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फूस की झोपड़ी में छत के सपने देख-देख कट रही जिंदगी

Wed, 17 Aug 2022 11:52 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 17 Aug 2022 11:52 PM IST
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Dreaming of a roof in a thatched hut, life is being cut off
श्यामदेउरवा की नीलम बच्चों के साथ झोपड़ी में बैठी हुई। संवाद - फोटो : MAHARAJGANJ
फूस की झोपड़ी में छत के सपने देख-देख कट रही जिंदगी
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पात्र होने के बावजूद नहीं मिल रहा प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ
महराजगंज। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास के लिए आवेदन किए तीन साल हो गए। तब से कइयों को घर मिला, लेकिन मेरा नंबर नहीं आया। प्रधान से जब भी पूछिए, कहते हैं अगली बार। सात लोगों का परिवार है। रहने को फूस की झोपड़ी है, जिसमें छत के सपने देख-देख कर जिंदगी कट रही है। पता नहीं सपना पूरा होगा भी या नहीं। यह दर्द है परतावल ब्लॉक के श्यामदेउरवा गांव की नीलम का।
जिला मुख्यालय से गोरखपुर की ओर चलें तो करीब 32 किमी की दूरी तय करने पर श्यामदेउरवा गांव आता है। थाना गेट से गांव में घुसने पर आगे पंचायत भवन है। उसके दाहिनी ओर दलित बस्ती है। बस्ती के आखिर में टूटी-फूटी झोपड़ी दिखेगी, जिसमें नीलम का परिवार रहता है। खेती के लिए थोड़ी सी जमीन है, जो परिवार का पेट भरने के लिए काफी नहीं है। पति अरविंद मजदूरी करते हैं, तब जाकर दो वक्ता का भोजन मिलता है।
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नीलम ने बताया कि कभी-कभी पति को काम नहीं मिलता। तब किसी से उधार लेकर काम चलाना पड़ता है। दो बच्चे हैं शिखा (4) और सौम्या (2)। जेठानी रीता भी साथ रहती हैं। उनके भी दो बच्चे सीमरन (12) एवं सत्यम (8) हैं। जेठ की मौत हो चुकी है। छोटी सी झोपड़ी में बड़ी मुश्किल से गुजारा होता है। अगर आवास मिल जाता तो उनकी जिंदगी संवर जाती।
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श्यामदेउरवा गांव की मधुबाला की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। खेती के लिए जमीन नहीं है। परिवार झोपड़ी में जिंदगी गुजार रहा है। पति मनोज चौहान मजदूरी करते हैं। मधुबाला ने बताया कि आवेदन के बाद से जिम्मेदारों से गुहार लगाकर थक चुकी हैं। हर बार बस आश्वासन मिलता है।
पनियरा ब्लॉक की ग्रामसभा बैदा के पोखरहवां टोले में रोहित राजभर खपरैल के जर्जर घर में जिंदगी गुजार रहे हैं। रोहित ने बताया कि 15 वर्ष पूर्व बीमार से उनके माता-पिता की मौत हो गई थी। इसी साल भाई की भी मौत हो गई। उनके पास रहने को घर नहीं है। बड़े पिता छोटेलाल राजभर के साथ रहते हैं। थोड़ी सी जमीन है, जिस पर सब्जी की खेती कर दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करते हैं। बताया कि आवास के लिए उन्होंने एक साल पूर्व आवेदन किया था, लेकिन अब तक उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला।
ग्रामसभा देवीपुर की रहने वाली विमला देवी ने का परिवार भी झोपड़ी में रहता है। पति जय प्रकाश बाहर रहकर मजदूरी करते हैं। 15 डिस्मिल खेत हैं। उन्होंने बताया कि प्रधान से आवास के लिए कई बार गुहार लगा चुकी हैं, लेकिन पात्र होने के बाद भी उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल रहा है।

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कोट--
- सभी पात्रों को योजना का लाभ दिलाने के निर्देश दिए गए हैं। अगर किसी को आवास नहीं मिला है तो पात्रता के आधार उसे जल्द ही आवास देने का प्रयास किया जाएगा।
- सत्येंद्र कुमार, जिलाधिकारी
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