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Maharajganj News: फरेंदा के जवानों ने पाकिस्तानी सेना को दिया था मुंहतोड़ जवाब

Sat, 27 Jul 2024 04:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Sat, 27 Jul 2024 04:02 AM IST
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Farenda's soldiers gave a befitting reply to the Pakistani Army
फरेंदा। 25 वर्ष पहले 26 जुलाई 1999 को देश के जवानों ने कारगिल की ऊंची पहाड़ियों पर तिरंगा झंडा लहराकर पाकिस्तानी सेना को मुंहतोड़ जबाब दिया था।करीब ढाई महीने तक चले युद्ध में भारतीय सेना के जवानों ने पाकिस्तान सेना के दांत खट्टे कर दिए थे।
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फरेंदा के सैनिक गांव उदितपुर के छह जवानों ने भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। कारगिल युद्ध हो या देश के साथ कोई भी लड़ाई हो उसमें गांव के सैनिकों ने दुश्मनों को मुंहतोड़ जबाब दिया है। युद्ध के दौरान ही सैनिक गांव के छह रणबांकुरों ने सेना में भर्ती होकर पाकिस्तानी सेना के नापाक इरादों को ध्वस्त कर देश का मान बढ़ाया।
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फरेंदा क्षेत्र के सैनिक गांव के रणबांकुरे आज भी देश की सेवा करते हुए सीमा की निगहबानी करते हैं। उदितपुर के सोनू गुरुंग, मोहित गुरुंग, संदीप गुरुंग, कमल गुरुंग, आनंद गुरुंग व सत्यम थापा ने अपने पूर्वजों से सीख लेकर 1998 में सेना में भर्ती हो गए। भर्ती होने के अगले वर्ष ही कारगिल युद्ध शुरू हो गया। जवानों की तैनाती भी कारगिल में ही थी।
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भारत को जीत दिलाने में इन जवानों की भूमिका बेहद अहम रही। गांव के मुखिया सुबेदार मेजर एसबी गुरूंग ने बताया कि देश के साथ जितने भी युद्ध हुए उसमें सैनिक गांव का विशेष योगदान रहा। प्रथम विश्व युद्ध, भारत-चीन युद्ध, भारत-पाकिस्तान युद्ध में फरेंदा के जवानों ने दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए थे। श्रीलंका के शांति सेना के दौरान भी गांव के रामू गुरुंग अपने दोनों पैर गवां कर युवाओं के लिए आदर्श बने थे।


200 वर्ष पूर्व नेपाल के बांगलुंग से आया था पांच गोरखा परिवार
नेपाल के बांगलुंग क्षेत्र से पांच परिवार पदम सिंह थापा, छविलाल गुरुंग, शमशेर सिंह, बुद्धिमान गुरुंग व हस्त बहादुर थापा क्षेत्र के बैकुंठपुर में आए थे। वर्ष 1948 में बैकुंठपुर से उदितपुर के नेपाली टोला में आकर बस गए। यहीं से सेना में भर्ती हुए और धीरे-धीरे परिवार बढ़ता गया। गांव के करीब 600 सैनिक परिवार निवास करता है। प्रति घर से एक सैनिक देश की सेवा के प्रति समर्पित है।
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