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जिला अस्पताल में हृदय रोग के डॉक्टर नहीं, बाहर इलाज को विवश हैं मरीज
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जिला अस्पताल में हृदय रोग के डॉक्टर नहीं, बाहर इलाज को विवश हैं मरीज
निजी डॉक्टरों से कराना पड़ता है महंगा इलाज, गोरखपुर मेडिकल कॉलेज भी रेफर होते हैं रोगी
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। अगर आप को दिल का दौरा पड़ेगा तो जिला अस्पताल में इलाज की सुविधा नहीं है। यहां हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। इससे मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में महंगा इलाज कराना पड़ता है। अगर यहां इलाज की सुविधा मिलने में देरी होती है तो मरीजों को इलाज कराने के लिए 60 किलोमीटर दूर मेडिकल कालेज गोरखपुर जाना पड़ता है। जिम्मेदारों ने समस्या के समाधान के लिए कोई सार्थक पहल नहीं की है। हृदय रोग के मरीजों को इलाज कराने में दुश्वारियां बढ़ गई हैं।
100 बेड के जिला अस्पताल में 17 डॉक्टर की कमी है। इनमें सबसे प्रमुख हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं होना है। जिला अस्पताल में औसतन एक दिन में 700 से अधिक मरीज अस्पताल आते हैं। इनमें हर बीमारी के रोगी आते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी हृदय रोगियों को होती है, उनके इलाज के लिए बेहतर सुविधा नहीं है। रात में अगर किसी को दिल का दौरा पड़ जाए तो उसे निजी अस्पतालों में शरण लेनी पड़ती है। अगर यहां भी डॉक्टर नहीं मिलते हैं तो मरीज को गोरखपुर मेडिकल कालेज जाना पड़ता है। गंभीर हालत होने पर लोगों की जान चली जाती है। औसतन एक माह में करीब 10 से 12 हृदय रोगी इमरजेंसी से गोरखपुर मेडिकल कालेज रेफर होते हैं।
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गोल्डन ऑवर का उन मामलों पर लागू होता है, जिसमें मरीज को कोई गंभीर चोट आई हो अथवा कोई अन्य मेडिकल इमरजेंसी हो। गंभीर चोट के बाद का पहला एक घंटा महत्वपूर्ण होता है, जिसमें सही इलाज और प्रबंधन से मरीज की जान अथवा उसके शरीर के अंगों को ख़राब होने से बचाया जा सकता है।
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डॉ. एवी त्रिपाठी, फिजिशियन, जिला अस्पताल
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क्या है गोल्डन ऑवर
दुर्घटना होने पर घायल व्यक्ति को तुरंत विशेष समयावधि (1 घंटे के अंदर) अस्पताल में पहुंचाने के समय को गोल्डन ऑवर कहते हैं। इस समय के दौरान उसे सहायता पहुंचाने पर घायल की जिंदगी बचाई जा सकती है।
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केस नंबर एक
राजीव नगर मोहल्ले में नंदकिशोर कसौधन हृदय रोग से पीड़ित हैं। उन्होंने बताया कि गुड़गांव जाकर इलाज कराना पड़ता है। अगर जिला अस्पताल में सुविधा रहती तो समस्या नहीं होती। सस्ते में इलाज हो जाता।
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केस नंबर दो
सिंदुरिया की रहने वाली साबरा खातून ने बताया कि वह हृदय रोग से पीड़ित हैं। गोरखपुर जाकर इलाज कराना पड़ता है। वहां जाने में समय लगने के साथ ही ज्यादा रकम भी खर्च होता है। अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं हैं।
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वर्तमान में उपलब्ध संसाधनों में बेहतर ढंग से इलाज करने का प्रयास जारी है। चिकित्सकों के कमी की सूचना शासन को भेज दी गई है।
डॉ. एएम भाष्कर, सीएमएस
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निजी डॉक्टरों से कराना पड़ता है महंगा इलाज, गोरखपुर मेडिकल कॉलेज भी रेफर होते हैं रोगी
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। अगर आप को दिल का दौरा पड़ेगा तो जिला अस्पताल में इलाज की सुविधा नहीं है। यहां हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। इससे मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में महंगा इलाज कराना पड़ता है। अगर यहां इलाज की सुविधा मिलने में देरी होती है तो मरीजों को इलाज कराने के लिए 60 किलोमीटर दूर मेडिकल कालेज गोरखपुर जाना पड़ता है। जिम्मेदारों ने समस्या के समाधान के लिए कोई सार्थक पहल नहीं की है। हृदय रोग के मरीजों को इलाज कराने में दुश्वारियां बढ़ गई हैं।
100 बेड के जिला अस्पताल में 17 डॉक्टर की कमी है। इनमें सबसे प्रमुख हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं होना है। जिला अस्पताल में औसतन एक दिन में 700 से अधिक मरीज अस्पताल आते हैं। इनमें हर बीमारी के रोगी आते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी हृदय रोगियों को होती है, उनके इलाज के लिए बेहतर सुविधा नहीं है। रात में अगर किसी को दिल का दौरा पड़ जाए तो उसे निजी अस्पतालों में शरण लेनी पड़ती है। अगर यहां भी डॉक्टर नहीं मिलते हैं तो मरीज को गोरखपुर मेडिकल कालेज जाना पड़ता है। गंभीर हालत होने पर लोगों की जान चली जाती है। औसतन एक माह में करीब 10 से 12 हृदय रोगी इमरजेंसी से गोरखपुर मेडिकल कालेज रेफर होते हैं।
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गोल्डन ऑवर का उन मामलों पर लागू होता है, जिसमें मरीज को कोई गंभीर चोट आई हो अथवा कोई अन्य मेडिकल इमरजेंसी हो। गंभीर चोट के बाद का पहला एक घंटा महत्वपूर्ण होता है, जिसमें सही इलाज और प्रबंधन से मरीज की जान अथवा उसके शरीर के अंगों को ख़राब होने से बचाया जा सकता है।
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डॉ. एवी त्रिपाठी, फिजिशियन, जिला अस्पताल
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क्या है गोल्डन ऑवर
दुर्घटना होने पर घायल व्यक्ति को तुरंत विशेष समयावधि (1 घंटे के अंदर) अस्पताल में पहुंचाने के समय को गोल्डन ऑवर कहते हैं। इस समय के दौरान उसे सहायता पहुंचाने पर घायल की जिंदगी बचाई जा सकती है।
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केस नंबर एक
राजीव नगर मोहल्ले में नंदकिशोर कसौधन हृदय रोग से पीड़ित हैं। उन्होंने बताया कि गुड़गांव जाकर इलाज कराना पड़ता है। अगर जिला अस्पताल में सुविधा रहती तो समस्या नहीं होती। सस्ते में इलाज हो जाता।
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केस नंबर दो
सिंदुरिया की रहने वाली साबरा खातून ने बताया कि वह हृदय रोग से पीड़ित हैं। गोरखपुर जाकर इलाज कराना पड़ता है। वहां जाने में समय लगने के साथ ही ज्यादा रकम भी खर्च होता है। अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं हैं।
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वर्तमान में उपलब्ध संसाधनों में बेहतर ढंग से इलाज करने का प्रयास जारी है। चिकित्सकों के कमी की सूचना शासन को भेज दी गई है।
डॉ. एएम भाष्कर, सीएमएस