{"_id":"6aa6f46af0cf13b51c01edc7","slug":"police-confirmed-that-the-disability-certificate-was-issued-from-the-cmos-office-itself-fatehpur-news-c-217-1-sknp1022-162407-2026-09-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Fatehpur News: पुलिस ने माना, सीएमओ दफ्तर से ही जारी हुआ था दिव्यांग प्रमाणपत्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Fatehpur News: पुलिस ने माना, सीएमओ दफ्तर से ही जारी हुआ था दिव्यांग प्रमाणपत्र
विज्ञापन
फतेहपुर। महाठग का दिव्यांग प्रमाणपत्र सीएमओ कार्यालय से जारी हुआ था। ये बात पुलिस ने विवेचना में सही मानी है। पुलिस के अनुसार दुर्घटना में आई चोटों के आधार पर वर्ष 2021 में उसने दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाया और दिव्यांग पेंशन का लाभ लेना शुरू किया। बाद में दिव्यांगता ठीक होने के बावजूद उसने दोबारा मेडिकल और शारीरिक परीक्षण नहीं कराया और पेंशन लेता रहा।
दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी कार्यालय के वरिष्ठ सहायक शशांक कुमार की ओर से फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र से पेंशन का लाभ लेने के आरोप में 10 सितंबर को प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इसमें अर्जुन सिंह के साथ पुत्र सुमित सिंह और पत्नी सुनीता पर धोखाधड़ी व कूटरचना के आरोप लगाए गए हैं।
विवेचना के दौरान पुलिस ने रामपुर थरियांव निवासी सुमित सिंह के खिलाफ धारा 338 बीएनएस की बढ़ोतरी की। इस धारा के तहत दस्तावेज की जालसाजी का आरोप होता है। पूछताछ में सुमित सिंह ने बताया कि दुर्घटना में चोट लगने के बाद उसने दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाया था।
विज्ञापन
दिव्यांगता ठीक होने के बाद रुपये के लालच में मेडिकल और शारीरिक परीक्षण के लिए कई बार बुलाए जाने के बावजूद वह उपस्थित नहीं हुआ और पेंशन लेता रहा। हालांकि सीएमओ कार्यालय की ओर से दिव्यांग प्रमाणपत्र जाली होने की रिपोर्ट दी गई थी।
आरोपी के खिलाफ पिछले तीन वर्ष में एससी-एसटी, पाक्सो, मारपीट, धमकी और धोखाधड़ी के आठ मुकदमे पाए गए हैं। कोतवाल हेमंत मिश्रा ने बताया कि मामले की विवेचना की जा रही है।
विज्ञापन
दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी कार्यालय के वरिष्ठ सहायक शशांक कुमार की ओर से फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र से पेंशन का लाभ लेने के आरोप में 10 सितंबर को प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इसमें अर्जुन सिंह के साथ पुत्र सुमित सिंह और पत्नी सुनीता पर धोखाधड़ी व कूटरचना के आरोप लगाए गए हैं।
विज्ञापन
विवेचना के दौरान पुलिस ने रामपुर थरियांव निवासी सुमित सिंह के खिलाफ धारा 338 बीएनएस की बढ़ोतरी की। इस धारा के तहत दस्तावेज की जालसाजी का आरोप होता है। पूछताछ में सुमित सिंह ने बताया कि दुर्घटना में चोट लगने के बाद उसने दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाया था।
विज्ञापन
दिव्यांगता ठीक होने के बाद रुपये के लालच में मेडिकल और शारीरिक परीक्षण के लिए कई बार बुलाए जाने के बावजूद वह उपस्थित नहीं हुआ और पेंशन लेता रहा। हालांकि सीएमओ कार्यालय की ओर से दिव्यांग प्रमाणपत्र जाली होने की रिपोर्ट दी गई थी।
आरोपी के खिलाफ पिछले तीन वर्ष में एससी-एसटी, पाक्सो, मारपीट, धमकी और धोखाधड़ी के आठ मुकदमे पाए गए हैं। कोतवाल हेमंत मिश्रा ने बताया कि मामले की विवेचना की जा रही है।