यंत्र रोटावेटर खरीदा था, लेकिन सब्सिडी की रकम नहीं मिली। सिरौली गांव के मारकंडेय, निचलौल कस्बे के लोहिया नगर के महेश यादव व बड़हरा राजा गांव की सुनीता ने भी विभाग के बाबुओं की तीखी आचोलना करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। किसानों ने कहा कि सब्सिडी मिली नहीं, केस भी झेलना पडेगा, यह कहां का न्याय है।
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फर्जी खाता खोलकर रकम का हुआ बंदरबांट
किसानों के नाम पर फर्जी खाता खोलकर रकम का बंदरबाट हुआ है। किसानों के आधार समेत जरूरी प्रपत्रों को लेकर पंजीकरण कराने के बाद रकम हजम करने का खेल हुआ है। तमाम किसानों को पता ही नहीं है कि उनका पंजीकरण कब हो गया।
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किसान लगाते रहे चक्कर, रकम हो गया हजम
सब्सिडी की रकम किसानों के खाते में नहीं आती थी तो विभाग के कार्यालय पहुंचते थे। उनको बाबू प्रपत्र गड़बड़ होने की बात कर लौटा देते थे। सूत्र बता रहे हैं कि रकम ज्यादा नहीं होने के कारण किसान भी ज्यादा ध्यान नहीं देते थे। जिन किसानों की एक लाख या दो लाख सब्सिडी होती थी, उनमें खेल नहीं होता था, उनके खाते में रकम भेज दी जाती थी। कम रकम वाले किसानों को गुमराह कर रकम की बंदरबांट किया गया है।
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बेकसूर किसानों को फंसाया गया
भारतीय किसान संघ के जिला उपाध्यक्ष ओम प्रकाश पांडेय ने बताया कि किसानों के सब्सिडी घोटाले की जांच ठीक ढंग से हुई तो विभाग के कई बाबू फसेंगे। किसानों को मोहरा बनाकर विभाग के अधिकारी कर्मचारी अपना दामन बचा रहे हैं। बेकसूर किसानों को फंसाया गया है।
महामारी में भी किसानों के हक पर डाका
महराजगंज। कृषि विभाग में कृषि यंत्रों और अनुदान घोटाले के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। वही हर रोज घोटाले को लेकर नए मामले उजागर हो रहे हैं। ऐसे में कृषि विभाग के जिम्मेदारों ने महामारी (कोविड काल) 2020-21 में भी किसानों के हकों पर डाका डालने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा है। कृषि विभाग के कुछ कर्मचारियों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि कोविड काल 2020-21 राजकीय कृषि बीज केंद्रों से धान की बीज लेने वाले किसानों को कोविड से सुरक्षा के लिए 900 रुपये की लागत से फेस सील्ड मास्क, गमछा, साबुन और सैनिटाइजर का वितरण करना था। लेकिन जिम्मेदारों ने बीज केंद्रों से बीज लेने वाले 3000 पंजीकृत किसानों को महज गमछा का वितरण कर लाखों की धनराशि का गोलमाल कर दिया। इतना ही नही कर्मचारियों ने आगे कहा कि अगर इसकी जांच कराई जाए तो विभाग के जिम्मेदारों की धांधली की पोल खुलकर सामने आएगी।
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वरिष्ठ सहायक पर फर्जी केस दर्ज कराने का आरोप
