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गुटबंदी में हुई थी जहीर की हत्या
अमर उजाला ब्यूराे
Updated Wed, 07 Dec 2016 12:37 AM IST
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रोते-बिलखते मृतक के परिजन।
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चौक बाजार। क्षेत्र के परसौनी निवासी और ब्लॉक कार्यालय में उर्दू अनुवादक पद पर तैनात जाकिर अंसारी हत्याकांड में जाकिर के पिता के तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर परसौनी निवासी जहुर आलम को गिरफ्तार कर लिया है। मंगलवार को उसे जेल भेज दिया गया। चौक पुलिस जाकिर हत्याकांड की तह तक जाने में जुटी है। प्रारंभिक जांच में हत्या की वजह परसौनी स्थित मरदसा फखरूल उलूम की छात्रवृत्ति की जांच बताई जा रही है। ग्राम पंचायत चुनाव एवं बकरीद की नमाज को लेकर हुए विवाद के बाद जाकिर अंसारी को विरोधियों ने निशाने पर ले लिया था।
जाकिर बचपन से मृदुल स्वभाव के कारण निचलौल ब्लाक एवं अपने ग्राम सभा में लोकप्रिय रहे। उन्होंने तीन साल पहले कोर्ट के माध्यम से परसौनी मदरसा फखरूल उलूम की छात्रवृत्ति की जांच कराई थी। चौक पुलिस की विवेचना में गड़बड़ी पाई गई थी। ऐसे विद्यार्थियों के नाम पर छात्रवृत्ति का भुगतान हो गया था, जो कभी मदरसे में पढ़े ही नहीं थे। इस कारण जाकिर विरोधियों के निशाने पर थे। मदरसा फखरूल उलूम का विवादों से नाता रहा है। परसौनी ग्राम सभा दो खेमों में बंटा हुआ है। एक खेमा मदरसा शिक्षकों का तथा दूसरा खेमा मदरसा कमेटी के सदस्यों का का विरोध करने वालों का। उर्दू अनुवादक जाकिर मदरसा विरोधी खेमे के थे। इसी कारण शक की सूई उनके विरोधियों पर जाती है।
बता दें कि सोमवार शाम 6 बजे जाकिर निचलौल से ग्राम सभा के ही रेयाज के साथ बाइक से घर आ रहे थे। अभी पड़री पुल के आगे बढ़े ही थे कि हमलावरों ने ओवर टेक कर जाकिर के सीने में गोली मार दी थी। हमला होते ही पीछे बैठा रेयाज भागने लगा। हमलावरों ने रेयाज पर भी गोली चलाई किंतु वह बच निकला। रेयाज ने जाकिर को गोली लगने की सूचना घरवालों को दी। आनन फानन मिठौरा सीएचसी ले जाया गया। वहां पता चला कि सीने के बगल में गोली फंस गई है। वहां से जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां से भी डाक्टरों ने गोरखपुर मेडिकल कालेज के लिए रेफर कर दिया। रास्ते में जाकिर की मौत हो गई थी। पत्नी रकिबुन निशा एवं तीन बच्चो का रो-रो कर बुरा हाल है।
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जाकिर बचपन से मृदुल स्वभाव के कारण निचलौल ब्लाक एवं अपने ग्राम सभा में लोकप्रिय रहे। उन्होंने तीन साल पहले कोर्ट के माध्यम से परसौनी मदरसा फखरूल उलूम की छात्रवृत्ति की जांच कराई थी। चौक पुलिस की विवेचना में गड़बड़ी पाई गई थी। ऐसे विद्यार्थियों के नाम पर छात्रवृत्ति का भुगतान हो गया था, जो कभी मदरसे में पढ़े ही नहीं थे। इस कारण जाकिर विरोधियों के निशाने पर थे। मदरसा फखरूल उलूम का विवादों से नाता रहा है। परसौनी ग्राम सभा दो खेमों में बंटा हुआ है। एक खेमा मदरसा शिक्षकों का तथा दूसरा खेमा मदरसा कमेटी के सदस्यों का का विरोध करने वालों का। उर्दू अनुवादक जाकिर मदरसा विरोधी खेमे के थे। इसी कारण शक की सूई उनके विरोधियों पर जाती है।
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बता दें कि सोमवार शाम 6 बजे जाकिर निचलौल से ग्राम सभा के ही रेयाज के साथ बाइक से घर आ रहे थे। अभी पड़री पुल के आगे बढ़े ही थे कि हमलावरों ने ओवर टेक कर जाकिर के सीने में गोली मार दी थी। हमला होते ही पीछे बैठा रेयाज भागने लगा। हमलावरों ने रेयाज पर भी गोली चलाई किंतु वह बच निकला। रेयाज ने जाकिर को गोली लगने की सूचना घरवालों को दी। आनन फानन मिठौरा सीएचसी ले जाया गया। वहां पता चला कि सीने के बगल में गोली फंस गई है। वहां से जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां से भी डाक्टरों ने गोरखपुर मेडिकल कालेज के लिए रेफर कर दिया। रास्ते में जाकिर की मौत हो गई थी। पत्नी रकिबुन निशा एवं तीन बच्चो का रो-रो कर बुरा हाल है।
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