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धोखाधड़ी में सिसवा चेयरमैन फंसे
अमर उजाला ब्यूरो /महराजगंज
Updated Wed, 13 Jan 2016 12:09 AM IST
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धोखाधड़ी और गबन के मामले में कोर्ट ने सिसवा नगर पंचायत अध्यक्ष पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां आरोपों से संबंधित शिकायत पत्र दिया गया था। सात जनवरी को कोठीभार पुलिस को केस दर्ज करने का आदेश हुआ है। एसओ का कहना है कि अभी कोर्ट आदेश की कॉपी नहीं मिली है।
कोठीभार क्षेत्र के सिसवा बाजार निवासी रोशन कुमार मद्देशिया ने प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि चेयरमैन अशोक कुमार ने कूटरचित बिल बाउचर बनाकर एक ही काम का दो बार भुगतान करा लिया गया। इसके अलावा अभिलेखों में छेड़छाड़ कर पूर्व में जारी नगर के नागरिकों के भूमि भवन प्रमाण पत्र आदि को फर्जीवाड़ा बताकर दोबारा जारी करने के नाम पर धन उगाही की जा रही है।
पद का दुरुपयोग कर सरकारी धन का उपयोग स्वयं के लिए किया जा रहा है। कहा है कि 16 जनवरी 15 को निविदा प्रकाशित की गई थी। जिसमें सत्यनारायण जायसवाल के मकान से पूरब ओमप्रकाश दुबे के मकान तक सीसी इंटरलॉकिंग व नाली निर्माण के लिए नौ लाख 82 हजार का प्रकाशन किया गया। जबकि उक्त के संबंध में निविदा पूर्व में भी प्रकाशित हुई थी और निर्माण कार्य भी पूरा हो चुका था।
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यहां पुरानी ईंट को निकालकर बाद में वहीं ईंट लगाकर भुगतान करा लिया गया। इस संबंध में मुकदमा दर्ज करने के लिए स्थानीय पुलिस को तहरीर दी गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में एसपी को रजिस्टर्ड डाक से मुकदमा दर्ज करने के लिए भेजा गया लेकिन कुछ नहीं हुआ। अंत में शिकायतकर्ता ने कोर्ट का सहारा लिया।
सारे कागजातों के आधार पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अध्यक्ष पर सात जनवरी को धोखाधड़ी, गबन व अन्य धाराओं में मुकदमा का आदेश थानाध्यक्ष को दिया।पूछे जाने पर थानाध्यक्ष विक्रम सिंह का कहना है कि कोर्ट के आदेश की काूपी नहीं मिली है। कॉपी मिलने के बाद मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
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कोठीभार क्षेत्र के सिसवा बाजार निवासी रोशन कुमार मद्देशिया ने प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि चेयरमैन अशोक कुमार ने कूटरचित बिल बाउचर बनाकर एक ही काम का दो बार भुगतान करा लिया गया। इसके अलावा अभिलेखों में छेड़छाड़ कर पूर्व में जारी नगर के नागरिकों के भूमि भवन प्रमाण पत्र आदि को फर्जीवाड़ा बताकर दोबारा जारी करने के नाम पर धन उगाही की जा रही है।
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पद का दुरुपयोग कर सरकारी धन का उपयोग स्वयं के लिए किया जा रहा है। कहा है कि 16 जनवरी 15 को निविदा प्रकाशित की गई थी। जिसमें सत्यनारायण जायसवाल के मकान से पूरब ओमप्रकाश दुबे के मकान तक सीसी इंटरलॉकिंग व नाली निर्माण के लिए नौ लाख 82 हजार का प्रकाशन किया गया। जबकि उक्त के संबंध में निविदा पूर्व में भी प्रकाशित हुई थी और निर्माण कार्य भी पूरा हो चुका था।
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यहां पुरानी ईंट को निकालकर बाद में वहीं ईंट लगाकर भुगतान करा लिया गया। इस संबंध में मुकदमा दर्ज करने के लिए स्थानीय पुलिस को तहरीर दी गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में एसपी को रजिस्टर्ड डाक से मुकदमा दर्ज करने के लिए भेजा गया लेकिन कुछ नहीं हुआ। अंत में शिकायतकर्ता ने कोर्ट का सहारा लिया।
सारे कागजातों के आधार पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अध्यक्ष पर सात जनवरी को धोखाधड़ी, गबन व अन्य धाराओं में मुकदमा का आदेश थानाध्यक्ष को दिया।पूछे जाने पर थानाध्यक्ष विक्रम सिंह का कहना है कि कोर्ट के आदेश की काूपी नहीं मिली है। कॉपी मिलने के बाद मुकदमा दर्ज किया जाएगा।