कृषि विभाग में तैनात सहायक तकनीकी प्रबंधक किंकर सिंह ने जिलाधिकारी से शिकायत कर प्रकरण की जानकारी दी है। आरोप है कि वरिष्ठ सहायक पर किसानों समेत अन्य पर फर्जी केस दर्ज कराया है। असल कसूरवारों पर केस दर्ज नहीं हुआ है। शिकायत पत्र में कहा है कि अगस्त 2016 से कृषि विभाग महराजगंज में कार्य कर रहा हूं। कृषि विभाग की अधिकारिक वेबसाइट पीएम किसान और यूपी एग्रीकलचर पोर्टल पर मेरे सैलरी खाते को रंजिश के चलते आईडी पासवर्ड का उपयोग कर घुघली ब्लॉक में दूसरे के नाम से पंजीकृत कर दिया गया है। ताकि फर्जीवाड़ा का खुलासा करने पर बाद में हमें फंसाया जा सके। इतना ही नहीं हर रोज घोटाले की हो रही उजागर का आरोप लगाकर जिम्मेदार उनका शोषण कर रहे हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिले में कृषि विभाग की कारगुजारियों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। कृषि विभाग में करोड़ों रुपये सब्सिडी घोटाले को लेकर हड़कंप मचा हुआ है। आनन-फानन में विभागीय कर्मी अपना गला बचाने के लिए किसानों को मोहरा बना दिए हैं। करीब दो करोड़ के घोटाले के इस खेल में तमाम किरदार हैं, उनकी सांसें अटकी हुई है कि कहीं वह भी गिरफ्त में न आ जाएं। उधर कृषि विभाग के जिम्मेदारों ने महामारी (कोविड काल) 2020-21 में भी किसानों को ठगा है।
जानकारी के अनुसार, फर्जी बिल एवं जीएसटी नंबर पर भी यंत्रों पर सब्सिडी जारी कर दी गई। विभाग की परत दर परत अनियमितता उजागर हुई तो सभी सन्न रह गए। दरअसल कृषि उपनिदेशक कार्यालय में वर्ष 2018-19 और 2019-20 में कृषि यंत्रों की सब्सिडी में जमकर खेल किया गया। फर्जी बिल एवं जीएसटी नंबर पर भी यंत्रों पर सब्सिडी जारी कर दी गई। यंत्र की खरीदारी में कपड़े की दुकान की रसीद लगाई गई थी। कुछ ऐसे किसानों के नाम भी सामने आए, जो एक या दो वर्ष पूर्व ही यंत्रों की खरीदारी कर चुके थे। फर्जी खाता खाेलकर किसानों के नाम पर करीब दो करोड़ रुपये सरकारी धन गबन कर लिया गया। इस प्रकरण में 104 किसानों के नाम पर केस दर्ज हुआ है। 10 फर्मों के खिलाफ भी केस दर्ज हो चुका है। कृषि विभाग के बाबू की तहरीर पर केस दर्ज होते ही किसान मुखर होना शुरू हो गए हैं। किसानों की माने तो उनको मोहरा बनाया जा रहा है। असल खेल तो विभाग के बाबूओं ने खेला है। किसान बता रहे हैं कि रकम हजम करने का जुगाड़ बाबूओं ने बनाया और हजम कर लिया। बेवजह केस दर्ज कर विभाग के बाबू अधिकारी अपना दामन बचा रहे हैं।
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किसानों को सब्सिडी मिली नहीं, झेलना पड़ेगा केस
बनकटवा गांव के किसान अनिल गौंड ने बताया कि भूसा मशीन, रोटावेटर, थ्रेसर खरीदा था। केवल थ्रेसर की सब्सिडी 45000 रुपये मिली है। भूसा मशीन और रोटवेटर की सब्सिडी नहीं मिली है। करीब एक लाख रुपये की सब्सिडी मिली थी। रकम तो मिली नहीं बदले में केस दर्ज करा दिया गया। रकम कहां गई किसी तो पता नहीं। विशुनपुर भडेहर निवासी त्रियुगी पटेल ने बताया कि कृषि यंत्र रोटावेटर खरीदा था, लेकिन सब्सिडी की रकम नहीं मिली। सिरौली गांव के मारकंडेय, निचलौल कस्बे के लोहिया नगर के महेश यादव व बड़हरा राजा गांव की सुनीता ने भी विभाग के बाबुओं की तीखी आचोलना करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। किसानों ने कहा कि सब्सिडी मिली नहीं, केस भी झेलना पडेगा, यह कहां का न्याय है।
