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हाई कोर्ट ने देवरिया के एसोशिएट डीआईओएस को बर्खास्त करने का दिया आदेश

Mon, 21 Aug 2017 11:59 PM IST
Updated Mon, 21 Aug 2017 11:59 PM IST
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हाई कोर्ट ने देवरिया के एसोशिएट डीआईओएस को बर्खास्त करने का दिया आदेश
महराजगंज। सर्व शिक्षा अभियान में घोटाले को लेकर सुर्खियों में रहे तत्कालीन बीएसए डॉ. रामहजुर प्रसाद की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। इस मामले में दाखिल पीआईएल की सुनवाई में हाईकोर्ट ने तत्कालीन बीएसए डॉ. रामहजुर प्रसाद को बर्खास्त करने और तत्कालीन प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा अजय कुमार सिंह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया है। हाईकोर्ट के कडे़ रुख से मामले से जुडे़ आरोपियों की बेचैनी बढ़ गई है। हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव को स्पष्ट आदेश दिया है कि वे 10 दिन के अंदर कार्रवाई से कोर्ट को अवगत कराएं। महराजगंज के तत्कालीन बीएसए डॉ. रामहजूर प्रसाद फिलहाल देवरिया में एसोसिएट डीआईओएस पद पर तैनात हैं।
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मार्च 2010 में सर्व शिक्षा अभियान में करोड़ों का घपला सामने आया था। इसकी कलई खुलते ही विभाग में हड़कंप मच गया था। 98 लाख 60 हजार रुपये का भुगतान 21 दिसंबर 2009 कैरियर वेलफेयर सोसाइटी देवा रोड चिनहट के नाम से विभाग ने किया था। इसके बाद 8 मार्च 2010 को 83 लाख 45 हजार रुपये का चेक बलरामपुर की फर्म अमित एजुकेशनल सोसाइटी को भुगतान के लिए महराजगंज पंजाब नेशनल बैक की शाखा में क्लियरेंस के लिए आया। चेक पर संदेह होने पर बैंक ने इसे रोक दिया। बैंक के रुख को भांपते हुए तत्कालीन बीएसए डॉ. रामहजूर प्रसाद और सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी ने यह कह कर पल्ला झाड़ लिया कि हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। इस पूरे प्रकरण में हर बार पेंच फंसाने की कोशिश की गई। हालांकि बीएसए डॉ. रामहजूर प्रसाद की तहरीर पर इस मामले में तत्कालीन सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी ओपी सिंह एवं लेखाकार यशवंत के खिलाफ कोतवाली सदर में धोखाधड़ी समेत अन्य आरोपों में 12 मार्च 2010 को मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में जांच चलती रही। महराजगंज के सांसद हर्षवर्धन सिंह ने इस मामले में वर्ष 2011 में हाईकोर्ट इलाहाबाद में जनहित याचिका दाखिल कर दी थी। सांसद के निधन के बाद भी हाईकोर्ट में सुनवाई चलती रही। पिछले 4 अगस्त को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट आदेश जारी कर दिया दिया है।
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पंजाब नेशनल बैंक को ऐसे हुआ संदेह
महराजगंज। स्थानीय पंजाब नेशनल बैंक की शाखा में चेक नंबर 357997 अमित एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी बलरामपुर के नाम 4 फरवरी 2010 को कटा था। जबकि चेक नंबर 357998 कैरियर एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी देवा रोड चिनहट के नाम 7 दिसंबर 2009 को जारी हुआ था। चूंकि यह चेक पहले ही क्लीयर होकर कैश हो चुका था। इसके बाद अमित एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी बलरामपुर के नाम चेक आया तो संदेह होने पर बैंक ने भुगतान रोक दिया इसके बाद बेसिक शिक्षा विभाग में हायतौबा मच गई। सभी अपना गला फंसने से बचाने लगे।
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हाईकोर्ट के आदेश पर हुई थी पुनर्विवेचना
महराजगंज। सांसद हर्षवर्धन सिंह द्वारा वर्ष 2011 में दाखिल इस पीआईएल को लेकर पुलिस ने जांच की थी। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने पुलिस की विवेचना पर असंतोष जाहिर करते हुए 28 अप्रैल 2011 को मामले की दोबारा जांच का आदेश जारी किया। इस आदेश के बाद कोतवाली पुलिस ने विवेचना शुरू की। तत्कालीन कोतवाल कमल यादव ने इस प्रकरण में तत्कालीन बीएसए डॉ. रामहजूर को भी अभियुक्त बनाया।


वर्जन
न्यायालय पर भरोसा है। हाईकोर्ट ने चार सितंबर को सरकार से जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट में मामले की अपील करुंगा।
- डॉ. रामहजुर प्रसाद, एडीआईओएस, देवरिया।
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