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एंबुलेंस के अभाव में महिला ने दम तोड़ा
अमर उजाला ब्यूरो/फरेंदा
Updated Sun, 18 Oct 2015 12:15 AM IST
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एंबुलेंस रहते हुए भी चालक की उदासीनता से एंबुलेंस न पहुंचने के कारण बनकटी स्वास्थ्य केंद्र पर एक गर्भवती ने दम तोड़ दिया। यहां से महिला को जिला अस्पताल रेफर किया गया था।
फरेंदा क्षेत्र के उदितपर निवासी रामधनी की पत्नी सुमित्रा को शुक्रवार की दोपहर में प्रसव पीड़ा शुरू हुई। उसे घर के लोग अपने निजी साधन से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनकटी ले आए। शनिवार को दिन में तीन बजे महिला ने मरे हुए बच्चे को जन्म दिया। बच्चा पैदा होने के बाद अचानक महिला की हालत खराब होने लगी। तब डॉ मुकेश गुप्ता ने महिला का प्राथमिक इलाज किया। हालत में सुधार न होते देखकर डॉ ने महिला को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। अस्पताल के डॉ मुकेश गुप्ता और फार्मासिस्ट प्रमोद पांडेय, वार्ड ब्वॉय संदीप श्रीवास्तव सहित घर के लोग एंबुलेंस ड्राइवर से काफी सिफारिश करते रहे लेकिन वे नहीं ले गए। एंबुलेंस के ईएमटी अमोद पाल और महेन्द्रधर दुबे ने कहा कि हमें लखनऊ से आईडी नहीं मिल रही है तो कैसे ले जाएं। जिला के अधिकारी भी हम लोगों को मना किए हैं। ऐसे में हम अपने मन से एंबुलेंस नहीं ले जा सकते। लोगों के काफी प्रयास के बाद भी एंबुलेंस कर्मचारी नहीं पसीजे। महिला ने अस्पताल में ही दम तोड़ दिया। पति रामधनी ने कहा कि अगर समय से एंबुलेंस मिल गई होती तो पत्नी की जान बच जाती। डॉ मुकेश गुप्ता का कहना है कि महिला की हालत नाजुक देखकर समय से रेफर कर दिया गया लेकिन एंबुलेंस के कर्मचारियों के मनमानेपन के कारण उसकी मौत हो गई। जबकि अस्पताल में मौजूद 102 नंबर की दो एंबुलेंस हैं।
गाड़ी खाली नहीं है
सीएचसी अस्पताल में गर्भवती पत्नी को लेकर पहुंचे सेमरा महराज निवासी अनिल गुप्ता ने बताया कि मेरी पत्नी अनीता को प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो 102 नंबर पर काल किया तो वहां से लोग कहे कि गाड़ी खाली नहीं है। तो परेशान होकर प्राइवेट गाड़ी से अस्पताल पहुंचा तो देखा कि दोनों गाड़ियां अस्पताल परिसर में खड़ी हैं।
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फरेंदा क्षेत्र के उदितपर निवासी रामधनी की पत्नी सुमित्रा को शुक्रवार की दोपहर में प्रसव पीड़ा शुरू हुई। उसे घर के लोग अपने निजी साधन से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनकटी ले आए। शनिवार को दिन में तीन बजे महिला ने मरे हुए बच्चे को जन्म दिया। बच्चा पैदा होने के बाद अचानक महिला की हालत खराब होने लगी। तब डॉ मुकेश गुप्ता ने महिला का प्राथमिक इलाज किया। हालत में सुधार न होते देखकर डॉ ने महिला को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। अस्पताल के डॉ मुकेश गुप्ता और फार्मासिस्ट प्रमोद पांडेय, वार्ड ब्वॉय संदीप श्रीवास्तव सहित घर के लोग एंबुलेंस ड्राइवर से काफी सिफारिश करते रहे लेकिन वे नहीं ले गए। एंबुलेंस के ईएमटी अमोद पाल और महेन्द्रधर दुबे ने कहा कि हमें लखनऊ से आईडी नहीं मिल रही है तो कैसे ले जाएं। जिला के अधिकारी भी हम लोगों को मना किए हैं। ऐसे में हम अपने मन से एंबुलेंस नहीं ले जा सकते। लोगों के काफी प्रयास के बाद भी एंबुलेंस कर्मचारी नहीं पसीजे। महिला ने अस्पताल में ही दम तोड़ दिया। पति रामधनी ने कहा कि अगर समय से एंबुलेंस मिल गई होती तो पत्नी की जान बच जाती। डॉ मुकेश गुप्ता का कहना है कि महिला की हालत नाजुक देखकर समय से रेफर कर दिया गया लेकिन एंबुलेंस के कर्मचारियों के मनमानेपन के कारण उसकी मौत हो गई। जबकि अस्पताल में मौजूद 102 नंबर की दो एंबुलेंस हैं।
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गाड़ी खाली नहीं है
सीएचसी अस्पताल में गर्भवती पत्नी को लेकर पहुंचे सेमरा महराज निवासी अनिल गुप्ता ने बताया कि मेरी पत्नी अनीता को प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो 102 नंबर पर काल किया तो वहां से लोग कहे कि गाड़ी खाली नहीं है। तो परेशान होकर प्राइवेट गाड़ी से अस्पताल पहुंचा तो देखा कि दोनों गाड़ियां अस्पताल परिसर में खड़ी हैं।
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