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फर्जी खाता खोलकर रकम का हुआ बंदरबांट
किसानों के नाम पर फर्जी खाता खोलकर रकम का बंदरबाट हुआ है। किसानों के आधार समेत जरूरी प्रपत्रों को लेकर पंजीकरण कराने के बाद रकम हजम करने का खेल हुआ है। तमाम किसानों को पता ही नहीं है कि उनका पंजीकरण कब हो गया।
किसान लगाते रहे चक्कर, रकम हो गया हजम
सब्सिडी की रकम किसानों के खाते में नहीं आती थी तो विभाग के कार्यालय पहुंचते थे। उनको बाबू प्रपत्र गड़बड़ होने की बात कर लौटा देते थे। सूत्र बता रहे हैं कि रकम ज्यादा नहीं होने के कारण किसान भी ज्यादा ध्यान नहीं देते थे। जिन किसानों की एक लाख या दो लाख सब्सिडी होती थी, उनमें खेल नहीं होता था, उनके खाते में रकम भेज दी जाती थी। कम रकम वाले किसानों को गुमराह कर रकम की बंदरबांट किया गया है।
बेकसूर किसानों को फंसाया गया
भारतीय किसान संघ के जिला उपाध्यक्ष ओम प्रकाश पांडेय ने बताया कि किसानों के सब्सिडी घोटाले की जांच ठीक ढंग से हुई तो विभाग के कई बाबू फसेंगे। किसानों को मोहरा बनाकर विभाग के अधिकारी कर्मचारी अपना दामन बचा रहे हैं। बेकसूर किसानों को फंसाया गया है।
महामारी में भी किसानों के हक पर डाका
महराजगंज। कृषि विभाग में कृषि यंत्रों और अनुदान घोटाले के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। वही हर रोज घोटाले को लेकर नए मामले उजागर हो रहे हैं। ऐसे में कृषि विभाग के जिम्मेदारों ने महामारी (कोविड काल) 2020-21 में भी किसानों के हकों पर डाका डालने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा है। कृषि विभाग के कुछ कर्मचारियों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि कोविड काल 2020-21 राजकीय कृषि बीज केंद्रों से धान की बीज लेने वाले किसानों को कोविड से सुरक्षा के लिए 900 रुपये की लागत से फेस सील्ड मास्क, गमछा, साबुन और सैनिटाइजर का वितरण करना था। लेकिन जिम्मेदारों ने बीज केंद्रों से बीज लेने वाले 3000 पंजीकृत किसानों को महज गमछा का वितरण कर लाखों की धनराशि का गोलमाल कर दिया। इतना ही नही कर्मचारियों ने आगे कहा कि अगर इसकी जांच कराई जाए तो विभाग के जिम्मेदारों की धांधली की पोल खुलकर सामने आएगी।
वरिष्ठ सहायक पर फर्जी केस दर्ज कराने का आरोप
कृषि विभाग में तैनात सहायक तकनीकी प्रबंधक किंकर सिंह ने जिलाधिकारी से शिकायत कर प्रकरण की जानकारी दी है। आरोप है कि वरिष्ठ सहायक पर किसानों समेत अन्य पर फर्जी केस दर्ज कराया है। असल कसूरवारों पर केस दर्ज नहीं हुआ है। शिकायत पत्र में कहा है कि अगस्त 2016 से कृषि विभाग महराजगंज में कार्य कर रहा हूं। कृषि विभाग की अधिकारिक वेबसाइट पीएम किसान और यूपी एग्रीकलचर पोर्टल पर मेरे सैलरी खाते को रंजिश के चलते आईडी पासवर्ड का उपयोग कर घुघली ब्लॉक में दूसरे के नाम से पंजीकृत कर दिया गया है। ताकि फर्जीवाड़ा का खुलासा करने पर बाद में हमें फंसाया जा सके। इतना ही नहीं हर रोज घोटाले की हो रही उजागर का आरोप लगाकर जिम्मेदार उनका शोषण कर रहे हैं।