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Maharajganj News: चचेरे भाई और भतीजी की हत्या करने वाले को फांसी की सजा
Sat, 17 Feb 2024 02:12 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sat, 17 Feb 2024 02:12 AM IST
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महराजगंज। जिले के पुरंदरपुर क्षेत्र में करीब 10 साल पहले जमीन के लिए चचेरे भाई और भतीजी की हत्या करने वाले को न्यायालय ने फांसी की सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश (प्रथम) पवन कुमार श्रीवास्तव ने वर्ष 2014 में हुए इस दोहरे हत्याकांड को निर्मम कृत्य बताया।
मानिक तलाव, टोला चांदीपुर के रहने वाले राजेंद्र चौधरी ने दो अप्रैल 2014 को थाना पुरंदरपुर में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उनका और चाचा यमुना चौधरी से आठ एकड़ जमीन को लेकर विवाद था। बाद में आपस में सुलह हो गया। चाचा का पुत्र बैजू उर्फ बैजनाथ जब बड़ा हुआ तो उसी जमीन के लिए विवाद करने लगा। राजेंद्र के अनुसार इसी रंजिश में बैजू ने 2 अप्रैल 2014 को बेटी ज्ञानती व बड़े भाई निर्मल चौधरी की गांव में धारदार हथियार से हत्या कर दी।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि मामले में थाना पुरंदरपुर में केस दर्ज कर आरोप पत्र कोर्ट में पेश किया गया। 11 गवाह और 22 दस्तावेजी साक्ष्य से दोषी को कड़ी सजा की मांग की गई। न्यायालय ने साक्ष्य के आधार पर बैजू उर्फ बैजनाथ को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत फांसी की सजा सुनाई। बता दें, जिले के किसी अदालत ने किसी दोषी को दूसरी बार फांसी की सजा सुनाई है। इससे पहले वर्ष 2006 में फांसी की सजा सुनाई गई थी।
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मानिक तलाव, टोला चांदीपुर के रहने वाले राजेंद्र चौधरी ने दो अप्रैल 2014 को थाना पुरंदरपुर में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उनका और चाचा यमुना चौधरी से आठ एकड़ जमीन को लेकर विवाद था। बाद में आपस में सुलह हो गया। चाचा का पुत्र बैजू उर्फ बैजनाथ जब बड़ा हुआ तो उसी जमीन के लिए विवाद करने लगा। राजेंद्र के अनुसार इसी रंजिश में बैजू ने 2 अप्रैल 2014 को बेटी ज्ञानती व बड़े भाई निर्मल चौधरी की गांव में धारदार हथियार से हत्या कर दी।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि मामले में थाना पुरंदरपुर में केस दर्ज कर आरोप पत्र कोर्ट में पेश किया गया। 11 गवाह और 22 दस्तावेजी साक्ष्य से दोषी को कड़ी सजा की मांग की गई। न्यायालय ने साक्ष्य के आधार पर बैजू उर्फ बैजनाथ को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत फांसी की सजा सुनाई। बता दें, जिले के किसी अदालत ने किसी दोषी को दूसरी बार फांसी की सजा सुनाई है। इससे पहले वर्ष 2006 में फांसी की सजा सुनाई गई थी।
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