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जाम लगाने पर पुलिस ने पटकी लाठी
अमर उजाला ब्यूरो /महराजगंज
Updated Fri, 26 Feb 2016 12:30 AM IST
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बागापार गोलीकांड में मुख्य अभियुक्त की गिरफ्तारी न होने से गुस्साए गांव वालों ने बागापर- चिउरहां झनझनपुर मार्ग सुबह जाम कर दिया। जाम हटवाने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। लोगों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की।
सदर कोतवाली क्षेत्र के बागापार में पांच दिन पहले मुर्गे के चोंच मारने के विवाद में बीच बचाव करने गए सुदामा यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। छह लोगों पर केस दर्ज हुआ था। तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार कर पुलिस पहले ही जेल भेज चुकी है। मुख्य अभियुक्त भाजपा नेता शिवाकांत तिवारी की गिरफ्तारी नहीं कर सकी है।
गिरफ्तारी न होने से गुस्साए सुदामा के घर वाले गांव वालों के साथ बागापार-चिउरहां झनझनपुर मार्ग जाम कर दिया। उनका कहना था कि मुख्य अभियुक्त व दो बचे अभियुक्तों को पुलिस गिरफ्तार नहीं करना चाहती है। अभियुक्त खुलेआम घूम रहे हैं। पुलिस उन्हें सरेंडर करने का मौका दे रही है।
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जब तक गिरफ्तारी नहीं हो जाती है। वे चक्का जाम नहीं समाप्त करेंगे। इस बीच पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और उन्हें समझाने का प्रयास की लेकिन गांव वाले नहीं माने। बताया जा रहा है कि करीब दो घंटे बाद एसडीएम व सीओ के पहुंचने के बाद पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए बल प्रयोग कर दिया।
जिससे गांव वालों का गुस्सा और फूट पड़ा। उन्होंने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी किया। बाद में सीओ के आश्वासन पर गांव वाले माने।
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सदर कोतवाली क्षेत्र के बागापार में पांच दिन पहले मुर्गे के चोंच मारने के विवाद में बीच बचाव करने गए सुदामा यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। छह लोगों पर केस दर्ज हुआ था। तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार कर पुलिस पहले ही जेल भेज चुकी है। मुख्य अभियुक्त भाजपा नेता शिवाकांत तिवारी की गिरफ्तारी नहीं कर सकी है।
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गिरफ्तारी न होने से गुस्साए सुदामा के घर वाले गांव वालों के साथ बागापार-चिउरहां झनझनपुर मार्ग जाम कर दिया। उनका कहना था कि मुख्य अभियुक्त व दो बचे अभियुक्तों को पुलिस गिरफ्तार नहीं करना चाहती है। अभियुक्त खुलेआम घूम रहे हैं। पुलिस उन्हें सरेंडर करने का मौका दे रही है।
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जब तक गिरफ्तारी नहीं हो जाती है। वे चक्का जाम नहीं समाप्त करेंगे। इस बीच पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और उन्हें समझाने का प्रयास की लेकिन गांव वाले नहीं माने। बताया जा रहा है कि करीब दो घंटे बाद एसडीएम व सीओ के पहुंचने के बाद पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए बल प्रयोग कर दिया।
जिससे गांव वालों का गुस्सा और फूट पड़ा। उन्होंने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी किया। बाद में सीओ के आश्वासन पर गांव वाले माने।