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प्रेमी की हत्या में प्रेमिका को दस साल की सजा
महराजगंज/ ब्यूरो
Updated Sat, 11 Jun 2016 12:18 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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नौ साल पहले प्रेमी की हत्या के मामले में कोर्ट ने प्रेमिका को दस साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है और दस हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। नौ साल पहले हत्या के मामले में कोर्ट का अब फैसला आया है।
श्यामदेउरवा थाना क्षेत्र के मोहद्दीनपुर निवासी धर्मेंद्र सिंह ने एक अगस्त 2007 को मुकदमा दर्ज कराया कि उसके पिता रामआसरे का विवाह पोखरभिंडा थाना पिपराइच जनपद गोरखपुर में मोतीलाल सिंह की इकलौती बेटी कैलाशी के साथ हुआ था। कुछ साल बाद धर्मेद्र की मां की मौत हो गई। उसके बाद वह अपनी पत्नी के साथ पोखरभिंडा में रहने लगा। वादी के पिता मोहद्दीनपुर में रहकर खेती बारी करने लगे।
इस बीच गांव की रहने वाली अमरावती से उनकी जानपहचान हो गई। इसके बाद अमरावती रामआसरे पर दबाव बनाने लगी कि वह अपनी जमीन मेरे लड़के के नाम से बैनामा कर दें। पिता के इंकार करने पर 14 जुलाई 2007 को समय करीब सात बजे अमरावती और उसके पुत्र ने लोहे की राड से पीटकर उन्हें मरणासन्न कर दिया। मेडिकल कालेज में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
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मामले में सहायक शासकीय अधिवक्ता अशोक कुमार ने गवाहों को पेश किया और अभियुक्त के खिलाफ कठोर से कठोर सजा की मांग की। गवाहों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय योगेंद्र राम गुप्ता ने अमरावती को दस साल की सजा और दस हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। वहीं उसके पुत्र को नाबालिग पाए जाने पर पत्रावली अलग कर अपचारी कोर्ट में भेज दिया।
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श्यामदेउरवा थाना क्षेत्र के मोहद्दीनपुर निवासी धर्मेंद्र सिंह ने एक अगस्त 2007 को मुकदमा दर्ज कराया कि उसके पिता रामआसरे का विवाह पोखरभिंडा थाना पिपराइच जनपद गोरखपुर में मोतीलाल सिंह की इकलौती बेटी कैलाशी के साथ हुआ था। कुछ साल बाद धर्मेद्र की मां की मौत हो गई। उसके बाद वह अपनी पत्नी के साथ पोखरभिंडा में रहने लगा। वादी के पिता मोहद्दीनपुर में रहकर खेती बारी करने लगे।
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इस बीच गांव की रहने वाली अमरावती से उनकी जानपहचान हो गई। इसके बाद अमरावती रामआसरे पर दबाव बनाने लगी कि वह अपनी जमीन मेरे लड़के के नाम से बैनामा कर दें। पिता के इंकार करने पर 14 जुलाई 2007 को समय करीब सात बजे अमरावती और उसके पुत्र ने लोहे की राड से पीटकर उन्हें मरणासन्न कर दिया। मेडिकल कालेज में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
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मामले में सहायक शासकीय अधिवक्ता अशोक कुमार ने गवाहों को पेश किया और अभियुक्त के खिलाफ कठोर से कठोर सजा की मांग की। गवाहों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय योगेंद्र राम गुप्ता ने अमरावती को दस साल की सजा और दस हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। वहीं उसके पुत्र को नाबालिग पाए जाने पर पत्रावली अलग कर अपचारी कोर्ट में भेज दिया।