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Maharajganj News: बेटों की बेरूखी से वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर हैं बुजुर्ग

Sat, 28 Sep 2024 02:33 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Sat, 28 Sep 2024 02:33 AM IST
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Elderly people are forced to live in old age home due to indifference of sons
फरेंदा। पितृ पक्ष में लोग पितरों की शांति के लिए पिंडदान और तर्पण कर रहे हैं, लेकिन तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी है। जीवन के अंतिम समय में कई बुजुर्ग बेटों और बहू की बेरूखी के चलते जीवन के अंतिम समय में वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर हैं।
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बृहस्पतिवार को आधारशिला वृद्धाश्रम फरेंदा में बुजुर्गों से जब बातचीत की गई तो उनका गला रूंध गया। बोले बाबू जो बेटे जीते जी मां-बाप को सम्मान नहीं देते हैं, वे मरने के बाद तर्पण व पिंडदान करके क्या फायदा। बुजुर्गों को तो जीते जी सम्मान चाहिए। दो वक्त की रोटी के साथ हम सबको परिवार की खुशियां ही शेष बचता है।
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गोरखपुर के भूपेंद्र शर्मा (82) ने बताया कि घर में दो बेटे हैं। भरा पूरा परिवार है, लेकिन खुशियां नहीं हैं। हमेशा बात-बात पर विवाद होता रहता है, जिससे तंग आकर घर छोड़कर वृद्धाश्रम में जीवन जी रहा हूं।
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परसा बुजुर्ग निवासी नर्वदेश्वर (75) ने बताया कि घर में बहू और बच्चे हैं। दो बेटे भी हैं। जीते जी सम्मान नहीं मिल रहा है। मरने के बाद पिंडदान करके क्या फायदा। वहीं संतकबीरनगर के माफी परसा निवासी बेचन (75) ने रूंधे गले से कहा कि जो बेटे मां-बाप को सम्मान नहीं दे सकते मरने के बाद सम्मान देकर क्या करेंगे।

कुशीनगर के रामआसरे (70) ने बताया कि दो बेटे हैं। एक वर्ष से वृद्धाश्रम में जीवन कट रहा है। यहां ठीक है। दो बेटे होने के बाद भी परिवार में अपमान की जिंदगी जीना मजबूरी हो गया था। जब तक जिंदगी है, तब तक बेटे पूछ नहीं रहे हैं। मरने के बाद समाज को पिंडदान का दिखावा करेंगे।

बृजमनगंज क्षेत्र की अकाली (64) ने बताया कि एक बेटा है। करीब एक वर्ष से ज्यादा समय हो गया वृद्धाश्रम में रहकर जिंदगी गुजार रही हूं। परिवार में हमेशा अनबन होता रहता था। समय से खाना और इलाज नहीं मिलता था। मजबूर होकर आश्रम में पहुंची यहां पर समय से भोजन व दवा मिल जाता है।


वृद्धाश्रम में पहुंचने वाले बुजुर्गों का सही ढंग से देखभाल और इलाज प्राथमिकता रहती है। उनको किसी भी प्रकार की समस्या न हो इसका ध्यान दिया जाता है। बुजुर्गों की सेवा ईश्वर सेवा के समान है। उनकी सेवा करने से मन को संतुष्टि मिलती है।
-प्रदीप कटियार, प्रबंधक, आधारशिला वृद्धाश्रम फरेंदा
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